पौड़ी: पौड़ी गढ़वाल की गगवाडस्यूं घाटी के तमलाग गांव में ऐतिहासिक मोरी मेले का आयोजन 7 दिसंबर से शुरू होने जा रहा है। हर 12 वर्ष बाद आयोजित होने वाला यह मेला छह माह तक धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजनों के साथ पूरे क्षेत्र की आस्था और परंपरा का केंद्र बनेगा। मेले में बड़ी संख्या में प्रवासी ग्रामीण भी अपने मूल गांव लौटकर प्रतिभाग करेंगे।

शुक्रवार को पौड़ी में आयोजित प्रेस वार्ता में मोरी मेला आयोजन समिति के अध्यक्ष सुबोध नैथानी और मीडिया प्रभारी प्रदीप रावत ने जानकारी दी कि हर 12 वर्ष में आयोजित होने वाला यह मेला स्थानीय संस्कृति को जीवंत बनाए रखने की एक प्राचीन परंपरा है। उन्होंने बताया कि मेले में छह महीने तक पांडव नृत्य सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। पूरी गगवाडस्यूं घाटी के गांव इस मेले में भागीदारी निभाते हैं।

गणेश पूजन से होगी शुरुआत, देवप्रयाग तक पैदल यात्रा

मेले की शुरुआत गणेश पूजन से होगी। इसी क्रम में देवप्रयाग तक की पारंपरिक पैदल यात्रा भी आयोजित की जाएगी, जिसमें श्रद्धालुओं और प्रवासी ग्रामीणों की बड़ी संख्या शामिल होती है। समिति ने बताया कि यह मेला नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने और पारंपरिक लोक कलाओं को जीवित रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन से सहयोग की अपील

समिति ने बताया कि पेयजल, यातायात एवं सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन से सहयोग मांगा गया है। समिति एवं ग्राम पंचायत प्रधान सुबोध नैथानी के नेतृत्व में एक शिष्ट मंडल जिलाधिकारी से मिलने पहुंचा था, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।

समिति ने प्रेस वार्ता के माध्यम से जिला प्रशासन से मेले के सफल आयोजन हेतु आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की अपील की है।

(जगमोहन डांगी)