पौड़ी: पौड़ी गढ़वाल के राठ क्षेत्र के प्रसिद्ध बूंखाल कालिंका धाम में शनिवार को दूध-फूल की सात्विक पूजा और प्रीतम भर्त्वाण के जागरों के साथ पारंपरिक बूंखाल कालिंका मेला हर्षोल्लास के साथ संपन्न हो गया। आस्था के इस विशाल आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए बूंखाल कालिंका मंदिर समिति साधुवाद की पात्र है। समिति के प्रयासों ने उन परिवर्तनों को भी सार्थक रूप दिया है, जिसने कभी रक्त की परंपरा से जुड़ी भयावहता को दूध-फूल की शांति और सात्विकता से बदलने का सफल मार्ग बनाया था।

गुजरे जमाने में बूंखाल देवी के थान पर क्या होता था, यह इतिहास की बात है; परंतु आज जिस रूप में भक्तों का जनसैलाब यहां उमड़ रहा है, वह अपने-आप में इस धाम की बढ़ती श्रद्धा और महत्व को दर्शाता है। समय के साथ कई प्रथाएँ बदल चुकी हैं, फिर भी यहां की आस्था की गहराई आज भी उतनी ही अडिग और प्रबल है जितनी पूर्व में थी। पगडंडियों से होकर पैदल आने की परंपरा अब सड़कों और वाहनों की सुविधा में बदल चुकी है, पर भक्तिभाव में कोई कमी नहीं आई है।

बूंखाल कालिंका ट्रस्ट द्वारा निर्माणाधीन भव्य मंदिर भी क्षेत्र की धार्मिक पहचान को एक नई ऊंचाई देने वाला है। उम्मीद की जा रही है कि प्राण-प्रतिष्ठा के समय यह मंदिर दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा। प्राकृतिक भूगोल भी इस धाम की महत्ता को और अधिक प्रभावी बनाता है—फुरकंडा, मेलसैण, पिठुण्डी सहित पूरे राठ क्षेत्र के लिए यह धाम आस्था का केंद्र है।

स्थानीय लोगों का विश्वास है कि किसी भी कठिनाई या संकट की घड़ी में बूंखाल देवी का स्मरण मनोबल को दृढ़ करता है और समाधान का मार्ग दिखाता है। यही कारण है कि वर्षभर दर्शनों का क्रम चलता रहता है, और मेले के दिन यहां उमड़ने वाली भीड़ किसी बड़े शहर के आयोजनों जैसा दृश्य प्रस्तुत करती है। सोशल मीडिया युग में यूट्यूबर और कंटेंट क्रिएटर्स की उपस्थिति भी मेले में बढ़ रही है।

मेला शांतिपूर्ण और सफल तरीके से संपन्न होने पर ग्रामीणों एवं श्रद्धालुओं ने मां बूंखाल कालिंका से समस्त क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।

कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित भी किया। इस अवसर पर संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी, सीओ श्रीनगर अनुज कुमार, बूंखाल चेरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रोफेसर राजेंद्र सिंह नेगी, मंदिर के मुख्य पुजारी रमेश गोदियाल सहित हजारों ग्रामीण उपस्थित रहे।