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ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के 29वें स्थापना दिवस के दूसरे दिन शनिवार को सम्राट मिहिरभोज सिटी पार्क में आयोजित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये गए. एक तरफ जहाँ सुबह की कार्निवल परेड ने उत्तराखंड की झांकी आकर्षण का केंद्र रही, वहीँ शाम को आयोजित  देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक संध्या ने सभी का मन मोह लिया। दर्शकों से खचाखच भरे हॉल में उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोक गायक गोपाल मठपाल के निर्देशन में लोक गायक मुकेश कठैत, गायिका कविता गुसाईं, दीनदयाल छैलाबाबू, गौरव पन्त सहित रामगंगा सांस्कृतिक कला केंद्र के कलाकारों ने पहाड़ी लोकगीतों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां पेश कर कार्यक्रम को यादगार बना दिया.

कार्यक्रम की शुरुआत उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकगायक मुकेश कठैत के लोकगीत के साथ हुई. उसके बाद लोक गायक गोपाल मठपाल एक बहुप्रसिद्ध लोकगीत “पहाड़ा ठण्डो पाणी सुन कसि मिठी बाणी..” से दर्शकों को देवभूमि की वादियों में ले गए। इसके बाद युवा लोक गायक गौरव पन्त ने जबरदस्त हिट गीत “गढ़वाल मा बाग लग्युं, फ्वां बागा रे..” की शानदार प्रस्तुति दी, वहीँ लोक गायिका कविता गुसाईं ने भी चैता की चैत्वाली गीत गाकर दर्शकों को नाचने पर मजबूर कर दिया.

इसके बाद दीनदयाल छैलाबाबू ने बसंती छोरी.., गोपाल मठपाल और कविता गुसाईं ने हो भिना कसके जानु द्वाराहाटा.., गौरव पन्त और कविता गुसाईं ने मै नि जाना नैपाला रामरो लग्यो ये गढ़वाल मा.., मुकेश कठैत ने रूड़ी बौ ये, बसंती बौ ये .. तथा पंडों खेला पांसो आदि एक से बढ़कर एक लोकगीतों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया.

इस अवसर पर उत्तराखंड के सांस्कृतिक कार्यक्रम में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ आईएएस अधिकारी कृष्ण कुमार गुप्त मुख्य अतिथि के रूप में विराजमान रहे। उनके अलावा शहर के प्रतिष्ठित व्यक्तियों आदित्य घिल्डियाल, उत्तराखंड सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष जेपीएस रावत, नवानी जी, एक्टिव सिटीजन टीम के हरेन्द्र भाटी, अलोक सिंह, बेजेंद्र भाटी, राहुल नम्बरदार सहित कई वरिष्ठ लोगों ने इस कार्यक्रम का आनंद उठाया।winter-carniwal-greno

इस दौरान मुख्य अतिथि एसीईओ कृष्ण कुमार गुप्त को दो शब्द बोलने का अनुरोध किया गया। परन्तु उत्तराखंड में वर्षों तक अपनी सेवाएं दे चुके आईएएस अधिकारी कृष्ण कुमार गुप्त ने जब देवभूमि की शान में कसीदे कसने शुरू किये तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजायमान हो गया। उन्होंने उत्तराखंड में अपनी सर्विस के दौरान के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि उत्तराखंड देवभूमि के साथ साथ वीर भूमि भी है। सदियों से यहाँ के वीर सैनिक देश की रक्षा में सीमाओं पर डेट हुए हैं। और उनकी वजह से ही हम देशवासी आज यहाँ चैन की साँस ले रहे हैं। देवभूमि उत्तराखंड की शान में कसीदे कसते हुए उहोने आगे कहा कि जैसे मोर के सिर (मुकुट) पर कलँगी उसकी शान होती है। उसी प्रकार भारत माता के ताज की तीन कल्लंगी में से एक देवभूमि उत्तराखंड है। उन्होंने उत्तराखंड की प्राकृतिक सुन्दरता एवं सुर्रम्यता का बखान करते हुए बताया कि जो आनंद की अनुभूति देवभूमि के रमणीक स्थलों एवं हिमाच्छादित पहाड़ों को देखकर होती है वह पूरे ब्रह्माण्ड में कहीं नहीं हो सकती है।