नोएडा: हाल ही में भाजपा जिला पदाधिकारियों के गठन एवं विभिन्न समितियों में प्रतिनिधित्व को लेकर उत्तराखंड समाज में गहरी नाराज़गी देखने को मिल रही है। समाज के लोगों का कहना है कि नोएडा में लगभग 1. 5 से 2 लाख की जनसंख्या होने के बावजूद उत्तराखंड समाज को अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, संगठन में गुर्जर समाज से 3, पंजाबी समाज से 3, यादव समाज से 2 तथा त्यागी समाज से 2 लोगों को शामिल किया गया है। वहीं उत्तराखंड समाज से केवल एक महिला को महिला कोटे के अंतर्गत स्थान दिया गया, जिसे समाज के लोग औपचारिकता मात्र बता रहे हैं।
उत्तराखंड समाज के प्रतिनिधियों का आरोप है कि जिन योग्य व्यक्तियों के नाम प्रस्तावित किए गए, उन्हें उम्र अधिक होने का हवाला देकर अस्वीकार कर दिया गया। जबकि इसी चयन प्रक्रिया में 62 वर्ष तक के अन्य व्यक्तियों को जिम्मेदारी दी गई है, जिससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
समाज के लोगों ने यह भी बताया कि मंडल गठन के समय भी इसी प्रकार की स्थिति देखने को मिली थी, जब उम्र के आधार पर कई योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं दिया गया। इस दोहराव से समाज में असंतोष और आक्रोश और अधिक बढ़ गया है।
वर्तमान स्थिति को लेकर समाज के प्रमुख व्यक्तियों के बीच लगातार विचार-विमर्श जारी है और आगे की रणनीति पर चर्चा की जा रही है। समाज के प्रतिनिधियों ने मांग की है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए तथा उत्तराखंड समाज को उसकी जनसंख्या और योगदान के अनुरूप उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही इस संबंध में संतोषजनक समाधान नहीं निकाला गया, तो समाज सामूहिक निर्णय लेकर आगे की कार्रवाई कर सकता है।



