नई दिल्ली : उत्तराखंड की बेटी किरन नेगी के हत्यारों को फांसी दिलाने के लिए आज एक बार फिर दिल्ली/एनसीआर का उत्तराखंडी समाज दिल्ली के जंतर-मंतर पर एकजुट एकमुट हुआ। सभी ने एक स्वर में मांग की कि उत्तराखंड के बेटी किरन नेगी के साथ जिन दरिंदों ने गैंगरेप किया और हैवानियत की सारी हदें पार की इन दरिंदों को जल्द से जल्द फांसी की सजा दी जाए।

आज 6 मई को नजफगढ़ की दामिनी न्याय संघर्ष समिति, उत्तराखण्ड एकता मंच, उत्तराखण्ड लोक भाषा साहित्य मंच समेत दिल्ली एनसीआर की कई संस्थाओं के सहयोग से उत्तराखंड समाज के सैकड़ों लोगों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर शाम करीब 5 से 6 बजे तक कैंडिल मार्च कर नजफ़गढ़ की निर्भया (दामिनी) के गुनहगारों को फांसी देने की मांग करते हुए दामिनी को शीघ्र न्याय दिलाने की मांग की। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में पहुंचे उत्तराखंड समाज के लोगों ने “किरन नेगी के हत्यारों को फांसी दो-फांसी दो” नारों से पूरे जंतर-मंतर को गुंजायमान कर दिया। सभी ने गुनाहगारों को फांसी दो की मांग करते हुए घरना स्थल पर मोमबतियां जलाई।

किरन नेगी के माता पिता

कैंडल मार्च में पहुंचे किरन नेगी के माता-पिता ने नम् आंखों से कहा की हमें माननीय सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा हैं कि जिन दरिंदों ने हमारी बेटी के सपनों को कुचला। माननीय सुप्रीम कोर्ट उन दरिंदों को जल्द से जल्द फांसी की सजा देकर हमारी बेटी को न्याय देगा।

उहोंने कहा कि हम पीछे 10 साल के अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए लड़ रहे है। हमारे साथ उत्तराखंड के लोग खड़े है। इसी उम्मीद में हम आज उत्तराखंड के इन हजारों लोगों और सामाजिक संगठनों के साथ इन हजार मोमबत्तियों की रोशनी के साथ इस लिए चल रहे है कि हमारी बेटी किरन, जिसकी रोशनी से हमारा घर जगमगा जाता था। उसके जाने के बाद हमारे घर संसार में अंधेरा है। लेकिन माननीय सुप्रीम कोर्ट हमारे जीवन में अंधेरा करने वाले इन दरिंदों को फांसी की सजा देकर। हमारे घर में एक बार फिर से रोशनी की किरन जगमगाएगा। हमें उम्मीद हैं कि जैसे निर्भाया के हत्यारों को फांसी की सजा की तैयारी चल रही है। ठीक वैसे ही, हमारी बेटी किरन नेगी के हत्यारों को भी जल्द से जल्द फांसी के तख्त पर लटका दिया जाएगा।

क्या हुआ था नजफ़गढ़ की दामिनी के साथ

बता दें कि दिल्ली के नजफगड़ में रहने वाली उत्तराखंड की बेटी किरन नेगी 9 फरवरी 2012 को गुडगाँव स्थित कम्पनी से काम करके अपनी तीन सहेलियों के साथ रात करीब 8:30 बजे नजफगढ़ स्थित छाँवला कला कालोनी पहुंची थी कि तभी कार में सवार तीन वहसी दरिंदों ने तीनो लड़कियों से बदतमीजी करनी शुरू कर दी। जैसे ही तीनों लड़कियां वहां से भागने लगी उसी दौरान तीनो दरिन्दे किरन को जबरन कार में बिठाकर वहां से ले गए। और उसका सामूहिक बलात्कार करने के बाद उसके आँख, कान में तेज़ाब डालकर हैवानियत की सारी हदें पार कर उसकी लाश को हरियाणा के खेतों में फेंक कर चले गए। उसकी सहेलियों ने किरन के अपहरण की खबर पुलिस व उसके घरवालों को दी। परन्तु पुलिस ने इस पर कोई कार्यवाही नहीं की।

जिसके बाद उत्तराखंड समाज के लोगों ने सड़कों पर निकलकर इस घटना का जबरदस्त विरोध किया जिसके बाद पुलिस हरकत में आई और 14 फरवरी को किरन की लाश सदी गली हालत में पुलिस को हरियाणा के खेतों से मिली। और पुलिस ने अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। जिसके बाद द्वारका कोर्ट ने दोषियों को फाँसी की सजा निर्धारित की और फिर हाईकोर्ट ने भी फांसी की सजा को बरकरार रखा। अब 10 साल बाद सुप्रीम कोर्ट इन आरोपियों की सजा पर अंतिम सुनवाई देने जा रहा है। इसी को लेकर दिल्ली/एनसीआर की तमाम उत्तराखंडी सामाजिक संस्थाओं के लोगों ने आज (6 मई को) शाम 5 बजे जंतर-मंतर पर कैंडल मार्च निकाल कर माननीय जजों से नजफ़गढ़ की निर्भया को शीघ्र न्याय देने की मांग की।