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सतपुली : विधायक दिलीप रावत ने किया मोटर पुल का शिलान्यास

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सतपुली : विकासखंड जयहरीखाल के अन्तर्गत सतपुली सिसल्डी मोटर मार्ग पर मधुगंगा नदी में 4.68 करोड़ की लागत से बनने वाले 45 मीटर स्पान के स्टील ट्रस मोटर पुल का शिलान्यास लैंसडाउन विधायक दलीप रावत द्वारा किया गया। इस मौके पर ग्रामीणों को संबोधित करते हुए विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में प्रदेश चंहुमुखी विकास की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि लैंसडाउन विधानसभा में भी मुख्यमंत्री के निर्देशन में विकास की गंगा बहाई जा रही है। कोरोना काल में भी मुख्यमंत्री ने प्रदेश का सफल नेतृत्व करते हुए विकास कार्यों को बाधित नहीं होने दिया। उन्होंने आगे कहा कि क्षेत्र को पर्यटन स्वरोजगार से जोड़कर बेरोजगारी पर नकेल कसी जाएगी। इस मौके पर उन्होंने ग्रामीणों से विकास कार्यो में सहभागिता निभाने का आह्वान भी किया।

इस मौके पर भाजपा जयहरीखाल मंडल अध्यक्ष किरण बौंठियाल, विधायक प्रतिनिधि धर्मेंद्र नेगी, जिला पंचायत सदस्य सर्वेंद्र कुकरेती, जेष्ठ प्रमुख जयहरीखाल अजय ढौंडियाल, मंडल अध्यक्ष सतपुली बृजमोहन रावत समेत अनेक ग्रामीण एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

मनीष खुगशाल ‘स्वतन्त्र’

“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता”, जानिए कल से होने वाले शारदीय नवरात्रि का महात्म्य

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हमारी भारतीय संस्कृति सभी संस्कृतियों में सर्वश्रेष्ठ तथा अतुलनीय मानी जाती है। इसी अद्भुत संस्कृति के कारण हमारे भारत वर्ष की गरिमा जगत गुरु के रूप में रही है। यहाँ नारी शक्ति को सर्वोपरि महत्व दिया जाता रहा है। इसी आधार पर मनुस्मृति में इस बात की प्रमाणिकता देखने को मिलती है कि “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता” अर्थात जहाँ नारियों की पूजा होती है, वहा देवता निवास करते हैं। माँ शक्ति उपासक छायावादी काव्य धारा के प्रति निधि कवि जयशकर प्रसाद ने कहा था नर से बढकर नारी। नारी मनुष्य के जीवन में कई रुपों में दृष्टि गोचर होती है। नारी के बिना मनुष्य अपूर्ण माना जाता है। इसी कारण हमारे यहाँ नारी को देवी का रुप माना जाता है। इसका साक्षात प्रमाण नवरात्रि का त्योहार है। नवरात्रि पूजा के आठवें व नौवें दिन नौ कुंवारी कन्याओं का पूजन कर उन्हें भोजन कराने व यथोचित उपहार देने की परम्परा रही है। जीवन के विभिन्न रुपो में नारी ही सच्ची मार्गदर्शिका होती है. माँ ही जीवन का आधार तथा केन्द्र बिन्दु होती है। मा के बिना जीवन की कल्पना नहीं कर सकते हैं। मा बच्चे को 9 मास गर्भ में धारण करके अनेक प्रकार का कष्ट सहन करती है। इसी कारण मा को सर्वश्रेष्ठ स्थान दिया गया है। जिसका स्मरण करने मात्र से ही सभी प्रकार के क्लेश समाप्त हो जाते हैं। यही कारण है कि हमारे यहाँ गंगा माता, गौ माता, पृथ्वी माता कहकर उस निष्ठा को बड़ी श्रद्धा के साथ सम्बोधित किया जाता है। नवरात्रि का त्योहार इसी शक्ति का प्रतीक है।

इस समय यह पुनीत पर्व 17 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक है। इस दिन सूर्य कन्या राशि में,  चन्द्रमा तुला राशि में स्थित रहेंगे। नवरात्रि के प्रथम दिन घट स्थापना का शुभ मुहूर्त 6 बजकर 23 मिनट से प्रात: 10 बजकर 12 मिनट तक है। इस बार नवरात्रि आठ दिनों की मानी जायेगी। 24 अक्टूबर सुबह 6 बजकर 58 मिनट तक अष्टमी तिथि रहेगी। उसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी। इस वर्ष पुरुषोत्तम मास के कारण इस पर्व को आने में एक महीने का और समय लगा। नवरात्रि के सन्दर्भ में हमारे धार्मिक ग्रन्थो में तरह तरह की अद्भुत मान्यताएँ देखने को मिलती हैं। कहा जाता है कि नवरात्रि की शुरुआत यदि रविवार या सोमवार से हो तो मा हाथी पर सवार होकर आती है। गुरुवार और शुक्रवार से शुरू होने पर माता डोली पर सवार होकर आती है। बुधवार के दिन से शुरू होने पर नाव पर सवार होकर आती है। इस बार नवरात्रि के दिन शनिवार है तो मा घोडे पर सवार होकर अपने भक्तो के घरों में शुभागमन करेगी। घोड़ा युद्ध का प्रतीक माना जाता है। घोड़े पर मा का आगमन शुभ नहीं माना जाता है। इसके साथ ही 25 अक्टूबर को रविवार है। माता हाथी पर सवारी करके अपने कैलाश पर्वत की ओर प्रस्थान करेगी। माता की विदाई हाथी पर होने से खूब वर्षा और अन्न धन की वृद्धि होगी। चारों ओर हरा ही हरा देखने को मिलेगा।

