बुढ़ पेल्ली गितार छ अब नाती जी हुयूँ गढ़वाल के मुहावरे और खानपान के आयोजन बसंत फ़ूड फेस्टिवल के साथ धाद का अंतराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस आयोजन स्मृतिवन मे सम्पन्न हुआ।

इस अवसर पर गढ़वाली औखाण की लेखिका सुमित्रा जुगलान ने कहा भाषा उसके मुहावरो के साथ जीवित रहती है जो कई पीढ़ीयो तक मौखिक परम्परा के रूप मे जीवित रहते है। हमारी  मातृभाषा मे ऐसे सैकड़ो   आणा है जो उसे जीवंत बनाये हुए है। उन्होंने उनको संकलित करते हुए दस्तावेज के रूप मे तैयार किया है ताकी वो आने वाली पीढ़ीयो के लिए जीवित रहे।

मंच संचालन कर रही संस्कृतिकर्मी शांति बिंजोला ने बताया कि धाद मातृभाषा एकांश ने इस वर्ष भाषा बच्यायो के साथ अपनी मातृभाषाओ के संवाद के कार्यक्रम का संचालन करने का तय किया है जिसमे नयी के साथ वर्तमान पीढी को भी उनकी मातृभाषा सीखने को मिलेगी। उन्होंने बताया कि धाद ने इसके वृहद स्वरुप के लिए शासन से भी पैरवी की है।

बसंत फ़ूड फेस्टिवल के बाबत बोलते हुए हिमांशु आहूजा ने बताया कि पहाड़ की विषद भोजन परम्परा के निमित्त कल्यो की पहल का मकसद पहाड़ के उत्पादन और भोजन को लोगों के आहार मे स्थापित करना है। जिसमे पारम्परिक भोजन शैली को नया कळेवर दिया जाता है। आज का आयोजन मे पहाड़ के पारम्परिक अदरकी फाणु, झंगौरा, लहसुनिया ढबाडी रोटी, बडी़-दो- प्याजा, पीला रैला, बसंती मीठा भात, लच्छा सलाद को शामिल किया गया है।

इस अवसर पर  बलबीर कैंतुरा, प्रदीप डिमरी, अखिल पाँथरी, कर्नल नरेंद्र बिष्ट, बीना रावत, सुशील पुरोहित ने भी पहाड़ी मुहावरे सुनाते हुए अपनी बात रखी।

इस अवसर पर आशुतोष शर्मा, डॉ धर्मेंद्र भट्ट, पूर्णिमा गैरोला, अनूप जखमोला, सुनील, आशुतोष शर्मा, डॉ धर्मेंद्र भट्ट, पूर्णिमा गैरोला, अनूप जखमोला, सुनील अगरवाल, कौतुक सक्सेना, चंद्र  बहादुर रसाइली, उषा नौटियाल, मीता नौटियाल, मंजू बिष्ट, घनश्याम कांडपाल, दयानंद डोभाल, मदन सिंह रावत, जगजीत सिंह रावत, कौतुक सक्सेना, अरुण ढांड, चंद्र बहादुर रसाइली, उषा नौटियाल, मीता नौटियाल, मंजू बिष्ट, घनश्याम कांडपाल, दयानंद डोभाल, मदन सिंह रावत, बीना रावत, जगजीत सिंह रावत, अनिल जखमोला, मेज महाबीर रावत, नीना रावत, सुरेश कुकरेती, दयानन्द डोभाल, आरती सक्सेना, सुजाता भारती, अरुण कुमार, नरेंद्र बिष्ट, तन्मय उपस्थित थे।