श्रीनगर गढ़वाल: आखर ट्रस्ट द्वारा डॉ. गोविन्द चातक जी की जयंती के अवसर पर सौरभ होटल, श्रीकोट में ‘डॉ. गोविन्द चातक स्मृति व्याख्यान’ एवं ‘डॉ. गोविन्द चातक स्मृति आखर साहित्य सम्मान’ समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर गढ़वाली भाषा और नाट्य लेखन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सुप्रसिद्ध गढ़वाली नाटककार एवं रंगकर्मी कुलानन्द घनशाला को डॉ. गोविन्द चातक स्मृति आखर साहित्य सम्मान–2024 से सम्मानित किया गया।

सम्मान स्वरूप कुलानन्द घनशाला को ₹11,000 की नकद धनराशि, अंगवस्त्र, सम्मान पत्र एवं विशेष आखर स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। यह सम्मान राशि डॉ. गोविन्द चातक जी के परिवार की ओर से दी गई। उल्लेखनीय है कि आखर ट्रस्ट विगत नौ वर्षों से निरंतर डॉ. गोविन्द चातक जी की स्मृति में यह आयोजन करता आ रहा है।

कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन, डॉ. गोविन्द चातक जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर संगीत शिक्षिका श्रीमती हिमानी फोंदणी ने मांगल गीत प्रस्तुत किया। ट्रस्ट के संस्थापक एवं अध्यक्ष संदीप रावत ने अतिथियों का स्वागत किया।

मुख्य अतिथि नगर निगम श्रीनगर की मेयर श्रीमती आरती भण्डारी ने आखर ट्रस्ट की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि डॉ. चातक जी जैसी विभूतियों को स्मरण करना और उनके योगदान को समाज तक पहुँचाना अत्यंत सराहनीय कार्य है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता हेमवती नन्दन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय की कला, संचार एवं भाषा संकायाध्यक्ष एवं सुप्रसिद्ध लेखिका प्रो. मंजुला राणा ने की। उन्होंने कहा कि डॉ. गोविन्द चातक जी ने गढ़वाल के लोक साहित्य, भाषा और मध्य हिमालयी संस्कृति के संरक्षण में अतुलनीय योगदान दिया, जिसे भुलाया नहीं जा सकता।

अति विशिष्ट अतिथि धाद पत्रिका के संपादक एवं लोक कला निष्पादन केन्द्र के निदेशक गणेश खुगशाल ‘गणी’ ने कहा कि डॉ. चातक जी ने दूरस्थ गांवों में जाकर लोकगीतों, लोकगाथाओं, जागर, पवाड़ा और चैती गीतों का संकलन कर अमूल्य धरोहर को संरक्षित किया।

विशिष्ट अतिथि प्रो. सम्पूर्ण सिंह रावत ने डॉ. चातक जी के व्यक्तित्व को विराट बताते हुए कहा कि उनका योगदान आज भी शोधकर्ताओं और लेखकों के लिए आधार स्तम्भ है।

अतिथि वक्ता डॉ. कपिल पंवार ने हिंदी नाट्य समालोचना में डॉ. चातक जी के योगदान को रेखांकित किया।

आखर ट्रस्ट के डॉ. नितेश बौंठियाल ने डॉ. गोविन्द चातक जी के बहुआयामी व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला, जबकि अध्यक्ष संदीप रावत ने सम्मानित विभूति कुलानन्द घनशाला के नाट्य लेखन और रंगकर्म में योगदान को उल्लेखनीय बताया।

सम्मान ग्रहण करते हुए कुलानन्द घनशाला ने आखर ट्रस्ट का आभार व्यक्त किया और कहा कि डॉ. गोविन्द चातक जी के साहित्य से उन्हें सदैव प्रेरणा मिलती रही है।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. नीलम नेगी ने किया। अंत में अध्यक्ष संदीप रावत ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, शोधार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में डॉ. गोविन्द चातक जी के परिवार की ओर से उनके पौत्र सौरभ बिष्ट, पौड़ी से अरुण बिष्ट, भूपेन्द्र नेगी, डॉ. नीलम नेगी, घण्टाकर्ण देवता के रावल दिनेश जोशी, डॉ. अरुण कुकसाल, रीजनल रिपोर्टर की सम्पादक गंगा असनोड़ा, डॉ.गोविन्द चातक के गांव और लोस्तु क्षेत्र से – रघुबीर सिंह कंडारी, भरत सिंह कंडारी एवं दर्शन सिंह भंडारी, समाज सेवी एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य लखपत भण्डारी, पार्षद दिनेश पटवाल, प्रसिद्ध समाज सेवी अनिल स्वामी, डॉ. प्रदीप अणथवाल, डॉ. नागेंद्र रावत, तरुण नौटियाल, आनन्द सिंह कप्रवाण, सौरभ पड़ियार, राधा मैंदोली, अंजना घिल्डियाल, अनीता काला, सतीश काला, आखर की मुख्य ट्रस्टी लक्ष्मी रावत, ज्योति मेवाड़, रेखा चमोली, हेमा खंडूडी, प्रभावती नेगी, साक्षी रावत, शिक्षक -शिक्षिकाओं, शोधार्थी, साहित्यिक एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े व्यक्तियों की उपस्थिति के साथ कार्यक्रम में मीडिया जगत, श्रीकोट -श्रीनगर की सम्भ्रांत जनता उपस्थित थी।