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 107वीं जयंती पर विशेष: राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान से वंचित क्यों हैं हिमवंत पुत्र राष्ट्रकवि चंद्रकुंवर बर्त्वाल

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प्रकृति के अनुपम चितेरे कवि ने अल्पायु में हिंदी साहित्य को दिया अमूल्य खजाना, फिर भी राष्ट्रीय पहचान का इंतजार

दिनेश ध्यानी

देहरादून: हिमालय की गोद में जन्मे और प्रकृति को अपनी कविता का प्राण बनाने वाले महान कवि चंद्रकुंवर बर्त्वाल की 107वीं जयंती (20 अगस्त 2026) पर एक बार फिर यह सवाल उठता है कि आखिर हिंदी साहित्य के इस अनमोल रत्न को राष्ट्रीय स्तर पर वह सम्मान क्यों नहीं मिल पाया, जिसके वह वास्तविक अधिकारी हैं।

प्रकृति, पर्यावरण, हिमालय और मानवीय संवेदनाओं के अद्भुत कवि चंद्रकुंवर बर्त्वाल ने मात्र 28 वर्ष के छोटे से जीवनकाल में हिंदी साहित्य को जो अमूल्य धरोहर दी, वह किसी भी बड़े साहित्यकार की पहचान के लिए पर्याप्त है। बावजूद इसके राष्ट्रीय साहित्यिक मंचों पर उनका नाम अपेक्षित स्थान नहीं पा सका है।

 चमोली के मालकोटी गांव में हुआ था जन्म

हिमवंत पुत्र चंद्रकुंवर बर्त्वाल का जन्म उत्तराखंड के चमोली जिले के ग्राम मालकोटी, पट्टी तल्ला नागपुर में 20 अगस्त 1919 को हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा पौड़ी और देहरादून में हुई। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से 1939 में बीए की परीक्षा उत्तीर्ण की और 1941 में लखनऊ विश्वविद्यालय में एमए में प्रवेश लिया। इसी दौरान उनका संपर्क हिंदी साहित्य के महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ से हुआ।

बर्त्वाल जी बचपन से ही प्रकृति के अत्यंत करीब रहे। हिमालय की चोटियां, नदियों की कलकल ध्वनि, जंगलों की हरियाली और पहाड़ का जीवन उनकी चेतना का हिस्सा बन गए थे। यही कारण है कि उनकी कविताओं में प्रकृति केवल दृश्य नहीं बल्कि जीवंत अनुभूति बनकर सामने आती है।

 अल्पायु में रच दिया साहित्य का विशाल संसार

चंद्रकुंवर बर्त्वाल ने जीवन के केवल 28 वर्षों में हिंदी साहित्य को लगभग एक हजार कविताओं, कहानियों, एकांकियों और बाल साहित्य का अमूल्य खजाना दिया। वे हिंदी के उन विरले कवियों में शामिल हैं जिन्होंने हिमालय और प्रकृति प्रेम के साथ-साथ मानव जीवन की संवेदनाओं, पीड़ा और संघर्ष को अपनी रचनाओं में स्थान दिया।

उनकी कविताओं में प्रकृति और मनुष्य के बीच गहरा संबंध दिखाई देता है। मृत्यु, जीवन, प्रेम, विरह और अस्तित्व जैसे विषयों पर उन्होंने जिस संवेदनशीलता से लिखा, वह उन्हें हिंदी साहित्य में विशिष्ट स्थान प्रदान करता है।

 निराला से मिला साहित्यिक मार्गदर्शन

वर्ष 1939 से ही उनकी कविताएं “कर्मभूमि” साप्ताहिक पत्र में प्रकाशित होने लगी थीं। उनके सहपाठी और मित्र शंभूप्रसाद बहुगुणा ने उनकी साहित्यिक प्रतिभा को पहचानते हुए उनकी रचनाओं को संरक्षित और प्रकाशित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया।

बहुगुणा जी ने वर्ष 1945 में “हिमवंत का एक कवि” नाम से चंद्रकुंवर बर्त्वाल की काव्य प्रतिभा पर पुस्तक प्रकाशित की। बाद में उनकी अनेक कृतियां जैसे गीत माधवी, पयस्विनी, प्रेमिनी, जीतू, कंकड़-पत्थर और नंदिनी प्रकाशित हुईं।

आचार्य भारतीय और भावनगर के साहित्यकार हरिशंकर मूलानी ने उनकी कृति “नंदिनी” की प्रशंसा करते हुए इसे रस, भाव, चमत्कार और संवेदनाओं की दृष्टि से अत्यंत उत्कृष्ट बताया था।

 “मैं न चाहता युग-युग तक पृथ्वी पर जीना…”

चंद्रकुंवर बर्त्वाल हिंदी के कालिदास कहे जाने वाले महान कवि कालिदास को अपना आदर्श मानते थे। उनकी प्रसिद्ध पंक्तियां आज भी उनके जीवन दर्शन को व्यक्त करती हैं—

*”मैं न चाहता युग-युग तक पृथ्वी पर जीना,*

*पर उतना जी लूं जितना जीना सुंदर हो।*

*मैं न चाहता जीवन भर मधुरस ही पीना,*

*पर उतना पी लूं जिससे मधुमय अंतर हो।”*

इन पंक्तियों में जीवन के प्रति उनका गहरा दर्शन और सौंदर्यबोध दिखाई देता है।

 बीमारी से संघर्ष करते हुए भी जारी रखी साहित्य साधना

जीवन के अंतिम वर्षों में चंद्रकुंवर बर्त्वाल क्षय रोग (टीबी) से पीड़ित हो गए थे। उस समय इस बीमारी को लेकर समाज में भय और अंधविश्वास था। उनका इलाज नैनीताल जिले के भवाली स्थित टीबी सैनिटोरियम में भी हुआ।

