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श्राद्ध पक्ष में दिवंगत साहित्यकारों को शब्दांजलि: संदीप रावत की गढ़वाली पुस्तक ‘तर्पण’ का लोकार्पण

मेरठ: प्रसिद्ध गढ़वाली लेखक एवं कवि संदीप रावत की दिवंगत गढ़वाली साहित्यकारों पर आधारित संस्मरण संग्रह ‘तर्पण’ का भव्य लोकार्पण मेरठ के कंकरखेड़ा स्थित उत्कर्ष प्रकाशन कार्यालय में हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर उत्कर्ष प्रकाशन द्वारा संदीप रावत को गढ़वाली भाषा एवं साहित्य में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘गढ़वाली गौरव सम्मान-2026’ से भी सम्मानित किया गया।

लोकार्पण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली से आए प्रसिद्ध गढ़वाली पजलकार जगमोहन सिंह रावत ‘जगमोरा’ उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कवि, फिल्म निर्माता एवं निर्देशक गिरीश त्यागी ने की। समारोह में गढ़वाली व्यंग्यकार संदीप घनशाला, गीतकार एवं लेखक मोहन सिंह नेगी, सुनील रावत, प्रकाशक हेमन्त शर्मा, प्रीति शर्मा, अक्षय शर्मा, ग़ज़लकार मंगल सिंह ‘मंगल’, महेंद्र रस्तोगी, कवि यशपाल रस्तोगी, शीतल खंतवाल सहित मेरठ में रह रहे अनेक गढ़वाली साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि जगमोहन सिंह रावत ‘जगमोरा’ ने कहा कि संदीप रावत लंबे समय से गढ़वाली साहित्य की निरंतर सेवा कर रहे हैं। दिवंगत साहित्यकारों पर आधारित उनका यह संस्मरण संग्रह गढ़वाली साहित्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय प्रयास है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे गिरीश त्यागी ने कहा कि श्राद्ध पक्ष के दौरान दिवंगत साहित्यकारों को स्मरण करते हुए प्रकाशित हुई ‘तर्पण’ पुस्तक की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है। यह पुस्तक साहित्यकारों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

गढ़वाली व्यंग्यकार एवं कवि संदीप घनशाला ने कहा कि संस्मरण लेखन अत्यंत श्रमसाध्य विधा है। इस पुस्तक में संस्मरणों के साथ-साथ दिवंगत साहित्यकारों के जीवन और साहित्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी समाहित की गई हैं, जो इसे संग्रहणीय बनाती हैं।

पुस्तक के लेखक संदीप रावत ने बताया कि ‘तर्पण’ में गढ़वाल के 13 दिवंगत साहित्यकारों से जुड़े उनके आत्मीय संस्मरण संकलित हैं। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक उनके प्रति शब्दांजलि और भावांजलि स्वरूप समर्पित है। उन्होंने यह भी बताया कि अब तक उनकी गढ़वाली भाषा की विभिन्न विधाओं में आठ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

उत्कर्ष प्रकाशन के प्रकाशक हेमन्त शर्मा ने बताया कि संदीप रावत का गढ़वाली कथा संग्रह ‘उदरोळ’ भी उत्कर्ष प्रकाशन से प्रकाशित हो चुका है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा गढ़वाली के संरक्षण और संवर्धन के लिए संदीप रावत द्वारा किए जा रहे प्रयास अत्यंत सराहनीय हैं।

कार्यक्रम का समापन गढ़वाली भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के संकल्प के साथ हुआ। समारोह में उपस्थित साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों ने पुस्तक ‘तर्पण’ को गढ़वाली साहित्य की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए लेखक को शुभकामनाएं दीं।