World Theatre Day

श्रीनगर गढ़वाल: विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर 27 मार्च 2026 को श्रीनगर गढ़वाल में प्रतिष्ठित नाट्य संस्था शैलनट द्वारा एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम अजीम प्रेमजी फाउंडेशन शाखा श्रीनगर के सभाकक्ष में संपन्न हुआ, जिसमें रंगमंच से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों और अनुभवों पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ रंगकर्मी मदन लाल डंगवाल ने की, जबकि संचालन प्रसिद्ध कवि एवं रंगमंच से जुड़े साहित्यकार नीरज नैथानी द्वारा किया गया।

रंगमंच के महत्व पर हुआ व्यापक विमर्श

इस अवसर पर शैलनट अध्यक्ष अभिषेक बहुगुणा ने अपने संबोधन में बताया कि रंगमंच कला, संस्कृति और अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि “इंटरनेशनल थिएट्रिकल इंस्टीट्यूट” की स्थापना 27 मार्च 1961 को की गई थी, इसी कारण हर वर्ष 27 मार्च को विश्व रंगमंच दिवस मनाया जाता है।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि रंगमंच केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने का प्रभावी माध्यम भी है।

वैदिक काल से आधुनिक रंगमंच तक की यात्रा पर चर्चा

कार्यक्रम के संचालक नीरज नैथानी ने वैदिक काल से लेकर नाट्य शास्त्र तक रंगमंच के विकास की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भरत मुनि द्वारा रचित नाट्य शास्त्र को ‘पंचम वेद’ भी कहा जाता है, जो भारतीय रंगमंच की आधारशिला है।

कलाकारों ने साझा किए विचार

संगोष्ठी में महेश गिरि (महंत कटकेश्वर मंदिर), गणेश बलुनी, डॉ. प्रदीप अंथ्वाल, जय कृष्ण पैन्यूली ‘माटी’, अंकित उछोली, डॉ. प्रकाश चमोली, अंकिता कंडारी, माधव गैरोला, मीमांसा चमोली, शिवांक नौटियाल, प्रवेश बुटोला, अरुणेश मिश्रा, युवराज सिंह सहित कई रंगकर्मियों और बुद्धिजीवियों ने अपने विचार रखे।

वक्ताओं ने कहा कि आज के डिजिटल युग में भी रंगमंच की अपनी अलग पहचान है। यह कला मानव संवेदनाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है और समाज को जागरूक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

भविष्य की योजनाओं पर बनी सहमति

संगोष्ठी के अंत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि नगर क्षेत्र में रंगमंचीय गतिविधियों को और सक्रिय करने के लिए समय-समय पर कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। साथ ही प्रभावशाली नाट्य प्रस्तुतियों के मंचन के लिए भी सार्थक प्रयास किए जाएंगे।

विश्व रंगमंच दिवस पर आयोजित यह संगोष्ठी न केवल रंगकर्मियों के लिए विचार-विमर्श का मंच बनी, बल्कि क्षेत्र में रंगमंच को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी साबित हुई।