शैलपुत्री : मा के 9 रुपो में प्रथम रुप शैलपुत्री का माना जाता है। हिमालय की पुत्री होने के कारण यह शैलपुत्री कहलाती है। नवरात्रि के प्रथम दिन इसकी पूजा व आराधना की जाती है। इनके पूजन से मूलाधार चक्र जागृत होता है। इस रूप को सती के नाम से भी जाना जाता है। इस रूप में लाल रंग को महत्व दिया जाता है। यह रंग साहस शक्ति का प्रतीक है। इस रुप का जप मन्त्र-ऊँ शैलपुत्रयै नम: है।

ब्रह्मचारिणी :यह मा दुर्गा का दूसरा रूप है। मा ने भगवान शंकर को पति के रुप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस दिन का विशेष रंग नीला होता है। जप मन्त्र है-ऊँ ब्ररह्मचारिण्यै नम:

चन्द्रघन्टा : मा दुर्गा की तीसरी शक्ति चन्द्रघन्टा है। देवी का यह स्वरूप शान्तिदायक और कल्याणकारी माना जाता है। इस देवी के माथे पर घन्टे के आकार का आधा चन्द्र है। इसलिए इस देवी को चन्द्रघन्टा कहा जाता है। इस देवी का जप मन्त्र है -ऊँऐग् चन्द्रघन्टायेनम्:इस स्वरूप का पूजन करने से दिव्य सुगन्धियो का अनुभव होने लगता है।

कुष्मान्डा : ब्रह्मान्ड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कुष्मान्डा देवी के नाम से जाना जाता है। इसकी पूजा करने से अन्न धन की वृद्धि होती है। चारों ओर हरा भरा दिखाई देने लगता है। जप मन्त्र ऊँकुष्मांडडे नम:।

स्कन्द माता : दुर्गा मा का पन्चम रुप स्कन्द माता है। स्कन्द की माता होने के कारण इन्हें स्कन्द माता के नाम से जाना जाता है। पन्चम दिन इनकी पूजा अर्चना की जाती है। इसका जप मन्त्र है -ऊँ क्लीग् स्कन्द माताये नम:

कात्यायने नम : मा दुर्गा का षष्ठम रुप श्री कात्यायनी है। महर्षि कात्यायन की तपस्या से खुश होकर आदिशक्ति ने उनके यहाँ पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इस कारण कात्यायनी कहलाती है। जप मन्त्र है -ऊँ ऐँ  कात्यायने नम:

कालरात्रि : दुर्गा का सातवाँ रुप श्री कालरात्रि है। यह काल का भी नाश करने वाली है। इस दिन साधक को अपना चित्त मध्य ललाट में स्थिर कर साधना करनी चाहिए। इस रुप का जप मन्त्र है -ऊँऐँ क्लीँँ कालरात्रये नम:

महागौरी : आठवे दिन इस स्वरूप की पूजा की जाती है। इस रुप का वर्ण पूर्ण रूप से गौर वर्ण है। इसलिए यह महागौरी कहलाती है। इस दिन साधक को अपना चित्त सोमचक्र में स्थिर करके साधना करनी चाहिए। इनकी उपासना से असम्भव कार्य भी सम्भव हो जाते हैं। इस रूप का जप मन्त्र है–ऊँ ऐँ क्लीँँ महा गौरैया नम:

सर्व सिद्विदायक : माँ दुर्गा का नवम रुप सिद्धि दात्री है। यह सब प्रकार की सिद्धियो की दाता है। नवरात्रि के नवम दिन इस स्वरूप की पूजा की जाती है। इस दिन साधक को अपना चित्त मध्य ललाट में स्थिर कर साधना करनी चाहिए। इस रूप का बीज मन्त्र है –ऊँ ऐँ क्लीँँ सिद्धिदाम्ये नम:

नवरात्रि के प्रत्येक दिन दुर्गा सप्तशती के ग्रन्थकी पूजा यथा यथोचित श्रद्धा के अनुसार पाठ करना चाहिए, नहीं तो अपनी राशि के अनुसार जाप करने से भी मनोकामना पूर्ण हो जाती है।

