नई दिल्ली: उत्तराखंड में हुए बहुचर्चित एलयूसीसी (LUCC) घोटाले के विरोध में मंगलवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रभावित महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस आंदोलन का नेतृत्व सरस्वती देवी कर रही हैं, जो अपने दल के साथ श्रीनगर गढ़वाल से लगभग 400 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर दिल्ली पहुंची हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उत्तराखंड में एक पंजीकृत संस्था द्वारा जनता की मेहनत की कमाई को हड़प लिया गया, जिससे हजारों परिवार गंभीर आर्थिक संकट में आ गए हैं। लगभग 1000 करोड़ रुपये से अधिक के इस घोटाले में सरकार की लापरवाही पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
आंदोलनकारियों के अनुसार, इस घोटाले की सबसे अधिक मार पहाड़ की महिलाओं पर पड़ी है, जिन्होंने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी इस संस्था में निवेश की थी। बीते डेढ़ वर्षों से प्रभावित महिलाएं लगातार आंदोलन कर रही हैं, लेकिन उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
जब स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं हुई, तो सरस्वती देवी के नेतृत्व में महिलाओं ने श्रीनगर गढ़वाल से दिल्ली तक पदयात्रा कर अपनी आवाज उठाने का निर्णय लिया। मंगलवार को जंतर-मंतर पर आयोजित धरना-प्रदर्शन के दौरान उन्होंने अपनी मांगों का ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति को प्रेषित किया।
इस अवसर पर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सहित कई प्रमुख सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। इनमें धीरेंद्र प्रताप, अनिल कुमार पंत, हरीपाल रावत, प्रदीप नौटियाल, प्रताप थलवाल, कुलदीप रावत, भूपेंद्र रावत, कुशाल जीना और राकेश बिंजौला प्रमुख रूप से शामिल रहे।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की है कि इस घोटाले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए तथा पीड़ितों की जमा राशि जल्द से जल्द वापस दिलाई जाए।



