श्रीनगर गढ़वाल: गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर श्रीनगर गढ़वाल में आयोजित माह जनवरी की कविता कारवां काव्य संध्या राष्ट्रीय चेतना, देशप्रेम और राष्ट्रभक्ति की रचनाओं से ओत-प्रोत रही। ऊँचे पर्वतीय शिखरों पर हुए नवीन हिमपात से घाटी में बढ़ी ठिठुरन के बीच, कवियों की ओजस्वी और भावपूर्ण रचनाओं ने संध्या को गरिमा और आत्मीय ऊष्मा से भर दिया।
कार्यक्रम में प्रो. रामानन्द गैरोला ने दुष्यंत कुमार की प्रसिद्ध पंक्तियाँ “हो गई है पीर पर्वत सी, ये पिघलनी चाहिए” का सशक्त पाठ किया। श्रीमती माधुरी नैथानी ने जयशंकर प्रसाद की ओजस्वी रचना “हिमाद्रि तुंग श्रृंग से…” प्रस्तुत की। राजेन्द्र प्रसाद कपरुवाण ने रामधारी सिंह दिनकर की कविता “मानव” का पाठ किया। पार्षद प्रवेश चमोली ने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की रचना “मातृभूमि” सुनाई।
श्रीमती अनीता नौडियाल ने द्वारिका प्रसाद महेश्वरी की प्रेरक पंक्तियाँ “उठो धरा के अमर सपूतों…” प्रस्तुत कीं, जबकि डॉ. महेशानंद नौडियाल ने खालिद नदीम सानी की रचना “खत के छोटे से तराशे में नहीं आएंगे” का भावपूर्ण पाठ किया। प्रो. राजेंद्र प्रसाद थपलियाल ने प्रो. हरि राज सिंह के ग़ज़ल संग्रह से “आँचल की छाया में रहना अच्छा लगता है” प्रस्तुत की।
डॉ. प्रदीप अणथ्वाल ने महादेवी वर्मा की रचना “जो तुम आ जाते एक बार” का पाठ किया। वीरेन्द्र रतूड़ी ने मनभावन लोकगीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर किया। श्रीमती सीमा मिश्रा ने राष्ट्रीय बोध से युक्त रचना सुनाई, जबकि श्रीमती मेनका मिश्रा ने सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की प्रसिद्ध रचना “अट नहीं रही है” का पाठ किया। श्रीमती कौशल्या नैथानी ने अज्ञात कवि की रचना “गूंज रहा दुनिया में” प्रस्तुत की।
अजय प्रकाश चौधरी ने सुभद्रा कुमारी चौहान की लोकप्रिय कविता “खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी” सुनाकर वातावरण में ओज भर दिया। वरिष्ठ रंगकर्मी विमल बहुगुणा ने “राम नाम की जपनी वाले जरा सामने आओ” का सशक्त पाठ किया। विलंब से पधारे जय कृष्ण पैन्यूली ने ग़ालिब के चुनिंदा शेर प्रस्तुत किए, जबकि नीरज नैथानी ने संत कबीर की ग़ज़ल “हमन है इश्क मस्ताना…” की पंक्तियों का भावपूर्ण पाठ किया।
कार्यक्रम के समापन पर रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित राष्ट्रगान “जन गण मन अधिनायक जय हे” का समवेत स्वर में गायन किया गया, जिसके साथ देशभक्ति के नारों से वातावरण गूंज उठा। गणतंत्र दिवस की पूर्व बेला पर उपस्थित सभी नागरिकों को शुभकामनाएँ प्रेषित की गईं।
आयोजन के उपरांत डॉ. प्रदीप अणथ्वाल द्वारा सभी सहभागियों को जायका रेस्टोरेंट में जलपान कराया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय मतदाता दिवस की बधाई भी दी गई तथा अजीम प्रेमजी फाउंडेशन, श्रीनगर गढ़वाल शाखा से इसी माह सेवानिवृत्त हो रहे डॉ. प्रदीप अणथ्वाल को उनके दीर्घ, समर्पित एवं अनुकरणीय सेवाकाल के लिए शुभकामनाएँ दी गईं। उल्लेखनीय है कि डॉ. अणथ्वाल हिमालयन साहित्य एवं कला परिषद को निरंतर सहयोग प्रदान करते रहे हैं।