परिजनों ने अगस्त्यमुनि के पास पवालिया में उनके लिए एक अलग घर बनाया, जहां वे एकांत में रहने लगे। बीमारी के कारण लोग उनसे दूरी बनाए रखते थे। परिवार के लोग उनके लिए भोजन दरवाजे पर रख जाते थे और वे अधिकांश समय प्रकृति के बीच बैठकर अपनी रचनाएं लिखते रहते थे।

मृत्यु को सामने महसूस करते हुए भी उन्होंने कलम नहीं छोड़ी। उनका एकांत, प्रकृति और कागज-कलम ही उनके जीवन के अंतिम साथी बने।

 28 वर्ष की आयु में हिमालय की गोद में ली अंतिम सांस

लगातार बीमारी से संघर्ष करते हुए 14 सितंबर 1947 को मात्र 28 वर्ष की आयु में चंद्रकुंवर बर्त्वाल का निधन हो गया। रविवार का वह दिन हिंदी साहित्य के लिए एक महान प्रतिभा को खोने का दिन था।

 

उनके निधन के बाद उनकी कई रचनाएं और साहित्यिक सामग्री नष्ट हो गईं। उस समय टीबी को लेकर लोगों में इतना भय था कि उनके कपड़े, बर्तन और कई सामान जला दिए गए। माना जाता है कि इस दौरान उनकी कई अप्रकाशित रचनाएं भी हमेशा के लिए समाप्त हो गईं।

हालांकि उनके मित्र शंभूप्रसाद बहुगुणा और बुद्धि बल्लभ थपलियाल ने उनकी बची हुई रचनाओं को सुरक्षित कर प्रकाशित कराया, जिसके बाद हिंदी साहित्य जगत में उनकी पहचान बनी।

 प्रमुख रचनाएं और कविताएं

चंद्रकुंवर बर्त्वाल की प्रमुख कृतियों में शामिल हैं—

गीत संग्रह:

* गीत माधवी

* पयस्विनी

* प्रेमिनी

* जीतू

* कंकड़-पत्थर

* नंदिनी

प्रमुख कविताएं:

* पयस्विनी

* काफल पाको

* मुझको पहाड़ ही प्यारे हैं

* घर की याद

* बसंत आगमन

* स्वर्ग सरि

* विराट ज्योति

* मेघ नंदिनी

“मुझको पहाड़ ही प्यारे हैं…”

पहाड़ों के प्रति उनके प्रेम को उनकी कविता की इन पंक्तियों से समझा जा सकता है—

*”मुझको पहाड़ ही प्यारे हैं,*

*प्यारे समुद्र मैदान जिन्हें,*

*नित रहे उन्हें वही प्यारे,*

*मुझको हिम से भरे हुए,*

*अपने पहाड़ ही प्यारे हैं।”*

यह कविता उनके हिमालय प्रेम और पहाड़ों से आत्मिक संबंध को दर्शाती है।

 राष्ट्रीय सम्मान का इंतजार

आज चंद्रकुंवर बर्त्वाल के साहित्य पर देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में शोध हो रहे हैं। उनकी जयंती और पुण्यतिथि पर साहित्यिक आयोजन भी आयोजित किए जाते हैं। लेकिन सवाल अभी भी कायम है कि हिंदी साहित्य के इस महान कवि को राष्ट्रीय स्तर पर वह पहचान और सम्मान क्यों नहीं मिला, जिसके वे अधिकारी हैं।

उत्तराखंड के इस हिमवंत कवि ने अपने छोटे से जीवन में हिंदी साहित्य को जो ऊंचाई दी, वह किसी भी युग के बड़े साहित्यकार से कम नहीं है। आवश्यकता है कि उनके साहित्य को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिले और उनकी रचनाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए।

चंद्रकुंवर बर्त्वाल केवल उत्तराखंड के नहीं, बल्कि पूरे हिंदी साहित्य जगत की अमूल्य धरोहर हैं। उनकी 107वीं जयंती पर यही सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी कि उनके साहित्य और योगदान को राष्ट्रीय मंच पर उचित सम्मान मिले।

संस्कृतिकर्मी, रंगकर्मी, शिक्षाविद प्रो. डी आर पुरोहित इंद्रमणि बडोनी सम्मान से नवाजे गए

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देहरादून: दून लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर में मंगलवार को आयोजित सादे किंतु गरिमामय समारोह में इस वर्ष का इंद्रमणि बडोनी सम्मान उत्तराखंड की प्रख्यात संस्कृतिकर्मी, रंगकर्मी, शिक्षाविद और लोक के चितेरे प्रो. दाताराम पुरोहित को दिया गया। इंद्रमणि बडोनी पुरस्कार का प्रशस्ति वाचन गढ़वाली की विख्यात कवयित्री श्रीमती बीना बेंजवाल ने किया। समारोह की अध्यक्षता दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने की, जबकि इस मौके पर मुख्य अतिथि उत्तराखंड के लोक की वाणी देने वाले गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी थे। डोईवाला डिग्री कॉलेज के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश जोशी मुख्य वक्ता थे। वरिष्ठ पत्रकार दिनेश शास्त्री, रंगकर्मी बाल कृष्ण नौटियाल, गढ़वाल विश्वविद्यालय के लोक संस्कृति व कला निष्पादन केंद्र के निदेशक गणेश खुगशाल गणी ने भी समारोह को संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन गिरीश बडोनी ने किया। इंद्रमणि बडोनी चैरिटबल फाउंडेशन पिछले चार वर्ष से लगातार यह सम्मान विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को प्रदान करता आ रहा है। इससे पूर्व बीज बचाओ आंदोलन के प्रणेता विजय जड़धारी, नरेंद्र सिंह नेगी आदि हस्तियों को यह सम्मान प्रदान किया जा चुका है।

