New School Timetable in Uttarakhand

देहरादून: उत्तराखंड के सभी राजकीय और निजी प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के लिए नई समय-सारिणी निर्धारित कर दी है। शासन से जारी आदेश के तहत अब स्कूलों का संचालन साल के दो अलग-अलग मौसमों ग्रीष्मकाल और शीतकाल के अनुसार किया जाएगा। यह निर्णय छात्रों की सुविधा, मौसम की परिस्थितियों और शिक्षण गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

उत्तराखंड में स्कूलों की टाइमिंग को लेकर संशोधित आदेश जारी:

उत्तराखंड में स्कूलों की टाइमिंग को लेकर शासन ने संशोधित आदेश जारी किया है। इससे पहले 6 अप्रैल को इसी साल शासन के आदेश से स्कूलों के लिए समय सारिणी निर्धारित की गई थी। जिसमें में संशोधन कर नई समय सारिणी तय हुई है।

शासन की ओर से जारी इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पूर्व में 6 अप्रैल 2026 को जारी समय-सारिणी में आंशिक संशोधन किया गया है। अब नई समय-सारिणी को लागू करते हुए विद्यालयों का संचालन सुनिश्चित किया जाएगा। इसके साथ ही ये भी निर्देश दिया गया है कि निर्धारित शिक्षण अवधि में किसी प्रकार की कटौती नहीं की जाएगी।

 ग्रीष्मकालीन समय सारिणी: नई व्यवस्था के तहत 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक विद्यालयों का संचालन सुबह जल्दी शुरू होगा। इस दौरान प्रार्थना सभा सुबह 7:15 बजे से 7:30 बजे तक आयोजित की जाएगी। इसके बाद क्रमवार कक्षाएं संचालित होंगी। ग्रीष्मकाल में कक्षाओं की समय-सारिणी कुछ इस तरह रहेगी।

स्कूलों में ग्रीष्मकालीन समय सारिणी

  • पहली कक्षा 7:30 से 8:10 (40 मिनट)
  • दूसरी कक्षा 8:10 से 8:50 (40 मिनट)
  • तीसरी कक्षा 8:50 से 9:30 (40 मिनट)
  • चौथी कक्षा 9:30 से 10:10 (40 मिनट)
  • मध्यांतर 10:10 से 10:40 (30 मिनट)
  • पांचवीं कक्षा 10:40 से 11:15 (35 मिनट)
  • छठी कक्षा 11:15 से 11:50 (35 मिनट)
  • सातवीं कक्षा 11:50 से 12:25 (35 मिनट)
  • आठवीं कक्षा 12:25 से 1:00 (35 मिनट)

इस तरह ग्रीष्मकाल में विद्यालय सुबह 7:15 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक संचालित होंगे।

शीतकालीन समय-सारिणी: वहीं, 1 अक्टूबर से 31 मार्च तक लागू रहने वाली शीतकालीन समय-सारिणी में विद्यालय देर से शुरू होंगे। इस दौरान प्रार्थना सभा सुबह 8:45 बजे से 9:00 बजे तक आयोजित की जाएगी। शीतकाल में कक्षाओं की समय-सारिणी कुछ इस तरह रहेगी।

स्कूलों में शीतकालीन समय सारिणी

  • पहली कक्षा 9:00 से 9:45 (45 मिनट)
  • दूसरी कक्षा 9:45 से 10:30 (45 मिनट)
  • तीसरी कक्षा 10:30 से 11:15 (45 मिनट)
  • चौथी कक्षा 11:15 से 12:00 (45 मिनट)
  • मध्यांतर 12:00 से 12:30 (30 मिनट)
  • पांचवीं कक्षा 12:30 से 1:10 (40 मिनट)
  • छठी कक्षा 1:10 से 1:50 (40 मिनट)
  • सातवीं कक्षा 1:50 से 2:30 (40 मिनट)
  • आठवीं कक्षा 2:30 से 3:10 (40 मिनट)

इस तरह शीतकाल में विद्यालयों का संचालन सुबह 8:45 बजे से दोपहर 3:10 बजे तक किया जाएगा।

सरकार ने इस आदेश में एक महत्वपूर्ण प्रावधान भी रखा है। यदि किसी विद्यालय की भौगोलिक परिस्थितियां, जैसे पहाड़ी क्षेत्र, मौसम या परिवहन संबंधी दिक्कतें समय-सारिणी में बदलाव की मांग करती हैं, तो उस स्थिति में विद्यालय स्तर पर प्रस्ताव तैयार किया जा सकता है।

इस प्रस्ताव पर निर्णय लेने के लिए एक समिति गठित की जाएगी, जिसमें संबंधित जिले के जिलाधिकारी या उनके प्रतिनिधि अध्यक्ष होंगे। इसके अलावा मुख्य शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी और संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य सदस्य के रूप में शामिल होंगे। यह समिति प्रस्ताव का परीक्षण कर जरूरी निर्णय लेगी।

शासन ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि किसी भी स्थिति में निर्धारित शिक्षण अवधि में कमी नहीं की जाएगी। यानी समय-सारिणी में बदलाव या स्थानीय स्तर पर संशोधन के बावजूद पढ़ाई के कुल समय को बरकरार रखना अनिवार्य होगा। यह निर्णय शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

इस आदेश से यह भी संकेत मिलते हैं कि शिक्षा विभाग अब विद्यालयों की कार्यप्रणाली को ज्यादा व्यवस्थित और एकरूप बनाना चाहता है। अलग-अलग जिलों और विद्यालयों में समय-सारिणी को लेकर जो भिन्नताएं देखने को मिलती थीं, उन्हें कम करने की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है।