  • मेष राशि : ऊँ ऐँ सरस्वत्यै नम: 108 बार
  • वृषभ राशि : उँ क्राँ क्री क्रू कालिका देव्ये नम: 108 बार
  • मिथुन राशि : उँ दुँ दुर्गाये नम:-108बार
  • कर्क राशि : ऊँ ललिता देव्ये नम:108बार
  • सिंह राशि : उँ ऐँ महासरस्वत्ये नम:108बार
  • कन्या राशि : ऊँ शूल धारिण्ये नम:108बार
  • तुला राशि : ऊँ ह्री महालक्षम्यै नम:108बार
  • वृश्चिक राशि : उँ शक्ति रुपाये नम:108बार
  • धनु राशि : उँ ऐँ हीँर्ग क्लीँँ चामुन्डाये नम:108बार
  • मकर राशि : उँ पाँ पार्वती देव्ये नम:108बार
  • कुम्भ राशि : ऊँ पाँ पार्वती देव्ये नम:108बार
  • मीन राशि : उँह्रीमीँ श्री दुर्गा देव्ये नम:108बार

सभी मन्त्रो का जाप मोती की माला से ही करे। इसके साथ ही नवरात्रि के उपवास में सावधानियां बहुत जरूरी हैं। जो इस प्रकार से है.

  1. नवरात्रि के अवसर पर माँ के पूजन के लिएपुष्प, माला, रोली, चन्दन, नैवेद्य, फल “दुर्वा” तुलसी दल का प्रयोग करना चाहिए।
  2. देवी के जिस स्वरूप का ध्यान कर रहे हैं उस स्वरुप के साथ आत्मसात करने का भी प्रयास करे।
  3. अपने पूजा स्थान में मां दुर्गा की तीन प्रतिमाएँ बिल्कुल भी न रखे।
  4. पूजा करते समय अपना मुँह उत्तर दिशा की ओर करना चाहिए।
  5. काली माँ की पूजा करने में काले रंग के आसन का प्रयोग करना चाहिए।
  6. पूजा या ध्यान करते समय अपने शरीर के किसी भी अलग को न हिलाये।
  7. मन्त्र जप के लिए चन्दन की माला का प्रयोग करें।
  8. मन्त्र जाप में निरन्तरता बनी रहनी चाहिए।
  9. जमीन में ही शयन करेँ।
  10. मन में किसी तरह की कामवासना न लाये।
  11. किसी तरह की अनुभूति होती है तो उसे व्यक्त न करेँ।

इस प्रकार सच्ची श्रद्धा से नवरात्रि मे माँ दुर्गा के पूजन करने से जीवन में उत्साह का सन्चार पैदा होता है। रुके हुए सारे कार्य पूर्ण होने लगते हैं। सुखद अनुभूति का अहसास होने लगता है।

लेखक : राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक अखिलेश चन्द्र चमोला।

17 अक्टूबर से शुरू हो रहे हैं शारदीय नवरात्र, 24 को एक साथ अष्टमी एवं नवमी, 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा दशहरा

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इस बार अधिक मास होने के कारण ठीक एक माह पश्चात शारदीय नवरात्र 17 अक्टूबर से प्रारंभ हो रहे हैं। अष्टमी और नवमी एक ही दिन 24 अक्टूबर को और विजयादशमी 25 अक्टूबर को होगी।

राजकीय इंटरमीडिएट कालेज आईडीपीएल के संस्कृत प्रवक्ता आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने बताया कि यद्यपि श्राद्ध पक्ष के खत्म होते ही शारदीय नवरात्र प्रारंभ हो जाता था, परंतु इस बार अधिक मास होने से ठीक 1 महीने पश्चात कल 17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र प्रारंभ हो रहा है। काफी वर्ष बाद यह स्थिति आ रही है जब अष्टमी और नवमी एक ही दिन मनाए जाएंगे।

डॉक्टर घिल्डियाल के अनुसार कलश स्थापना के लिए सुबह 6:23 से 9:37 तक का समय सर्वोत्तम है। इसके बाद 11:27 से 12 : 40 तक का समय भी उत्तम है। जौ को अगली रात्रि में भिगोकर रख दें और सुबह कलश स्थापन करने के बाद बोना चाहिए। पहले दिन के पूजन में घी, शहद, गोमूत्र आदि से बने हुए पंचामृत से मां दुर्गा की मूर्ति का स्नान कराएं। बटुक भैरव का पूजन करें, गुलगुले का प्रसाद चढ़ाएं तो सभी फलों की प्राप्ति होती है।

ज्योतिष वैज्ञानिक की उपाधि से सम्मानित आचार्य घिल्डियाल विश्लेषण करते हुए बताते हैं कि नवरात्र के 9 दिनों में नव ग्रहों की शांति के लिए सर्वोत्तम होते हैं।