मुख्य वक्ता डॉ. राकेश जोशी ने अपने संबोधन में डॉ. पुरोहित के जीवन के विविध पहलुओं पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि नरेंद्र सिंह नेगी ने डॉ. पुरोहित के उत्तराखंड की लोक संस्कृति के लिए दिए गए योगदान को सराहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. सुरेखा डंगवाल ने डॉ. पुरोहित से जुड़े अनेक प्रसंग साझा किए साथ ही पहाड़ के गांधी स्व. इंद्रमणि बडोनी के योगदान का भी स्मरण किया। उन्होंने कहा कि यदि इंद्रमणि बडोनी न होते तो आज उत्तराखंड भी न होता। अफसोस यह है कि वे समय से पहले चले गए, वरना उत्तराखंड की दशा और दिशा कुछ और होती, जैसा वे चाहते थे। प्रो. सुरेखा डंगवाल ने प्रो. पुरोहित के लोक संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान का भी जिक्र किया।

स्व. इंद्रमणि बडोनी कलावंत भी थे। वे राजनेता से पहले रंगकर्मी थे। चाहे दिल्ली में राजपथ पर गणतंत्र दिवस के मौके पर केदार नृत्य की प्रस्तुति हो या माधो सिंह भण्डारी भाव नाटिका का प्रस्तुतीकरण हो, रामलीला या ढोल को समाज के पुनर्स्थापित करना हो, हर विधा में उन्होंने योगदान दिया। माधो सिंह भण्डारी भाव नाटिका में उनके साथ सूत्रधार की भूमिका निभाने वाले चंपू हुड़क्या का किरदार निभाने वाले बाल कृष्ण नौटियाल भी इस मौके पर अपनी बात साझा कर गए। उन्होंने श्रोताओं को कई प्रसंग सुनाए।

इस मौके पर रियर एडमिरल ओ.पी. एस. राणा, डॉ. नंदकिशोर हटवाल, रमाकांत बेंजवाल, एस.पी. सेमवाल, अनिल नेगी, चंद्रशेखर तिवारी, बद्रीश छावड़ा, श्रीमती गीता नौटियाल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

चमोली टनल हादसा: भूस्खलन के दौरान सुरंग फंसे 10 श्रमिकों की मौत, 12 श्रमिक सुरक्षित निकाले गए, 117 घंटे बाद रेस्क्यू ऑपरेशन समाप्त

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चमोली, 18 अगस्त। उत्तराखंड के चमोली जनपद स्थित हाट-सियासैण (मायापुर, पीपलकोटी) में टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में 13 अगस्त को भूस्खलन से हुए भीषण हादसे के बाद पिछले करीब 117 घंटे से जारी राहत एवं बचाव अभियान मंगलवार को सफलतापूर्वक समाप्त हो गया। जिला प्रशासन की निगरानी में चलाए गए इस अभियान में टनल में फंसे और लापता सभी प्रभावित श्रमिकों को बाहर निकाल लिया गया। इनमें 12 श्रमिकों को सकुशल बचा लिया गया, जबकि 10 श्रमिकों की दुखद मौत हो गई।

यह हादसा 13 अगस्त 2026 की शाम उस समय हुआ था, जब एचसीसी कंपनी द्वारा निर्माणाधीन टनल में कार्य किया जा रहा था। अचानक पानी का तेज रिसाव और भूस्खलन होने से टनल के भीतर अफरा-तफरी मच गई और लगभग 22 श्रमिक प्रभावित हुए। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना, सीआईएसएफ, डीडीआरएफ, टीएचडीसी तथा अन्य एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं और युद्धस्तर पर रेस्क्यू अभियान शुरू किया।

पहले दिन 19 श्रमिक निकाले गए

रेस्क्यू अभियान के पहले दिन ही टीमों ने 19 श्रमिकों को टनल से बाहर निकाला, जिनमें 12 घायल श्रमिक जीवित थे, जबकि 7 श्रमिकों के शव बरामद हुए। इसके बाद लगातार सर्च ऑपरेशन जारी रखा गया। 15 अगस्त को एक शव, जबकि 18 अगस्त को अंतिम दो शव बरामद होने के साथ ही अभियान पूर्ण घोषित कर दिया गया।

 कठिन परिस्थितियों में चला अभियान

टनल के भीतर पानी भर जाने, भारी मलबा जमा होने और मशीनरी फंसने के कारण रेस्क्यू अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। बचाव दलों ने सक्शन पंपों की सहायता से पानी की निकासी की, भारी मशीनों से मलबा हटाया और आधुनिक उपकरणों की मदद से टनल के अंदर लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया। कठिन हालात के बावजूद सभी एजेंसियों ने दिन-रात अभियान जारी रखा।

 जिलाधिकारी ने लगातार की मॉनिटरिंग

जिलाधिकारी गौरव कुमार ने पूरे अभियान की लगातार निगरानी की। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों और विभिन्न रेस्क्यू एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए रखते हुए अभियान की प्रगति की समीक्षा की और सभी संसाधनों के प्रभावी उपयोग के निर्देश दिए। जिला प्रशासन की प्राथमिकता टनल में फंसे प्रत्येक श्रमिक तक पहुंचना और उन्हें बाहर निकालना रही।

 घायल श्रमिकों का कराया गया उपचार

रेस्क्यू के दौरान सुरक्षित निकाले गए सभी 12 श्रमिकों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। जिला प्रशासन ने उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी करते हुए आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराईं।

 इन एजेंसियों ने निभाई अहम भूमिका

इस चुनौतीपूर्ण अभियान में आईटीबीपी जोशीमठ एवं गौचर, भारतीय सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, डीडीआरएफ, सीआईएसएफ, उत्तराखंड पुलिस, जिला प्रशासन, टीएचडीसी और एचसीसी कंपनी सहित विभिन्न एजेंसियों ने संयुक्त रूप से कार्य किया। सभी टीमों के समन्वित प्रयासों से लगभग 117 घंटे तक चले अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया जा सका।

