WORLD EARTH HOUR DAY 2026: हर साल मार्च के आखिरी शनिवार को दुनिया भर में वर्ल्ड अर्थ आवर डे मनाया जाता है। आज शनिवार 28 मार्च को अर्थ आवर डे है। आज पूरे विश्व में एक घंटे तक गैर जरूरी लाइट्स बंद रहेंगी। भारत में इसका समय रात 8:30 से 9:30 बजे तक है। उत्तराखंड में भी आज रात इस समय पर एक घंटे के लिए बिजली बंद रहेगी। धामी सरकार ने सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों से इस एक घंटे के दौरान गैर जरूरी लाइट्स बंद रखने की अपील की है।

क्या होता है अर्थ आवर?

अर्थ आवर एक ग्लोबल मूवमेंट है, जिसकी शुरुआत 2007 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर से हुई थी। इसका मकसद लोगों को यह एहसास दिलाना है कि ऊर्जा की बचत और पर्यावरण की सुरक्षा हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। इस दौरान सिर्फ लाइट बंद करना ही नहीं, बल्कि यह एक प्रतीक है। जलवायु परिवर्तन, बढ़ते कार्बन उत्सर्जन और प्रकृति के संरक्षण के लिए सामूहिक कदम उठाने का।

दुनिया में कहां-कहां मनाया जा रहा है?

आज अर्थ आवर एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है। दुनिया के 190 से ज्यादा देशों में लोग इसमें हिस्सा लेते हैं और बड़े-बड़े शहरों के लैंडमार्क भी एक घंटे के लिए अंधेरे में डूब जाते हैं। 2026 खास इसलिए भी है क्योंकि यह इस अभियान के 20 साल पूरे होने का साल है। इस बार इसे ‘द बिगेस्ट आवर फॉर अर्थ’ के रूप में मनाया जा रहा है, जिसमें करोड़ों लोग एक साथ जुड़ रहे हैं।

भारत में क्या असर दिख रहा है?

भारत में भी अर्थ आवर को लेकर उत्साह साफ नजर आ रहा है। पिछले साल दिल्ली में इस एक घंटे के दौरान 269 मेगावाट बिजली की बचत हुई थी, जो इस पहल के प्रभाव को दिखाता है। इस साल भी देश के कई हिस्सों में लोगों को इसमें शामिल होने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल केटी परनाइक ने लोगों से अपील की है कि वे इस अभियान में हिस्सा लें और पर्यावरण संरक्षण के लिए अपना योगदान दें।

दिल्ली में क्या-क्या हो रहा है?

राजधानी दिल्ली में बिजली कंपनियां इस अभियान को बड़े स्तर पर आगे बढ़ा रही हैं। बीएसईएस (बीआरपीएल और बीवाईपीएल) ने अपने 54 लाख उपभोक्ताओं और 2.25 करोड़ लोगों से लाइट बंद करने की अपील की है। कंपनी अपने 400 से ज्यादा ऑफिसों में भी गैर-जरूरी लाइटें बंद करेगी। सोशल मीडिया, एसएमएस और ईमेल के जरिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। वहीं टाटा पावर डीडीएल ने भी आरडब्ल्यूए, स्कूलों और स्लम इलाकों तक पहुंच बनाकर लोगों को इस अभियान से जोड़ने की कोशिश की है।

उत्तराखंड में भी एक घंटे रहेगा ब्लैक आउट:

उत्तराखंड में भी ‘अर्थ आवर’ के 20 साल पूरे होने पर आज 28 मार्च की रात 8:30 बजे से 9:30 बजे तक गैर-जरूरी लाइटें और विद्युत उपकरण बंद रखे जाएंगे। शासन ने प्रदेश के सभी नागरिकों, संस्थानों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और सरकारी कार्यालयों से इस अभियान में अपनी भागीदारी निभाने की अपील की है। गौरतलब है कि उत्तराखंड ऊर्जा प्रदेश है। यहां कई बड़े हाइड्रोपावर परियोजनाएं स्थापित हैं। टिहरी डैम पर टीएचडीसी की बड़ी परियोजना है।

क्यों जरूरी है ये एक घंटा?

अर्थ आवर सिर्फ 60 मिनट का अंधेरा नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा संदेश है कि अगर लोग एक साथ छोटे-छोटे कदम उठाएं, तो बड़ा बदलाव संभव है। घर, बाजार, ऑफिस और सार्वजनिक स्थानों पर एक साथ लाइट बंद करना यह दिखाता है कि पर्यावरण बचाने की जिम्मेदारी हम सबकी है।

यही वजह है कि यह अभियान हर साल और मजबूत होता जा रहा हैM और इस बार 20 साल पूरे होने पर इसका असर और भी बड़ा देखने को मिल रहा है।

क्या है अर्थ आवर डे का उद्देश्य:

अर्थ आवर डे लोगों को पर्यावरण बदलाव, ग्लोबल वार्मिंग और प्रकृति संरक्षण जैसे गंभीर मुद्दों के बारे में जागरूक करता है। एक घंटे के लिए गैर जरूरी लाइट्स ऑफ करने से अच्छी खासा मात्रा में विद्युत ऊर्जा की बचत हो है। इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होती है। सबसे बड़ी बात ये है कि ये अभियान विश्व भर की जनता को एक संयुक्त प्रयोजन के लिए एकजुट करता है। पृथ्वी हमारा घर है, इसे बचाना है: अर्थ आवर डे प्रत्येक मनुष्य को यह याद दिलाता है कि हमारे यही छोटे छोटे निर्णय पर्यावरण संरक्षण में बड़ा चेंज ला सकते हैं। इसका प्रतीकात्मक संदेश ये भी है कि पृथ्वी हमारा घर है। इसकी रक्षा करना हमारी संयुक्त जिम्मेदारी है।