  • पहले दिन यानी 17 तारीख को सूर्य ग्रह की शांति शैलपुत्री के पूजन से हो, जिन लोगों को सिर दर्द माइग्रेन की समस्या रहती है वह ठीक हो जाती है।
  • 18 तारीख को ब्रह्मचारिणी का पूजन और मन के स्वामी चंद्रमा ग्रह की शांति दूध और फूल से माता ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से मानसिक रोगों से छुटकारा मिल जाता है।
  • 19 तारीख को तृतीय नवरात्र चंद्रघंटा की पूजा और भूमि पुत्र मंगल ग्रह की शांति के लिए सर्वोत्तम इस दिन बटुक भैरव का विशेष पूजन करें गुड़हल के लाल फूलों से पूजा करने से अभीष्ट की सिद्धि होगी।
  • 20 तारीख चतुर्थ नवरात्र मां कुष्मांडा और बुध ग्रह की शांति नसों संबंधी बीमारियां त्वचा संबंधी बीमारियां दूर होती हैं, उस दिन बैंगनी रंग के फूलों से पूजन करें तो सर्वोत्तम फल की प्राप्ति होती है।
  • 21 तारीख को पांचवा नवरात्र स्कंदमाता का पूजन और बृहस्पति ग्रह की शांति के लिए केले के फल देवी को अर्पित करें बेल के पत्ते और फलों से पूजन करने से भाग्योदय होता है।
  • 22 तारीख को मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली कात्यायनी देवी का पूजन होगा जिन लड़कियों के विवाह में विलंब हो रहा है वह इस दिन गुड़हल के फूलों से देवी की आराधना करें अवश्य मनोकामना पूर्ण होगी और जिन लड़कों की शादी में अड़चन है अथवा वैवाहिक जीवन परेशानी युक्त चल रहा है वह शुक्र ग्रह की शांति करें।
  • 23 तारीख को सातवां नवरात्र अर्ध रात्रि को कालरात्रि का विशेष पूजन करने से आंतों संबंधी रोग पेट संबंधी हृदय संबंधी रोगों का उपचार होता है और शनि ग्रह की शांति होती है।
  • आचार्य चंडी प्रसाद घिल्डियाल बताते हैं श्रीमद् देवी भागवत पुराण के अनुसार जिस दिन नवमी युक्त अष्टमी हो उसी दिन महा अष्टमी का व्रत होता है इसलिए 24 अक्टूबर को ही कन्या पूजन और महा अष्टमी का व्रत रहेगा तथा उत्तरार्ध व्यापिनी नवमी होने से इसी दिन महानवमी का व्रत भी रहेगा।
  • 25 अक्टूबर को अपराहन व्यापिनी दशमी तिथि होने से इसे दिन विजयादशमी दशहरा का पर्व मनाया जाना शास्त्र सम्मत है उन्होंने बताया शनिवार से नवरात्र प्रारंभ होने की वजह से मां दुर्गा इस बार घोड़े के वाहन में आ रही हैं और भैंस वाहन से वापसी करेंगी इसलिए तंत्र मंत्र यंत्र साधना के लिए यह नवरात्र बहुत महत्वपूर्ण है सभी लोग श्रद्धा पूर्वक मां दुर्गा का पूजन करेंगे तो कोरोनावायरस जैसी बीमारियों से छुटकारा शीघ्र मिलेगा।

माता मंगला जी के जन्म दिवस पर मातृ सेवा सप्ताह की शुरुआत, रुद्रप्रयाग जिला अस्पताल को एंबुलेंस सहित कई स्वास्थ्य उपकरण भेंट

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हंस फाउंडेशन की संस्थापक माता मंगला जी के जन्म दिवस के अवसर पर देश में सुख-शांति एवं कोरोना संक्रमण के जल्द से जल्द छुटकारा पाने के लिए उत्तराखंड के चारों धामों में विशेष पूजा अर्चना की गई। इसी के साथ रूद्रप्रायग स्थित भगवान विष्णु को समर्पित त्रिजुगीनरायण मंदिर और प्रसिद्ध कालीमठ मंदिर के साथ-साथ प्रदेश के अन्य मंदिरों में भी विशेष पूजा अर्चना की गई।

उत्तराखंड के चारों धामों में तीर्थ पुरोहितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ माता मंगला जी एवं श्री भोले जी महाराज और उनके संपूर्ण परिवार के लिए सुख-वैभव, शांति, यश-कीर्ति के साथ विश्व शांति, देश के चहुमुखी विकास और देवभूमि उत्तराखण्ड की सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की गई।mata-mangla-ji-birthday

इस मौके पर केदारनाथ में मुख्य पुजारी एवं चार धाम विकास परिषद के उपाध्यक्ष शिव प्रसाद ममगाई, रूद्रप्रयाग जिलाधिकारी वदना सिंह, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एवं समाजसेवी संजय शर्मा दरमोड़ा सहित चारों धामों में तीर्थ पुरोहित मौजूद थे। जिन्होंने माता मंगला जी को जन्मदिवस की बहुत-बहुत बधाई दी।

रुद्रप्रयाग जिला अस्पताल को स्वास्थ्य उपकरणों के साथ भेंट की गई एंबुलेंस, केदारघाटी में  जरूरतमंद ग्रामीणों को प्रदान की खाद्य सामग्री, मास्क एवं कंबल

