देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास में आगामी 14 अप्रैल को प्रस्तावित प्रधानमंत्री के उत्तराखण्ड आगमन एवं दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर (दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे) के शुभारम्भ कार्यक्रम की तैयारियों के संबंध में एक उच्चस्तरीय बैठक ली। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस भव्य आयोजन में समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि यह कार्यक्रम जन-उत्सव का रूप ले सके।
देश की राजधानी दिल्ली और उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के बीच बना, दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर दोनों शहरों की दूरी को कम करने के लिए बनाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 नवंबर को इसका उद्घाटन करेंगे। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के खुल जाने से दोनों शहरों के बीच की दूरी सिर्फ 210 किमी रह जाएगी। इस दूरी को मात्र 2.5 घंटे में तय किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यक्रम की रूपरेखा को अत्यंत आकर्षक एवं सुव्यवस्थित बनाया जाए। उन्होंने विशेष रूप से सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भव्यता के साथ आयोजित करने पर बल देते हुए कहा कि उत्तराखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत—गढ़वाली, कुमाऊनी एवं जौनसारी लोकनृत्यों और संगीत की झलक इस आयोजन में भव्य रूप से दिखाई देनी चाहिए। कार्यक्रम स्थल को पारंपरिक एवं आधुनिक साज-सज्जा के समन्वय से सजाया जाए तथा कलाकारों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल एक सरकारी कार्यक्रम न होकर उत्तराखण्ड की संस्कृति, परंपरा और गौरव का प्रतीक बने।
कार्यक्रम से पूर्व प्रदेशभर में स्वच्छता अभियान चलाने के निर्देश देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि, प्रशासन और आम नागरिक मिलकर इस आयोजन को स्वच्छ, सुंदर और यादगार बनाएं।
दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह परियोजना उत्तराखण्ड के विकास को नई दिशा देने वाली सिद्ध होगी। इस कॉरिडोर के माध्यम से दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे पर्यटन को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही, प्रदेश में औद्योगिक और व्यवसायिक गतिविधियों का विस्तार होगा, जिससे युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। यह कॉरिडोर लॉजिस्टिक्स, परिवहन और निवेश के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगा, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय से प्रतीक्षित इस परियोजना का शुभारम्भ उत्तराखण्ड के विकास के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगा और प्रदेश को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में और अधिक सशक्त बनाएगा।
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का रूट क्या है?
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पूर्वी दिल्ली में पांडव नगर और अक्षरधाम के पास से शुरू होता है। यहां से गीता कलोनी, लोनी, बागपत, बड़ौत, शामली, सहारनपुर, गणेशपुर, डाट काली मंदिर होते हुए यह रूट देहरादून में आशारोड़ी चौक तक जाता है। यह सड़क परियोजना 6 लेन का एक्सेस कंट्रोल्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर है। जिसकी औसत स्पीड 100 किमी प्रति घंटे रखी गई है।
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर में खास क्या है?
इस सड़क परियोजना कई मायनों में खास है। देश की राजधानी दिल्ली से सिर्फ ढाई घंटे में आप इस कॉरिडोर का इस्तेमाल करके मसूरी की वादियों में पहुंच जाएंगे। कॉरिडोर की सबसे खास बात राजाजी नेशनल पार्क में बनाया गया 12 किमी का एलिवेटेड सेक्शन है। यह एशिया का सबसे बड़ा एनिमल कॉरिडोर है, जिसमें आप ऊपर से फर्राटा मारते हुए चले जाएंगे, जबकि नीचे जंगली जानवरों को किसी तरह की समस्या नहीं होगी। इसके अलावा इस सेक्शन में एलिवेटेड हिस्से पर साउंड बेरियर बनाए गए हैं, ताकि ट्रैफिक का शोर जानवरों को परेशान न करे। पूरे रूट पर 10 बड़े पुल, 2 रेलवे ओवर ब्रिज, 7 इंटरचेंज, 14 Wayside Amenities (यात्री सुविधाएं) बनाई गई हैं।
- रूट की कुल लंबाई 210 किमी
- परियोजना पर खर्च 12000 करोड़ रुपये
- सफर में कितना समय लगेगा करीब 5 घंटे
- बड़े पुल 12
- रेलवे ओवर ब्रिज 2
- इंटरचेंज 7
- यात्री सुविधाएं 14
- 200 मीटर के एलिफेंट अंडरपास भी बनाए गए
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर राजाजी नेशनल पार्क के ऊपर से गुजर रहा है, जहां पर हाथियों की संख्या काफी ज्यादा है। यहां पर 200 मीटर के दो एलिफेंट अंडरपास बनाए गए हैं और 6 डेडिकेटेट एनिमल क्रॉसिंग्स भी बनाई गई हैं। इस प्रोजेक्ट के साथ हरिद्वार के लिए एक और स्पर जोड़ा जा रहा है। हरिद्वार स्पर से चारधाम हाईवे के साथ भी बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी।
दिल्ली से देहरादून तक टोल कितना लगेगा?
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर 14 अप्रैल को आम जनता के लिए खुल जाएगा। आपने इस रूट पर फर्राटा मारने की तैयारी कर ली है तो बता दें कि कार और एसयूवी से अगर आप सफर करेंगे तो एक तरफ का टोल 675 रुपये चुकाना होगा। यानी दिल्ली से देहरादून तक या देहरादून से दिल्ली तक आप 675 रुपये का टोल चुकाकर पहुंच सकते हैं। अगर 24 घंटे के अंदर वापसी करते हैं तो दोनों तरफ का टोल कुल मिलाकर 1010 रुपये वसूला जाएगा। यानी 24 घंटे के अंदर इसी रूट से वापसी करने पर आपको सिर्फ 335 रुपये का टोल चुकाना पड़ेगा।
दिल्ली में अक्षरधाम से लोनी बॉर्डर तक पहले 18 किमी का हिस्सा टोल फ्री है। यानी आप दिल्ली में इस रूट पर बिना टोल के फर्राटा भर सकते हैं। दिल्ली की तरफ से जाने पर पहला टोल प्लाजा लोनी बॉर्डर के पास उत्तर प्रदेश में मौजूद है। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर टोल का कलेक्शन पूरी तरह से FASTag से ऑटोमैटेड होगा।