मृतकों के प्रति शोक

टनल हादसे में जान गंवाने वाले 10 श्रमिकों के निधन पर जिला प्रशासन ने गहरा शोक व्यक्त किया है। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने तथा नियमानुसार आगे की कार्रवाई किए जाने की बात कही है।

रेस्क्यू किए गए 12 श्रमिकों का विवरण

  1. सुनील दीवान पुत्र संतोश दीवान, निवासी छत्तीसगढ़।
  2. हारबिल गुड़िया पुत्र रेजन गुड़िया, निवासी तपरा।
  3. कमड़ा, निवासी झारखंड।
  4. निस्तर भिंगरा पुत्र राफेल भिंगरा, निवासी झारखंड।
  5. विनोद रावना पुत्र तुनिया रावना, निवासी झारखंड।
  6. दीना बेगरा पुत्र केला बेगरा, निवासी झारखंड।
  7. खेला राम बिसरा पुत्र मोनसा बिसरा, निवासी झारखंड।
  8. सुबेग सिंह पुत्र वीरा सिंह, निवासी पंजाब।
  9. तिलकराज पुत्र बुद्धीराम, निवासी हिमाचल प्रदेश।
  10. पेन सिंह पुत्र पीला सिंह, निवासी छत्तीसगढ़।
  11. रोहित पाण्डे पुत्र अवधेश पाण्डे, निवासी बिहार।
  12. गोविन्दो मंडाल पुत्र परीक्षित मंडाल, निवासी पश्चिम बंगाल।

मृतक श्रमिकों का विवरण

  1. प्रदीप पंवार पुत्र अवतार सिंह, निवासी टिहरी गढ़वाल।
  2. जितेन्द्र कुमार पुत्र राम चन्द्रा, निवासी उत्तर प्रदेश।
  3. मुकेश सिंह पुत्र प्रेम सिंह, निवासी चमोली।
  4. दुर्लभ शर्मा पुत्र भवानी राम शर्मा, निवासी उत्तर प्रदेश।
  5. विजय हंसदा पुत्र राम चन्द्रा, निवासी उत्तर प्रदेश।
  6. लोकेश्वर पुत्र सोन सिंह पोयम, निवासी छत्तीसगढ़।
  7. भुनेश्वर पुत्र सुरेन्द्र कुमार, निवासी छत्तीसगढ़।
  8. देवनाथ पुत्र धनसुराम बघेल, निवासी छत्तीसगढ़।(15/8/2026)
  9. लुकास टोपनो पुत्र बा़ससा टोपनो, निवासी झारखंड।(18/8/2026)
  10. चेतन पोयाम पुत्र सोनधार पोयाम, निवासी छत्तीसगढ़।(18/08/2026)

पौड़ी गढ़वाल के इस गांव में भारी बारिश से दो मंजिला मकान ढहा, मलबे में दबे चार लोग, 3 के शव बरामद, एक महिला को बचाया

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Two-storey house collapses in Mahar village

पौड़ी गढ़वाल: उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में इन दिनों बारिश का कहर जारी है। भारी बारिश और भूस्खलन से कई इलाकों में सड़कें बाधित हुई हैं। इस बीच पौड़ी गढ़वाल के महर गांव में कल रात एक दर्दनाक हादसा हो गया। तहसील सतपुली के अंतर्गत द्वारीखाल ब्लॉक के मेहरगांव (भलगांव) में बीती रात हुई मूसलाधार बारिश और भूस्खलन ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। यहां भूस्खलन की चपेट में आए दो मंजिला मकान के मलबे में दबने तीन लोगों की मौत हो गई। जबकि एक महिला को ग्रामीणों की सहायता से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

house-collapses-Mahar village-pauri garhwal

घटना की सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन, एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाया। घायल महिला को प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तत्काल सतपुली हंस चिकित्सालय पहुंचाया, जहां उसका उपचार चल रहा है।

जिलाधिकारी स्वाति एस। भदौरिया स्वयं करीब तीन किलोमीटर पैदल दुर्गम मार्ग तय कर घटनास्थल पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्यों की कमान संभाली। उन्होंने रेस्क्यू अभियान की लगातार निगरानी करते हुए अधिकारियों को सभी उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने तथा अभियान में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरतने के निर्देश दिए।

रेस्क्यू अभियान पूरा होने के बाद जिलाधिकारी ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और भरोसा दिलाया कि इस कठिन समय में जिला प्रशासन हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएगा। उन्होंने परिवार की समस्याएं भी सुनीं और आवश्यक सहायता का आश्वासन दिया।

जिला प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को तत्काल राहत प्रदान करते हुए प्रत्येक मृतक के लिए 4-4 लाख रुपये तथा क्षतिग्रस्त मकान के लिए 2 लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की। इस प्रकार पीड़ित परिवार को कुल 14 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई। तीनों शवों का नियमानुसार पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।

उर्गम घाटी में कल्पेश्वर महादेव मंदिर के पास भूस्खलन

ज्योतिर्मठ की उर्गम घाटी में स्थित पांचवें केदार भगवान कल्पेश्वर महादेव मंदिर के पास बारिश से भारी भूस्खलन हुआ है। भूस्खलन के बाद मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में पहाड़ी से आया भारी मलबा जमा हो गया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण मंदिर क्षेत्र को काफी नुकसान पहुंचा है। मलबा आने से मंदिर तक श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित हुई है। इसके चलते श्रद्धालु फिलहाल मंदिर में दर्शन के लिए नहीं पहुंच पा रहे हैं। मलबा हटाए जाने के बाद ही श्रद्धालुओं के मंदिर तक पहुंचने का रास्ता साफ हो सकेगा। बारिश के कारण क्षेत्र में हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं और लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

