dhari devi temple shifting

Dhari Devi Temple: देवभूमि की रक्षक मानी जाने वाली सिद्धपीठ मां धारी देवी की मूर्ति करीब नौ साल बाद आगामी 28 जनवरी को अपने मूल स्थान पर विराजमान होगी। मंदिर समिति ने मूर्ति स्थापना से पहले मंगलवार से शतचंडी यज्ञ का शुभारंभ किया।

चार दिनों तक चलने वाले इस यज्ञ को 21 पंडितों के द्वारा विधि-विधान से किया जा रहा है। साल 2013 में जब धारी देवी की मूर्ति को शिफ्ट किया गया था। तब 16 जून की विनाशकारी आपदा आ गई थी। यज्ञ के माध्यम से मूर्ति स्थापना कार्य को निर्विघ्न संपन्न कराए जाने की प्रार्थना मां पुजारी न्यास द्वारा धारी देवी से की जा रही है।

मंगलवार को प्रातः 9 बजे से पूजा के बाद अपरान्ह एक बजे से शतचंडी यज्ञ विधिवधान के साथ शुरू हुआ। आदि शक्ति मां धारी पुजारी न्यास की पहल पर अब 28 जनवरी को शुभ मुहुर्त में मां धारी देवी की मूर्ति सहित अन्य प्रतिमाओं को नए मंदिर में शिफ्ट किया जाना है। पुजारी न्यास के सचिव जगदंबा प्रसाद पांडेय और मंदिर के पुजारी लक्ष्मी प्रसाद पाण्डेय ने बताया कि मूर्ति शिफ्ट करने से पहले विधिविधान से मंदिर में शतचंडी यज्ञ शुरू कर दिया गया है। उन्होने बताया कि 28 जनवरी को प्रातः 9:30 बजे मां धारी देवी की मूर्ति के साथ अन्य देव मूर्तियों को उनके मूल स्थान पर स्थापित किया जायेगा। जिसके बाद मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा।

श्रीनगर जल विद्युत परियोजना निर्माण के बाद यह मंदिर डूब क्षेत्र में आने से जीवीके कंपनी की ओर से पिलर खड़े कर मंदिर का निर्माण किया गया। इसके बाद वर्ष 16 जून 2013 की केदारनाथ आपदा के कारण अलकनंदा का जल स्तर बढ़ने पर मंदिर में स्थापित प्रतिमांओं को अपलिफ्ट कर दिया गया। जिसके बाद अब पूजारी न्यास ने नौ साल बाद मां धारी देवी की मूर्ति को अपने मूल स्थान पर स्थापित किए जाने का निर्णय लिया है।

सिद्धपीठ मां धारी देवी का मंदिर श्रीनगर पौड़ी गढ़वाल से करीब 13 किलोमीटर की दूरी पर अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है। यहां भक्त हर रोज दूर-दूर से मन्नत मांगने आते हैं। जहां हर दिन माता को अलग अलग रूपों में भक्त देखते हैं। कहा जाता है कि इस मंदिर में मौजूद माता धारी की मूर्ति दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है। मूर्ति सुबह कन्या रूप में दिखती है, दिन में युवती और शाम को एक बूढ़ी महिला की तरह नजर आती है। माता को लेकर मान्यता है कि वह चारधाम की रक्षा करती हैं और मां को पहाड़ों की रक्षक देवी भी माना जाता है।