उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जनपद अंतर्गत ग्राम सभा कुड़ी, पट्टी भदूरा निवासी शेफ अनूप रावत (33 वर्ष) की पुर्तगाल में हुई हत्या से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। विदेश में हुई इस दर्दनाक घटना ने न केवल परिजनों, बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 11 जनवरी को पुर्तगाल के एक रेस्टोरेंट में, जहाँ अनूप रावत कार्यरत थे, शराब के नशे में धुत अफ्रीकी मूल के तीन लोग जबरन घुस आए। उस समय रेस्टोरेंट और किचन बंद हो चुका था। स्टाफ द्वारा मना किए जाने के बावजूद उन्होंने ज़बरदस्ती खाना माँगा। स्थिति बिगड़ने से बचाने के उद्देश्य से रेस्टोरेंट स्टाफ ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्हें भोजन परोस दिया।
भोजन के बाद जब €45 यूरो का बिल दिया गया, तो उन्होंने भुगतान से इंकार कर दिया। विवाद सुलझाने के लिए कर्मचारियों ने बिल घटाकर €35 यूरो करने की पेशकश की, लेकिन वे इस पर भी सहमत नहीं हुए। किसी तरह उन्हें रेस्टोरेंट से बाहर निकाला गया, किंतु कुछ ही मिनटों बाद वे 20–25 अन्य लोगों के साथ हथियारों (चाकू व वाइन ओपनर) से लैस होकर दोबारा रेस्टोरेंट में घुस आए और तोड़फोड़ शुरू कर दी। इस हमले में दो कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए।
शोर सुनकर किचन से बाहर आए शेफ अनूप रावत ने हालात को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन उन पर कुर्सियाँ फेंककर हमला किया गया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और वे मौके पर गिर पड़े। तुरंत पुलिस व एम्बुलेंस को बुलाया गया और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इलाज के दौरान प्रारंभिक रूप से उनकी हालत में कुछ सुधार देखा गया, लेकिन 13 जनवरी को डॉक्टरों ने बताया कि दिमाग़ में खून जमने और सूजन के कारण उनकी स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है तथा तत्काल ब्रेन सर्जरी की आवश्यकता है। कंपनी द्वारा सर्जरी के लिए पूरी तैयारी की जा चुकी थी, परंतु सर्जरी से पहले ही उनका मस्तिष्क कार्य करना बंद कर गया। चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बावजूद 20 जनवरी को अनूप रावत का निधन हो गया।
घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय समाजसेवी एवं मानव अधिकार एवं अपराध नियंत्रण संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रोशन रतूड़ी पीड़ित परिवार की सहायता के लिए आगे आए हैं। उन्होंने स्थानीय प्रशासन से समन्वय स्थापित कर आरोपियों को हिरासत में भिजवाने और मामले की निष्पक्ष जाँच की पहल की है। साथ ही अनूप रावत के पार्थिव शरीर को स्वदेश लाकर अंतिम संस्कार हेतु परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिसमें 8 से 12 दिन का समय लग सकता है।
अनूप रावत को एक हँसमुख, मिलनसार और कर्तव्यनिष्ठ युवक के रूप में याद किया जा रहा है। उनका असमय निधन न केवल परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है।
क्षेत्रवासियों और सामाजिक संगठनों ने दिवंगत आत्मा की शांति हेतु प्रार्थना करते हुए केंद्र व राज्य सरकार से पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता प्रदान करने की मांग की है।