 

 

 

16वें महाकौथिग-2026 की कार्यकारिणी का गठन, इंद्रा चौधरी अध्यक्ष निर्वाचित; इस बार नौ दिनों तक सजेगा महाकौथिग मेला

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नोएडा। उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता के सबसे बड़े सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल 16वें महाकौथिग-2026 की तैयारियों ने गति पकड़ ली है। इस बार 9 दिवसीय महाकौथिग मेले में माँ सुरकंडा देवी के स्वरूप को मंच पर सुशोभित किया जाएगा।

रविवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में सर्वसम्मति से महाकौथिग-2026 की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। बैठक में पदाधिकारियों ने आयोजन को भव्य, सुव्यवस्थित और उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को समर्पित बनाने का संकल्प लिया।

बैठक में श्रीमती इंद्रा चौधरी को महाकौथिग-2026 का अध्यक्ष चुना गया, जबकि आदित्य घिल्डियाल को चेयरमैन और हरीश असवाल को वाइस चेयरमैन की जिम्मेदारी सौंपी गई। कार्यकारिणी में विभिन्न पदों पर अनुभवी एवं सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ताओं को दायित्व सौंपे गए हैं।

मुख्य संयोजक के रूप में राजेंद्र चौहान, संयोजिका कल्पना चौहान, उपाध्यक्ष केशव जोशी, महासचिव लक्ष्मण रावत, कोषाध्यक्ष सुबोध थपलियाल, सांस्कृतिक सचिव सीमा पंवार, सह सांस्कृतिक सचिव शीला पंत, प्रशासनिक सचिव राजेंद्र रावत, प्रमुख व्यवस्थापक आई.पी. उनियाल, वरिष्ठ व्यवस्थापक देवेंद्र सिंह रावत, वरिष्ठ सलाहकार जगत सिंह रावत, संरक्षक नरेंद्र सिंह, स्टॉल प्रभारी सुषमा जोशी, डायरेक्टर रेखा चौहान तथा मीडिया प्रभारी के रूप में रजनी ढौंडियाल जोशी एवं नीरज रावत को जिम्मेदारी सौंपी गई।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि महाकौथिग केवल एक सांस्कृतिक मेला नहीं, बल्कि उत्तराखंड की पहचान, परंपरा और विरासत को संरक्षित करने का एक जनआंदोलन है। आयोजन के माध्यम से लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक वाद्ययंत्र, लोककला, हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजन और पहाड़ी जीवनशैली को व्यापक मंच प्रदान किया जाएगा। साथ ही बच्चों और युवाओं को अपनी बोली-भाषा, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

कार्यकारिणी के पदाधिकारियों ने कहा कि आज के बदलते समय में अपनी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। महाकौथिग इसी उद्देश्य को लेकर समाज को एक मंच पर जोड़ने का कार्य करेगा। इसके माध्यम से देश-विदेश में रह रहे प्रवासी उत्तराखंडियों को भी अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

आयोजन समिति ने उत्तराखंड समाज के सभी लोगों, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों तथा संस्कृति प्रेमियों से 16वें महाकौथिग-2026 को सफल बनाने के लिए सक्रिय सहभागिता एवं सहयोग की अपील की।

नवगठित कार्यकारिणी

  • मुख्य संयोजक: राजेंद्र चौहान
  • संयोजिका: कल्पना चौहान
  • अध्यक्ष: इंद्रा चौधरी
  • चेयरमैन: आदित्य घिल्डियाल
  • वाइस चेयरमैन: हरीश असवाल
  • वरिष्ठ सलाहकार: जगत सिंह रावत
  • कोषाध्यक्ष: सुबोध थपलियाल
  • महासचिव: लक्ष्मण रावत
  • उपाध्यक्ष: केशव जोशी
  • मीडिया प्रभारी: रजनी ढौंडियाल जोशी एवं नीरज रावत
  • संरक्षक: नरेंद्र सिंह
  • सांस्कृतिक सचिव: सीमा पंवार
  • प्रशासनिक सचिव: राजेंद्र रावत
  • प्रमुख व्यवस्थापक: आई.पी. उनियाल
  • वरिष्ठ व्यवस्थापक: देवेंद्र सिंह रावत
  • स्टॉल प्रभारी: सुषमा जोशी
  • डायरेक्टर: रेखा चौहान

महाकौथिग का संकल्प

“अपनी संस्कृति – अपनी पहचान,

अपनी विरासत – अपनी शान।”

स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परेड ग्राउंड में किया ध्वजारोहण

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मुख्यमंत्री ने वीर बलिदानियों एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को किया नमन, प्रदेशवासियों को दी स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित राज्य स्तरीय मुख्य समारोह में ध्वजारोहण किया। समारोह का शुभारंभ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन से हुआ। इसके उपरांत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ध्वजारोहण किया। ध्वजारोहण के पश्चात राष्ट्रगान जन गण मन का सामूहिक गायन हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने समारोह के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों को सम्मानित किया तथा फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 14 पुलिस के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मुख्यमंत्री सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित किया। जिसमें 7 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सेवा के आधार पर एवं 6 को विशिष्ट कार्यों के आधार पर सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर सराहनीय प्रदर्शन करने वाले 13 खिलाड़ियों को भी मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले अमर शहीदों, वीर बलिदानियों एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को नमन किया। उन्होंने देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले वीर सैनिकों, अर्धसैनिक बलों एवं पुलिस के बहादुर जवानों के प्रति भी कृतज्ञता व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले राज्य आंदोलनकारियों एवं शहीदों को भी श्रद्धापूर्वक नमन किया।