माता मंगाल जी के जन्मदिन के अवसर पर हंस फाउंडेशन ने रूद्रप्रयाग के जिला अस्पताल को एम्बुलेंस (टाटा विंगर), सक्शन मशीन, नेबुलाइज़र मशीन, लाइफ सपोर्ट डिवाइस डिफाइब्रिलेटर मशीन, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, एक्स रे मशीन एवं ईसीजी मशीन प्रदान की। जिसका उद्धघाटन रूद्रप्रयाग की जिला अधिकारी वंदना सिंह, जिला अस्पताल के सीएमओ डॉ. बिंदेश कुमार शुक्ला, सीएमएस डा. डीसी सेमवाल एंव सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता संजय शर्मा दरमोड़ा ने किया।

इस मौके पर जिलाधिकारी सुश्री वंदना सिंह ने माता मंगला जी को जन्मदिन की बधाई देते हुए कहा कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि माता मंगला जी निरंतर हमारे जिले के साथ-साथ देश भर में सेवा का कार्य कर रही है। कोरोनाकाल में हंस फाउंडेशन ने रूद्रप्रायग की जनता के लिए जो सेवाएं दी हैं। उसके लिए हम माता मंगला जी का कोटि-कोटि आभार व्यक्त करते है।

आपको बता दें कि माता मंगला जी के जन्मदिवस को सेवा भी सम्मान भी की परिकल्पना के साथ मनाते हुए हंस फाउंडेशन ने चार धाम यात्रा और इस यात्रा के पड़ावों से जुड़े गांव, पुजारियों, व्यापारियों, ढोल वादकों और उन छोटे-छोटे व्यापारियों के मायूस चेहरों पर मुस्कान विखेरी है। जो कोरोना संक्रमण के चलते मायूस हो चुके थे। इसी के साथ सेवा के पथ पर चलते हुए, हमेशा से जरूरमंद एवं वंचित लोगों की सेवा के लिए प्रतिबद्ध माताश्री मंगला जी एवं श्री भोले जी महाराज के आशीर्वाद से ऑपरेशन नमस्ते अभियान के तहत विश्व के सबसे ऊंचाई पर स्थापित शिव भगवान के मंदिर तुंगनाथ एवं केदारघाटी के हजारों गांवों, पुजारियों, ढोल वादकों और हर उस व्यक्ति तक खाद्य सामग्री पहुंचायी गई है। जो इस संकट के समय में जरुरतमंद है।

केदारघाटी के तमाम दूसरे मंदिरों में पूजा-पाठ कर, अपना व्यवसाय कर अपना जीवन-यापन कर रहे देवस्थलों के सेवाकों तक भी हंस फाउंडेशन का संजीवनी रूपी प्रसाद पहुंचा हैं, जिसमें रूद्रप्रयाग जिले के त्रिजुगीनरायण मंदिर, प्रसिद्ध कालीमठ मंदिर, नारी मंदिर, कार्तिकस्वामी, सन, दरम्वाड़ी, स्यूंड, सौंड़भट्ट गांव, दुर्गाधार मंदिर, कांडई, सिलगांव, क्यूड़ी, फलासी मंदिर, जाखणी, विश्वनाथ मंदिर, उखीमठ मंदिर, धारी देवी मंदिर, देवर, भीरी, तुंगनाथ मंदिर, मक्कूमठ, जाख मंदिर सहित राज्य के कई ऐसे मंदिर और गांव शामिल हैं। जिन तक हंस फाउंडेशन के माध्यम से सोशल डिस्टेसिंग का अनुपालन करते हुए खाद्य सामग्री, शॉल, ट्रेक सूट एवं कंबल वितरित किए गए। माता मंगला जी ने अपने जन्मदिवस पर शुभकामनाओं के लिए सभी का आभार प्रकट किया।

उत्तराखंड से इन चार राज्यों के लिए कल से चलेंगी बसें, देखें कौन-कौन से डिपो से होगा बसों का संचालन

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Bus service in Unlock 5.0 : उत्तराखंड से अब उत्तर प्रदेश और राजस्थान के अलावा चार अन्य राज्यों के लिए भी बस सेवा का संचालन शुरू होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बाद अब हिमाचल, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ परिवहन निगम ने उत्तराखंड के साथ बस संचालन को मंजूरी दे दी है। गुरुवार यानी 15 अक्टूबर से उत्तराखंड और इन 4 राज्यों के बीच यात्रियों की उपलब्धता के आधार पर रोडवेज बसों का संचालन पूर्व की तरह सुचारू हो जाएगा। इसके साथ ही संबंधित राज्यों की बसें भी उत्तराखंड आ सकेंगी।

