पौड़ी: पौड़ी गढ़वाल के मनियारस्यूं पट्टी की ग्राम साकनी बड़ी में आयोजित दिवस कालीन रामलीला के तृतीय दिवस पर रामलीला मंचन में सीता स्वयंवर के दौरान परशुराम लक्ष्मण संवाद, क्षण भर के लिए रावण का प्रकट होना, देश विदेश से आए राजा महाराजाओ द्वारा धनुष तोड़ने का अंदाज के मनमोहक दृश्य दर्शकों को आकर्षित करने वाले थे। खुले आसमान के नीचे खेतों में दिन में होने वाली रामलीला मंचन को देखने के लिए भारी संख्या में दर्शक ग्राम साकनी पहुंच रहे है।
साकनी बड़ी की रामलीला के 45 वीं वार्षिक मंचन के तीसरे दिन जब राजा जनक के दरबार में सीता स्वयंवर के दौरान भगवान श्री राम द्वारा शिव धनुष को चूर चूर कर दिया गया, तो इसकी भनक जब परशुराम को लगी। वह वास्तविक स्थिति का जायज़ा लेने राजा जनक के दरबार में पहुंचे गए। जब उन्होंने राजा जनक और राम से शिव की खंडित धनुष के बारे में पूछताछ की, तो उन्हें उचित ज़बाब नहीं मिला। इसके पश्चात धनुष के खंडित होने को लेकर परशुराम और लक्ष्मण के मध्य काफी देर तक संवाद चलता रहा। इस दौरान आक्रोश में आए लक्ष्मण द्वारा शिव धनुष के बारे में कह दिया गया कि उनके द्वारा बालपन में ऐसे ऐसे कई धनुष तोड़े गए हैं। यह सुनकर परशुराम का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया, परशुराम ने लक्ष्मण को चेतावनी देते हुए कहा कि वे पहले भी अपने इस धारदार फरसे से कई बार इस धरती को क्षत्रिय विहीन कर चुके हैं और वह लक्ष्मण को भी यमलोक पहुंचा देंगे। ऐसा सुनकर भगवान श्री राम ने क्रोधित परशुराम को समझाने की कोशिश की, लेकिन उनकी एक न चली।
इसके बाद गुरु वशिष्ठ ने परशुराम को वास्तविक स्थिति से अगवत कराते हुए कहा कि श्री राम भगवान विष्णु का अवतार है। और यह सुनते परशुराम क्रोध शांत हो गया और उनका राजा जनक के दरबार से जाने का दृश्य दिखाया गया। उसके बाद भगवान राम सीता को लेकर अयोध्या को लौट गए।
आज तीसरे दिवस की रामलीला में मुख्यातिथि हर वर्ष की भांति जिला पंचायत सदस्य गढ़कोट संजय डबराल की उपस्तिथि रही। इस अवसर पर उनके साथ क्षेत्र पंचायत सदस्य मिरचोड़ा विवेक नेगी, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य नवीन भट्ट, सामाजिक कार्यकर्ता सुनील कुमार, ग्राम प्रधान लक्ष्मी देवी, पूर्व प्रधान अर्चना पवार आदि मौजूद रहे।
रामलीला समिति के अध्यक्ष जसवंत सिंह रावत ने बताया की रामलीला मंचन के दौरान भारी संख्या में प्रवासी लोग गांव आते है। और रामलीला मंचन और इस धार्मिक विरासत को आगे बढ़ाने में सहयोग करते है। रामलीला मंचन के कारण गांव के प्रवासी बंधु और गांव के रैवासीयों का मिलन भी हो जाता है। और पुराने बुजुर्ग कलाकार जिन्होंने रामलीला की नीव रखी, उनकी बालपन की यादें ताजी हो जाती हैं। और नई पीढ़ी को उन मंझे हुए बुजुर्ग कलाकारों से मार्गदर्शन के रूप में बहुत कुछ सीखने और समझने को मिल जाता है। रामलीला मंचन में अभिनय करने वाले कलाकारों को आवाज के साथ विगत वर्षों से संगीत दे रहे स्थानीय लोक गायक एवं संगीतकार मनीष पंवार जो बीच बीच में अतिथियों एवं दर्शकों अनुरोध पर अपनी मखमली आवाज़ से भजनों और गीतों की भी प्रस्तुतियां देते है। उनके साथ गांव के ही स्थानीय लोक गायक सुरजीत पवार भी बीच-बीच में दर्शकों को अपने भजनों की प्रस्तुतियां देते रहे।
रामलीला मंचन के दौरान सीता स्वयंवर के बाद राजा जनक के दरबार में कर्मवीर सोनी एवं भारत सिंह नेगी द्वारा लोक नृत्य कर सबका मनमोह लिया। रामलीला के संस्थापक सदस्य प्रताप सिंह रावत एवं रामलीला समिति के अध्यक्ष जसवंत सिंह रावत एवं उनके समिति के सभी सदस्यों ने अतिथियों का फूलमाओ से स्वागत किया। रामलीला का शुभारंभ 14 नवंबर को शुरू हुआ जो कि 23 नवंबर राज्याभिषेक तक चलेगी।
जगमोहन डांगी