मुख्यमंत्री ने हाल ही में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आई प्राकृतिक आपदाओं में प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस कठिन घड़ी में राज्य सरकार प्रत्येक प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रभावित परिवारों तक शीघ्र राहत पहुंचाना, घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना तथा जिन लोगों ने अपने घर एवं आजीविका खोई है, उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान करना है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव सामग्री पहुंचाने के साथ क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों, पेयजल एवं विद्युत लाइनों को शीघ्र दुरुस्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 अनेक दृष्टियों से ऐतिहासिक है। इस वर्ष देश स्वतंत्रता के 80वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है तथा राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। इसी वर्ष संत शिरोमणि रविदास जी महाराज की 650वीं जयंती तथा सिक्ख पंथ के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी वर्ष भी मनाया जा रहा है। उन्होंने विभाजन विभीषिका के दौरान अमानवीय यातनाएं झेलने, अपनों को खोने और विस्थापन का दर्द सहने वाले सभी लोगों को श्रद्धांजलि दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत विश्व मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। देश विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, रक्षा उत्पादन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, विज्ञान, अनुसंधान, स्टार्टअप, खेल, योग एवं आयुर्वेद सहित विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प देशवासियों के सामने रखा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि होने के साथ-साथ वीरभूमि भी है। राज्य सरकार अपने वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों एवं उनके परिवारों के कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। देहरादून में सैन्य धाम का निर्माण किया जा रहा है। बलिदानियों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये तथा परमवीर चक्र विजेताओं के परिवारों की अनुग्रह राशि 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये की गई है। प्रत्येक बलिदानी परिवार के एक सदस्य को सरकारी सेवा में समायोजित करने के साथ सेवारत एवं पूर्व सैनिकों को 25 लाख रुपये तक की संपत्ति खरीद पर स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड से विशेष लगाव है। प्रधानमंत्री की माणा, आदि कैलाश, हर्षिल एवं मुखबा की यात्राओं तथा राष्ट्रीय खेलों में सहभागिता से उत्तराखंड को विकास, पर्यटन एवं खेल के क्षेत्र में नई दिशा मिली है। राज्य के रजत जयंती वर्ष में प्रधानमंत्री ने आगामी 25 वर्षों के लिए उत्तराखंड के विकास का स्पष्ट विजन भी प्रदेशवासियों के सामने रखा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2021 में केदारनाथ की पावन धरती से प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए ‘21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा’ के मंत्र को साकार करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सरकार ने वर्ष 2035 तक विकसित उत्तराखंड के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि सड़क, रेल एवं रोपवे कनेक्टिविटी के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे तथा विभिन्न रोपवे परियोजनाओं से राज्य की कनेक्टिविटी को नई गति मिली है। जमरानी, लखवाड़, किशाऊ एवं सौंग बांध परियोजनाओं पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केदारनाथ एवं बदरीनाथ धाम के पुनर्निर्माण, केदारखंड-मानसखंड मंदिर माला मिशन, ऋषिकेश-हरिद्वार कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर, हरिपुर यमुना तीर्थ पुनर्विकास एवं शीतकालीन यात्रा जैसी पहलों से प्रदेश की आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण के साथ पर्यटन एवं अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या 47 लाख के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर चुकी है, जबकि इस वर्ष कांवड़ मेले में 4 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पवित्र कांवड़ लेकर अपने गंतव्यों की ओर रवाना हुए। शीतकालीन यात्रा को लेकर भी श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी वर्ष हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुंभ महापर्व में नया रिकॉर्ड बनेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड अब धार्मिक पर्यटन के साथ वेलनेस, एडवेंचर टूरिज्म, फिल्म शूटिंग एवं वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी तेजी से उभर रहा है। सरकार का प्रयास है कि उत्तराखंड आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु एवं पर्यटक यहां से एक अनूठा अनुभव लेकर लौटे और राज्य का ब्रांड एंबेसेडर बने। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाने के लिए स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत किया जा रहा है। इन्क्यूबेशन सेंटरों के साथ 200 करोड़ रुपये के वेंचर फंड की व्यवस्था की गई है। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। होम-स्टे योजना एवं मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के माध्यम से भी युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी विद्यालयों में कक्षा 11वीं एवं 12वीं में अध्ययनरत प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी। प्रथम चरण में 10 हजार विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा तथा इसके लिए 7 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 38वें राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन से उत्तराखंड ने खेलों के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। प्रदेश के खिलाड़ियों ने 103 पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। स्पोर्ट्स लीगेसी प्लान के अंतर्गत 8 शहरों में 23 खेल अकादमियां स्थापित की जाएंगी। महिला स्पोर्ट्स कॉलेज के साथ खेल विश्वविद्यालय के निर्माण पर भी कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण, किसान कल्याण, औद्यानिकी, विज्ञान एवं नवाचार तथा सुशासन के क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लखपति दीदी योजना के अंतर्गत प्रदेश की 3 लाख से अधिक बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। किसानों को 3 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण, कृषि उपकरणों पर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी तथा निःशुल्क नहर सिंचाई जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की पहली विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति लागू की गई है। देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी का निर्माण किया जा रहा है। साइंस एंड इनोवेशन सेंटर, लैब्स ऑन व्हील्स, डिजिटल लाइब्रेरी, पेटेंट इन्फॉर्मेशन सेंटर एवं स्टैम लैब्स जैसी पहलें राज्य में विज्ञान एवं तकनीक को बढ़ावा दे रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले एक वर्ष में राज्य की जीएसडीपी में 7.23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है तथा प्रतिव्यक्ति आय में 41 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। राज्य का बजट एक लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है। पिछले पांच वर्षों में 20 हजार से अधिक नए उद्योग स्थापित हुए हैं तथा स्टार्टअप की संख्या 700 से बढ़कर लगभग 1,750 हो गई है। उन्होंने कहा कि नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्यों के इंडेक्स में उत्तराखंड ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। सार्वजनिक वित्तीय प्रदर्शन सूचकांक एवं इंडिया इनोवेशन इंडेक्स में हिमालयी राज्यों की श्रेणी में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में एचीवर्स तथा स्टार्टअप रैंकिंग में लीडर्स की श्रेणी प्राप्त हुई है। उत्तराखंड को लगातार चार वर्षों से ‘मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट’ का गौरव भी प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता, सख्त भू-कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगारोधी कानून एवं नकल विरोधी कानून जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरी मिली है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प ऐसा उत्तराखंड बनाना है, जहां विकास के साथ विरासत, रोजगार के साथ पलायन का समाधान, आधुनिकता के साथ संस्कृति और पहचान की मजबूती सुनिश्चित हो।

