देहरादून: पहाड़ में प्रचुर मात्रा में हो रहे माल्टा फल को उचित मूल्य दिलाने और उसके उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सामाजिक संस्था ‘धाद’ ने होली के अवसर पर विशेष पहल की। शहर स्थित बूढ़ दादी मिलेट कैफे में आयोजित होली मिलन कार्यक्रम में होलियारों ने पारंपरिक फाग गीतों के साथ ‘माल्टा मोहितो’ का आनंद लिया और माल्टा रस की बोतल का शुभारंभ किया गया।

कार्यक्रम में गढ़वाल की होली के गीतों की प्रस्तुति सुशील पुरोहित, शांति बिन्जोला, सरिता मैंदोलिया, हेमलता उनियाल और श्रीयांश उनियाल ने दी, जबकि कुमाऊं की होली के रंग नीतू फुलेरा एवं उनके परिजनों ने बिखेरे। लोकगीतों और रंगों के बीच माल्टा आधारित पेय ने आयोजन को विशेष स्वरूप प्रदान किया।

तीन वर्षों से चल रहा है अभियान

धाद के सचिव तन्मय ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से संस्था पहाड़ में अधिक मात्रा में हो रहे माल्टा फल के पक्ष में समाज और शासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए अभियान चला रही है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष सामाजिक अभियान के रूप में माल्टा को उचित मूल्य दिलाने के प्रयास के साथ ‘फंची सहकारिता’ के सहयोग से माल्टा रस को बोतलबंद कर बाजार में उतारने की पहल की गई है। साथ ही आमजन से अपील की गई है कि होली और आने वाली गर्मियों में स्थानीय माल्टा रस को अपनाएं।

लोक पर्वों को सामाजिक उद्देश्य से जोड़ने की पहल

धाद के उपाध्यक्ष डी.सी. नौटियाल ने कहा कि संस्था ने सदैव उत्तराखंड के लोक पर्वों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का प्रयास किया है। हरेला, इगास और फूलदेई के बाद इस बार होली को पहाड़ के फलों के रस के उपयोग से जोड़कर स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की पहल की गई है।

इस अवसर पर धाद के सदस्यों, फंची सहकारिता के साकेत रावत और किशन सिंह सहित उपस्थित होलियारों एवं सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं—मोहित डिमरी, प्रांजल नौटियाल, जन जागृति चेतना मंच के अनिरुद्ध डोबरियाल, मेजर महाबीर रावत, राजीव पांथरी, बृज मोहन उनियाल, सुरेंद्र अमोली, मनोहर लाल, कंचन बुटोला, सुशीला गुसाईं, धर्म सिंह, नरेंद्र नेगी और अनुराधा खंडूरीने माल्टा  रस का सामूहिक लोकार्पण किया।

कार्यक्रम का समापन पारंपरिक होली गीतों, आपसी मिलन और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के संकल्प के साथ हुआ।