कोरोना महामारी के इस दौर में सभी सरकारी एवं स्वयंसेवी संस्थाएं जन मानस को मदद पहुंचाने में जुटी हैं। इसीक्रम में देहरादून की श्रद्धा संस्था के स्वयंसेवक भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वर्ष 2016 में गठित इस संस्था के अध्यक्ष कुमाऊं यूनिवर्सिटी के सेवानिवृत्त प्रोफेसर भगवान सिंह बिष्ट हैं। गठन के समय से ही संस्था शिक्षा एवं ग्राम विकास के क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करती आ रही है। श्रद्धा के सचिव डॉ. आशीष बिष्ट ने बताया कि कोरोना महामारी के प्रथम दौर में जहाँ संस्था लोगों को करोना महामारी से कैसे बचा जा सके इसके लिए जागरूक करने में लगी थी, वहीं दूसरी लहर में संस्था जमीनी स्तर पर कार्य कर लोगों को जरूरी सुविधाएं मुहैया करा रही है। यही नहीं संस्था वैक्सीनेशन से पहले लोगों को ब्लड डोनेशन के लिए भी प्रेरित करती है। ताकि थैलीसिमिया और अन्य घातक बिमारियों के लिए ब्लड की कमी न हो।
कोरोना की दूसरी लहर उत्तराखंड के मैदानी से लेकर पहाड़ी क्षेत्रों तक काफी भयंकर रूप से फ़ैल चुकी है। हर दिन बड़ी संख्या में लोग कोरोना से संक्रमित हो रहे थे या इस लड़ाई में हार रहे थे। अस्पतालों में बेड की और मरीज के इलाज के लिए प्लाज्मा की कमी को देखते हुए संस्था ने लोगों को इन सुविधाओं से जोड़ने का कार्य बखूबी किया।
अप्रैल माह के मध्य से अभी तक संस्था ने भीमताल, हल्द्वानी, रुद्रपुर, काशीपुर, मुरादाबाद एवं अन्य स्थानों पर अपने स्वयंसेवकों की मदद से लोगों को जरूरी सुविधाएं जैसे कि अस्पतालों में बेड, दवाइयां एवं सबसे ज्यादा उस समय महत्वपूर्ण प्लाज्मा पहुंचाने में बहुत ज्यादा सहयोग दिया है।
संस्था के साथ धीरे-धीरे स्वयंसेवकों का एक बहुत बड़ा समूह जुड़ गया है कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुछ भूतपूर्व छात्र एवं हल्द्वानी, काशीपुर, मुरादाबाद के बहुत सारे स्वयंसेवी संस्था के साथ मिलकर लोगों की जरूरतों की पूर्ति में लगे हैं। पिछले 3 हफ्तों में संस्था ने लगभग 2 दर्जन से अधिक लोगों को प्लाज्मा मुहैया कराया है। वही करीब करीब 100 परिवारों से अधिक लोगों को बाकी की जरूरतों का सामान पहुंचाने में मदद की है। संस्था से ही जुड़े सदस्य रोहित चतुर्वेदी, मुकेश लाल शाह, आशीष जो खुद कोरोना से जंग लड़ चुके थे, आगे आए अपना प्लाज्मा दान दिया। साथ ही अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रोत्साहित किया। यही नहीं संस्था ने यह महसूस किया किस क्षेत्र में सामान्य खून की भी कमी देखी जा रही है, तो संस्था द्वारा काशीपुर एवं हल्द्वानी में लोगों को वैक्सीनेशन से पहले ब्लड डोनेशन के लिए जागरुक एवं प्रोत्साहित किया गया। अब संस्था का उद्देश्य तीसरी लहर से पूर्व गांव-गांव तक जरूरी सामान को जिसमें ऑक्सीमीटर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, मास्क, सैनिटाइजर आदि पहुंचाने का है। ताकि अगर इस तरह की लहर वापस आती है तो लोगों को इन सारी चीजों की मदद से उसको लड़ने में मदद मिल सके।
संस्था के सचिव आशीष ने बताया कि इस लड़ाई में सबसे कठिन कार्य लोगों को प्लाज्मा देने के लिए अस्पतालों तक लाने का था। इसके लिए स्वयं सेवकों की एक टोली बनाई गई, जिसमें विपुल शाह, आशीष नौला, कुणाल पांडे, लतिका, रुचिका, पूर्णिमा, पवन, जसप्रीत, वरुण सेहरावत, निखिल, अक्षय, आकाश, मयंक, अमित, उपासना, सुप्रिया, हैप्पी, अमन ने ना सिर्फ लोगों से संपर्क साधा अपितु उनके तैयार होने पर उनको घर से ब्लड बैंक तक लाने एवं छोड़ने की व्यवस्था भी की। टीम का संचालन अभिनव सचदेवा, रोहित चतुर्वेदी एवं भीमताल के मेहरागांव वार्ड के वार्ड मेंबर नीरज ज द्वारा किया गया।
संस्था को इस कार्य के लिए अपने स्वयंसेवकों को ही नहीं बल्कि अन्य संस्थाओं जैसे वंदे मातरम समूह, हल्द्वानी कोविड एड, हल्द्वानी ऑनलाइन, रोटी बैंक एवं लाइफ स्ट्रीम काशीपुर से भी अत्यंत सहयोग प्राप्त हुआ। बहुत सारे लोग व्यक्तिगत रूप से भी संस्था की मदद में जुड़े रहे। जिसमें आयशा, आशीष, ग्राफिक एरा के उदित पांडे एवं भावेश तरुण, नितिन कालरा, राजू फर्त्याल आदि शामिल है। साथ ही मेडिकल एडवाइस के लिए दिल्ली के डाक्टर प्रखर व शिमला के डाक्टर असद भी हर समय टीम के संपर्क में रहे।