मुख्यमंत्री ने की सात महत्वपूर्ण घोषणाएं

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के विकास एवं जनकल्याण से जुड़ी सात महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं –

’’1.’’ चमोली, पौड़ी एवं अल्मोड़ा में विशेष औद्योगिक पार्क स्थापित किए जाएंगे।

’’2.’’ प्रदेश के प्रथम ‘युवा आयोग’ की स्थापना की जाएगी।

’’3.’’ सीमावर्ती ग्रामों के युवाओं, भूतपूर्व सैनिकों एवं अग्निवीरों को स्वरोजगार एवं उद्यम स्थापित करने के लिए अतिरिक्त सहायता एवं प्रोत्साहन दिया जाएगा।

’’4.’’ वर्ग-3 एवं वर्ग-4 की भूमि के विनियमितीकरण की समय-सीमा का विस्तार कर भूमिधरी अधिकार दिए जाएंगे।

’’5.’’ प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत राज्यांश 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 75 हजार रुपये किया जाएगा।

’’6.’’ 18 से 30 वर्ष के युवाओं के लिए मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार एवं उद्यमिता प्रोत्साहन योजना शुरू की जाएगी। आईआईटी एवं आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से निःशुल्क उद्यमिता एवं कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा तथा उद्यम स्थापित करने के लिए बैंक ऋण की 30 प्रतिशत राशि सरकार द्वारा अनुदान के रूप में दी जाएगी।

’’7.’’ प्रदेश के बहादुर बच्चों को सम्मानित करने के लिए इस वर्ष से ‘बाल वीरता पुरस्कार’ प्रदान किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों का विश्वास सरकार के लिए राजनीतिक समर्थन मात्र नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि सरकार इस संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाने के लिए पूरी निष्ठा, प्रतिबद्धता एवं समर्पण के साथ कार्य करती रहेगी।

समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, डीजीपी दीपम सेठ, शासन के सचिवगण, जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आशीष चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून प्रमेन्द्र डोभाल एवं अन्य महानुभाव उपस्थित थे।

जिला जज ने ग्रामीण पत्रकार जगमोहन डांगी को प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित

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पौड़ी गढ़वाल: 80वें स्वतंत्रता दिवस एवं ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के अवसर पर जिला न्यायालय पौड़ी गढ़वाल में आयोजित समारोह के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में विधिक जागरूकता फैलाने और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए ग्रामीण पत्रकार के नाम से विख्यात जगमोहन डांगी को माननीय जिला जज महोदय द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

जगमोहन डांगी को यह सम्मान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पौड़ी गढ़वाल के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को कानून संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने, जरूरतमंद एवं आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निःशुल्क कानूनी सहायता से जोड़ने तथा न्याय दिलाने की दिशा में किए गए उनके सराहनीय कार्यों के लिए प्रदान किया गया।

सम्मान प्राप्त करने के बाद जगमोहन डांगी ने कहा, “यह सम्मान सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि उन सभी ग्रामीणों का है जिनकी आवाज़ मैं वर्षों से उठाता आ रहा हूँ। मेरा प्रयास आगे भी रहेगा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक कानून की जानकारी पहुंचे और हर जरूरतमंद को न्याय मिल सके।”

इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने जगमोहन डांगी को इस उपलब्धि पर शुभकामनाएं देते हुए उनके सामाजिक एवं जनहित कार्यों की सराहना की।

“80वें स्वतंत्रता दिवस पर सेक्टर बीटा-2 में निकाली गई भव्य प्रभात फेरी, वरिष्ठ नागरिकों व महिलाओं का किया सम्मान”

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ग्रेटर नोएडा। 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर शनिवार, 15 अगस्त 2026 को ग्रेटर नोएडा के बीटा-2 स्थित आई ब्लॉक की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) “जन कल्याण समिति” द्वारा ध्वजारोहण, प्रभात फेरी एवं प्रसाद वितरण कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ब्लॉक के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
आज सुबह 9 बजे आई ब्लॉक के पार्क में सभी ब्लॉकवासी एकत्रित हुए, जहां से पूरे आई ब्लॉक में प्रभात फेरी निकाली गई। प्रभात फेरी में बड़ी संख्या में महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इस दौरान प्रतिभागियों ने ‘वन्दे मातरम्’, ‘भारत माता की जय’ और अन्य देशभक्ति के नारों के साथ वीर शहीदों को श्रद्धापूर्वक याद किया।
प्रभात फेरी के उपरांत सभी लोग पार्क में एकत्रित हुए, जहां राष्ट्रीय ध्वज फहराकर तिरंगे को सलामी दी गई। ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान का सामूहिक गायन किया गया तथा देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर स्वतंत्रता सेनानियों एवं शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इस अवसर पर जन कल्याण समिति की ओर से आई ब्लॉक के वरिष्ठ नागरिकों एवं महिलाओं को सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण करने का भी दिन है। सभी से सामाजिक एकता, सौहार्द और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम में समिति की अध्यक्ष आरती शर्मा के नेतृत्व में बरिष्ठ नागरिक बैजनाथ शर्मा, प्रेमपाल, नव प्रभात, विनीत गोयल, अरुण लवानिया, जे.पी. रावत, सुशील शर्मा, राजवीर शर्मा, अरविंद पाल, सत्येन्द्र नेगी, गौरव, सुरेश, डॉ. सोनाली गुप्ता, सुनीता पाठक, प्रियंका, मीना नेगी, सीमा, दीपा, गीतिका और शिवानी सहित बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे एवं ब्लॉक निवासी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित लोगों को प्रसाद वितरित किया गया तथा राष्ट्र की एकता, अखंडता और समृद्धि के लिए सामूहिक संकल्प लिया गया।