उल्लेखनीय है कि वैश्विक महामारी कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन के चलते 22 मार्च से रोडवेज बसों का संचालन बंद हो गया था। जिसके बाद केंद्र सरकार के नए आदेशों के तहत सितंबर के अंतिम सप्ताह में राज्य सरकार ने अन्तर्राजीय परिवहन को मंजूरी दे दी थी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पड़ोसी राज्यों के साथ पहले चरण में परस्पर समझौते के तहत हर राज्य के साथ 100-100 बसों के संचालन की मंजूरी दी थी। तीन हफ्ते पहले उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच 100-100 बसों का संचालन शुरू हुआ था। उत्तराखंड की ज्यादातर बसें उत्तर प्रदेश से होते हुए दिल्ली मार्ग पर संचालित हो रही हैं। दिल्ली आइएसबीटी पर प्रवेश की अनुमति ना होने के कारण ये बसें अभी गाजियाबाद के कौशाम्बी बस अड्डे तक जा रही हैं। वहीँ दो हफ्ते पहले उत्तराखंड और राजस्थान के बीच भी बस संचालन शुरू कर दिया गया था। देहरादून, हरिद्वार, कोटद्वार, रामनगर, टनकपुर और हल्द्वानी से रोजाना एक-एक बस जयपुर के लिए संचालित हो रही। इसके अलावा देहरादून से एक बस अलवर के लिए भी चलाई जा रही है। वहीं, राजस्थान की 20 बसें उत्तराखंड के लिए संचालित हो रही हैं।

और अब 15 अक्टूबर से हिमाचल, पंजाब, चंडीगढ़ और हरियाणा की अनुमति मिलने के बाद इन राज्यों से संबंधित बसें भी शुरू दी जाएंगी। यात्रियों की उपलब्धता के आधार पर देहरादून आईएसबीटी, कोटद्वार, हरिद्वार, ऋषिकेश के अलावा कुमाऊं के डिपो से हिमाचल में शिमला, धर्मशाला, मनाली, पौंटा, पंजाब में अमृतसर, लुधियाना, पटियाला, संगरूर, जालंधर, हरियाणा में गुरुग्राम, फरीदाबाद, सिरसा, हिसार, कैथल, अंबाला तथा चंडीगढ़ के लिए बसों का संचालन किया जायेगा।

दर्दनाक हादसा : मसूरी घूमने गए 5 दोस्तों की कार खाई गिरी, दो की मौत, तीन की हालत गंभीर

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Car accident on Dehradun Mussoorie road

देहरादून : उत्तराखंड के मसूरी-देहरादून से एक दर्दनाक हादसे की खबर आ रही है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक आज शाम करीब 4:30 बजे मसूरी से देहरादून की तरफ आ रही एक कार अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरी। इस दर्दनाक हादसे में कार में सवार दो युवकों  की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन युवक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि रुड़की और देहरादून के रहने वाले 5 दोस्त मसूरी घूमने गए थे। आज शाम को मसूरी से देहरादून वापस लौटते वक्त बासा घाट के पास उनकी कार अचानक अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई। हादसे की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और 108 एंबुलेंस फायर सर्विस की टीम ने रेस्क्यू कर युवकों को खाई से बाहर निकाला। परन्तु तब तक दो युवकों की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। जबकि तीन युवकों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मृतकों की पहचान सागर धीमान (20वर्ष) निवासी चंद्रमणी रोड देहरादून और यश (18वर्ष ) पुत्र रवि दत्त निवासी आदर्श नगर रुड़की के रूप में हुई हैं। वहीं अभिषेक पुत्र प्रमोद निवासी रायसी लक्सर,  विकास पुत्र कृष्ण धीमान निवासी रायसी लक्सर और राहुल पुत्र नंद किशोर निवासी आदर्शन नगर रुड़की गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका इलाज जारी है।

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उत्तराखंड में सहायक अध्यापक (LT) के 1431 पदों पर भर्ती का विज्ञापन हुआ जारी, यहाँ करें ऑनलाइन आवेदन

 

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की पहली ‘जल अदालत’ कल से शुरू, पानी के बिलों की समस्या को सुनकर किया जायेगा निस्तारण

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ग्रेटर नोएडा : ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण आवंटियों के पानी के बिल की समस्या के समाधान के लिए जल अदालत आयोजित करने जा रहा है। जिससे कि आवंटियों को पानी के बिलों की समस्याओं का तत्काल निस्तारण किया जा सके। जल अदालत कल 15 अक्टूबर से शुरू होगी। जल अदालत प्रत्येक सप्ताह के बृहस्पतिवार को प्रात: 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक आयोजित की जाएगी। प्राधिकरण के एसीईओ ने बताया कि प्रथम चरण में 15 अक्टूबर को पहली जल अदालत में सेक्टर ईकोटेक-12 एवं सेक्टर ईकोटेक-1 के आवंटियों की पानी के बिलों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। 22 अक्टूबर को सेक्टर ईकोटेक-1 एक्सटेंशन व सेक्टर ईकोटेक-1 एक्सटेंशन-1, 29 अक्टूबर को सेक्टर ईकोटेक-6,7,8, 5 नवम्बर को सेक्टर ईकोटेक-3 व टॉय सिटी तथा 12 नवम्बर को संस्थागत ग्रीन (बीजेडपी) एवं सेक्टर 16 औद्योगिक के आवंटियों की पानी के बिलों की समस्याओं को सुनकर निस्तारण किया जाएगा। अन्य सेक्टरों के आवंटियों की पानी के बिलों की समस्याएं दूसरे तथा तीसरे चरण की जल अदालतों में निस्तारित की जाएंगी। उन्होंने बताया कि जल विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक श्रीपाल भाटी समन्वयक अधिकारी होंगे। जल अदालत के दौरान कोविड 19 के प्रोटोकॉल एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया जाएगा।