स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस सेवादल ने धूमधाम से किया ध्वजारोहण

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श्रीनगर गढ़वाल: 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर कांग्रेस सेवादल द्वारा ध्वजारोहण कार्यक्रम का आयोजन बड़े उत्साह और देशभक्ति के माहौल में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत ‘वन्दे मातरम्’ गीत के सामूहिक गायन से हुई। इसके उपरांत वरिष्ठ कांग्रेस नेता वीरेंद्र सिंह नेगी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। ध्वजारोहण के बाद उपस्थित कार्यकर्ताओं ने ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ ध्वज गीत का सामूहिक गायन किया तथा राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन किया। इस दौरान ‘आज़ाद हिन्द ज़िंदाबाद’ और ‘वन्दे मातरम्’ के गगनभेदी नारों से पूरा वातावरण देशभक्ति से सराबोर हो गया।

कार्यक्रम का नेतृत्व जिला अध्यक्ष कांग्रेस सेवादल संजय कुमार फौजी ने किया। इस अवसर पर निशांत कण्डारी, सुनील गोस्वामी, महिला अध्यक्ष अंजू भट्ट, मोनालिसा रावत सहित कांग्रेस के अनेक पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी ने राष्ट्रध्वज को सलामी देते हुए देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर स्वतंत्रता सेनानियों एवं शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता केवल हमारा अधिकार नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता, लोकतांत्रिक मूल्यों एवं संविधान की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य भी है। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ मिलकर देश को मजबूत बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

इस अवसर पर कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्यों विजय सिंह, पूरण सिंह धनाई, द्वारिका प्रसाद, चन्द्र प्रकाश कटारिया, हरि सिंह मल, सोहन लाल शाह, संजय कुमार, धीरेन्द्र नेगी, ललित मोहन बहुगुणा, कुलदीप राज, जे.पी. बोरा, राम गोपाल, त्रिलोक सिंह बिष्ट, विजय कुमार, शशि भूषण उनियाल, भानु बिष्ट, अनिल धनाई, मथुरा प्रसाद पुरी, गजेन्द्र पुण्डीर, दलबीर सिंह धनाई, राकेश भण्डारी एवं कृपाल सिंह रावत सहित अनेक वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में सुमन आनंद, रजनी देवी, डी.पी. गोदियाल, राकेश चमोली, दलबीर सिंह दानू, जी.एन. सेमवाल सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

बाल कवि कार्तिक तिवारी की पुस्तक ‘बालपन’ का गोपेश्वर में विमोचन, 101 कविताओं में संस्कृति, पर्यावरण और विज्ञान का समावेश

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गोपेश्वर। उत्तराखंड महिला आयोग एवं बुलंदी साहित्यिक संस्था के संयुक्त तत्वावधान में वीरांगना तीलू रौतेली की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बाल कवि कार्तिक तिवारी ‘पहाड़ी’ की पहली काव्य पुस्तक ‘बालपन’ का भव्य विमोचन किया गया। यह कार्यक्रम 8 अगस्त को राजकीय इंटर कॉलेज, गोपेश्वर के प्रांगण में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।

पुस्तक ‘बालपन’ में कार्तिक तिवारी की 101 मौलिक कविताओं का संकलन है। इन कविताओं में उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति, विज्ञान, क्वांटम विज्ञान तथा सामाजिक जागरूकता जैसे विविध विषयों को सरल, सहज और रोचक शैली में प्रस्तुत किया गया है। बाल कवि ने अपनी रचनाओं के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत, प्रकृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनने का संदेश दिया है।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कार्तिक तिवारी की साहित्यिक प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि कम आयु में 101 कविताओं का सृजन करना अपने आप में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि संस्कृति, पर्यावरण और विज्ञान जैसे गंभीर विषयों को बाल साहित्य के माध्यम से प्रस्तुत करना प्रेरणादायक प्रयास है, जो अन्य बच्चों को भी रचनात्मक कार्यों के लिए प्रोत्साहित करेगा।

इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्य सोशिला शर्मा, भाजपा मीडिया प्रभारी मोहन सिंह नेगी, भगत सिंह राणा, सुरभि चक्रवर्ती, राखी चौहान, संगीता बहुगुणा, ममता शाह, संगीता बिष्ट, सेवानिवृत्त शिक्षिका बसंती देवी, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सुशीला सेमवाल, तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित मीना तिवारी एवं नर्मदा देवी, कार्तिक के पिता सुधीर तिवारी, नेहा फाउंडेशन के संस्थापक सुनील पुंडीर, चरण पादुका गोथल समिति की अध्यक्ष दीपा देवी, संतोषी कुवंर, संगीता देवी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की और बाल कवि कार्तिक तिवारी की रचनाओं से प्रेरणा लेने का संकल्प व्यक्त किया। समारोह में उपस्थित सभी लोगों ने पुस्तक ‘बालपन’ को बाल साहित्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान बताते हुए कार्तिक तिवारी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।