उत्तराखंड : राज्य कर्मचारियों को बड़ी राहत, कोविड फंड के लिए अब नहीं कटेगा एक दिन के वेतन, जाने कैबिनेट के अन्य फैसले

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देहरादून : मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में हुई उत्तराखंड कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगाई गई। बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कैबिनेट फैसलों को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में 18 प्रस्तावों पर चर्चा की गई, जिनमें से 17 प्रस्तावों को मंजूरी मिली है। एक प्रस्ताव पर कमेटी बनाई गई है। कैबिनेट ने राज्य के कर्मचारियों को त्यौहारी सीजन का तोहफा देते हुए कोविड फंड  के लिए हर महीने कटने वाला एक दिन का वेतन अक्टूबर महीने से बंद करने का फैसला लिया गया है। हालाँकि मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, आईएएस, पीसीएस, आईएफएस अधिकारियों के वेतन से कटौती जारी रहेगी। इसके अलावा राज्य में आगामी 01 नवम्बर से स्कूल खोलने का निर्णय लिया गया है।

कैबिनेट के फैसले

  • आगामी 01 नवम्बर से स्कूल खोलने का निर्णय लिया गया है। पहले चरण में सिर्फ 10वीं और 12वीं कक्षा के लिए ही स्कूल खुलेंगे।
  • कैबिनेट बैठक में राज्य के कर्मचारियों का कोविड फंड के लिए कटने वाला एक दिन का वेतन अक्टूबर महीने से बंद करने का फैसला लिया गया है। हालाँकि मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, आईएएस, पीसीएस, आईएफएस अधिकारियों के वेतन से कटौती जारी रहेगी।
  • उद्योग विभाग की सेवा नियमावली में संशोधन।
  • उत्तराखंड पुलिस आर मोरल (संशोधन) नियमावली में किया गया संशोधन।
  • उत्तराखंड नागरिक सुरक्षा अधीनस्थ चयन आयोग नियमावली में किया गया संशोधन।
  • हिमालय गढ़वाल विश्वविद्यालय 2016 मेंकिया गया संशोधन। हिमालय गढ़वाल विश्वविद्यालय का नाम बदलकर अटल बिहारी वाजपेयी हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय किया गया।
  • आबकारी विभाग में मदिरा की बिक्री के लिए ट्रेक एंड ट्रेस प्रणाली शुरू होगी।
  • पीरुल नीति के तहत, पीरुल इकट्ठा करने पर 2 रुपए प्रति किलो का दाम तय किया गया।
  • महाकुंभ को देखते हुए सभी अखाड़ा परिषदों को एक-एक करोड़ रुपए दिए जाने का सरकार ने लिया निर्णय।
  • उत्तराखंड अधी प्रमाणीकरण नियमावली बनाई गई।
  • प्रदेश में दो लाख 43 हजार ड्राइवर और ई रिक्शा चालकों को एक-एक हजार रुपए और दिए जाएंगे।
  • खेल नीति 2020 को मंत्रिमंडल ने दी मंजूरी। खेल नीति में वित्त से जुड़े हुए प्रावधान के लिए वित्त विभाग को आकलन करने केदिए निर्देश। खेल पदक विजेता, प्रशिक्षकों, खेल पत्रकार को पुरस्कार का किया गया प्रावधान।
  • छात्रृवत्ति पर मंत्रिमंडलीय उपसमिति की बैठक फिर होगी

उत्तराखंड में इस दिन से खुलेंगे स्कूल, कैबिनेट बैठक में लिया गया फैसला

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देहरादून : उत्तराखंड कैबिनेट ने बुधवार को प्रदेश में स्कूल खोले जाने को लेकर फैसला ले लिया है। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के साथ ही अभिभावकों, शिक्षण संस्थानों, शिक्षकों और जिलाधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर राज्य में आगामी 01 नवम्बर से स्कूल खोलने का निर्णय लिया गया है। पहले चरण में सिर्फ 10वीं और 12वीं कक्षा के लिए ही स्कूल खुलेंगे। स्कूलों के खुलने से पहले इन्हें पूरी तरह से सैनिटाइज किया जाएगा। कक्षाओं के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना होगा। कोविड से बचाव के लिए नियमों का पालन की जिम्मेदारी स्कूलों की होगी. राज्य सरकार अलग से एसओपी जारी करेगी यह व्यवस्था एक महीने के लिए लागू की गई है। बतादें कि वैश्विक महामारी कोरोना के चलते राज्य में बीते मार्च महीने से स्कूलों को भी बंद कर दिया गया था, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। हालांकि इस दौरान बच्चों को ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाया जा रहा था, परन्तु पर्वतीय क्षेत्रों के कई हिस्सों में बच्चे ऑनलाइन शिक्षा से वंचित थे। मंत्रिमंडल में कक्षा 01 से 9वीं और 11वीं की कक्षाएं फिलहाल नहीं चलाने पर सहमति बनी है।

बुधवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में सचिवालय के वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार में कैबिनेट बैठक का आयोजन किया गया। इस दौरान कई अहम फैसलों पर मुहर लगी। बैठक में आबकारी विभाग में ट्रेक एंड ट्रेस प्रणाली लागू करने को भी कैबिनेट की मंजूरी मिली है। कैबिनेट बैठक में राज्य के कर्मचारियों का कोविड फंड  के लिए कटने वाला एक दिन का वेतन अक्टूबर महीने से बंद करने का फैसला लिया गया है। हालाँकि मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, आईएएस, पीसीएस, आईएफएस अधिकारियों के वेतन से कटौती जारी रहेगी

पौडी जिले में पैराग्लाइडिंग को स्वरोजगार से जोड़ने की शानदार पहल, नायरघाटी में पैराग्लाइडिंग बनेगा रोजगार का जरिया

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सतपुली : नायरघाटी में पर्यटन को बढ़ावा देने की जिलाधिकारी पौडी की पहल धीरे धीरे रंग ला रही है। सब कुछ ठीक रहा तो पौड़ी ज़िले की नयारघाटी में साहसिक पर्यटन रोजगार का एक मजबूत आयाम बन जाएगा। पर्यटकों से ओझल इस सुंदर स्थल पर साहसिक खेलों का रोमांच देखते ही बनेगा। साथ ही स्थानीय लोगो के लिए रोजगार के अवसर बढेंगे।

स्थानीय युवक युवतियों को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से बिलखेत से चार अक्टूबर को दो युवती व छ युवक की टीम को ग्यारह दिवसीय पैराग्लाइडिंग  ट्रेनिंग के लिए हिमाचल कांगड़ा भेजा गया। जहाँ पर इनको पैराग्लाइडिंग के सभी गुर सिखाए जा रहे है।

आज बिलखेत की सरिता और ग्राम ओडल की सपना ने पैराग्लाइडिंग ट्रेनिंग के दौरान एक सफल उड़ान भरी उड़ान के बाद दोनों काफी उत्साहित दिखे। ये दोनों बालिका पौडी जिले की पहली व संभवत प्रदेश की पहली महिला पैरागलिडिंग पाइलेट होगी। पैराग्लाइडिंग की सफल ट्रेनिंग के बाद इन सभी के पास अपना रोजगार होगा।

पिछले कई महीनो से साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नायरघाटी क्षेत्र में कयाकिंग, पैराग्लाइडिंग, पैरा मोटर्स आदि के ट्रॉयल चल रहे है।  पौडी जिले के नायरघाटी क्षेत्र में साहसिक पर्यटन का हब बनने से यहाँ के स्थानीय लोगों के रोजगार में बढ़ावा होगा साथ ही उनके आय के साधन बढेंगे जिसमें होटल और ट्रांसपोर्ट के व्यवसायियों को बड़ा लाभ  मिलेगा।

पौडी जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल ने कहा की पैराग्लाइडिंग ट्रेनिंग पर हिमांचल गयी टीम के लौटने के बाद इन्हें हिमालयन ऐरोस्पोर्ट्स एसोसिएसन में एडवांस ट्रेनिंग के लिए भेजा जायेगा। जिला योजना में साहसिक पर्यटन के लिए विशेष बजट रखा गया है जिससे पौडी जिले में 20 पैरागलिडिंग पाइलेट बनाये जायेंगे जिसमें एक पाइलेट पर करीब पचास हजार का खर्चा आएगा। ये दोनों बालिका पौडी जिले की पहली व संभवत प्रदेश की पहली महिला पैरागलिडिंग पाइलेट होगी।

नायरघाटी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नवम्बर माह में नायरघाटी में होगा एडवेंचर फेस्टिवल 

नायरघाटी में एडवेंचर टूरिज्म की संभावनाओं को तलासने के लिए लगातार कयाकिंग, पैराग्लाइडिंग, पैरा मोटर्स आदि के ट्रॉयल कर उनकी संभावनाओं को तलाशा जा रहा है। नायरघाटी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सतपुली में बासा की तर्ज पर गेस्ट हाउस का निर्माण किया जा रहा है जिसमें पर्यटकों को एंगलिंग भी करायी जायेगी।

जिला साहसिक पर्यटन अधिकारी के एस नेगी ने बताया कि पैराग्लाइडिंग के लिए हमारे जिले के युवक युवतियों में विशेष उत्साह दिख रहा है और पैराग्लाइडिंग ट्रेनिंग में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे है। हमारा मुख्य उद्देश्य युवाओं को साहसिक पर्यटन से जोड़ने के साथ उनको रोजगार से जोड़ना है। पैराग्लाइडिंग में युवतियो का प्रतिभाग करना हमारे लिए अच्छा संकेत है जिससे कि महिलाओं को एडवेंचर ट्रेनिंग देने के लिए महिला अच्छे से ट्रेनिंग करवा सकेंगी।

मनीष खुगशाल ‘स्वतन्त्र’