पौड़ी गढ़वाल : पौड़ी जनपद के कल्जीखाल विकासखण्ड के अंतर्गत ग्राम बेडलगांव (बिदुलगाँव) के ग्रामीणों ने अपने गाँव तक जाने के लिए स्वयं ही सड़क बना डाली। कोरोना महामारी के चलते हुए लॉकडाउन के कारण बाहरी राज्यों से नौकरी छोड़कर गाँव लौटे प्रवासी ग्रामीणों ने लॉकडाउन के दैरान अपने संसाधनों एवं निजी प्रयासों से चंदा इकठ्ठा कर एवं श्रमदान कर सकिन्खेत बैण्ड से अपने गाँव (बिदुलगाँव) तक करीब डेढ़ किलोमीटर सड़क बना दी। ग्रामीणों ने इस सड़क का नाम जनशक्ति मार्ग रखा है।
कोरोना महामारी के चलते बेरोजगार होकर गाँव लौटे प्रवासी ग्रामीणों का कहना है कि अपने क्षेत्र में रोजगार/स्वरोजगार की उम्मीद लगाकार हम लोग लगातार ब्लॉक मुख्यालयों एवं उद्योग विभाग के अलावा बैंकों के चक्कर काटकर थक गए। लेकिन स्वरोजगार में कोई सफलता नही मिली।
इसबीच गांव आए प्रवासी युवाओं ने ग्रुप के माध्यम से गांव की सड़क बनाने की योजना बनाई। सभी ग्रामवासियों एवं प्रवासियों ने एकजुटता दिखाते हुए सड़क के लिए चंदा एकत्रित करने संदेश दिया। जिसमें गांव के गरीब से गरीब वर्ग के परिवार ने भी 5000 की धनराशि दी। वहीँ प्रवासियों ने दस हजार से ऊपर की धनराशि दी। इसके अलावा सेवानिवृत्त ग्रामवासियों ने अपनी एक माह की पेंशन देकर इस श्रमदान हेतु दी। इस तरह ग्रामीणों ने कुल पांच लाख रुपये एकत्रित कर कोरोना के दौरान श्रमदान कर अपने गाँव तक करीब डेढ़ किलोमीटर सड़क बना दी।
दिल्ली से पहुंचे प्रवासी अजीत सिंह नेगी तथा प्रीतम सिंह नेगी ने बताया कि हम विगत 25 वर्षों से जब भी दिल्ली से गाँव आते थे तो सोचते थे कि हमारे गाँव में कब सड़क आएगी। हमारे गाँव के पूर्व प्रधानों एवं अन्य लोगों ने जनप्रतिनिधियों से लेकर शासन/प्रशासन तक कई बार सड़क निर्माण को लेकर अपनी बात पहुँचाने के लिए काफी प्रयास भी किये, कही भी सुनवाई नहीं हुई। सभी जगह से निराशा हाथ लगने के बाद हमने सोचा कि अपने गाँव की सड़क हम ही को बनानी चाहिए। जिसके बाद हमने दिल्ली में रह रहे अपने गाँव के लोगों की एक संस्था बनाई और व्हाट्सएग्रुप के माध्यम से सभी ग्रामीणों को जोड़ा। इस बार जब कोरोना काल में काफी प्रवासी गाँव में पहुंचे तो हम सबने स्वयं के प्रयासों से ही गाँव तक सड़क निर्माण करने का फैसला लिया। जिसके बाद सभी लोगों से सड़क निर्माण के लिए सहयोग राशि एकत्रित की गई। उसके बाद स्वयं श्रमदान कर इस सड़क का निर्माण किया गया। हालाँकि इस कार्य में हमें कई दिक्कतें आई। मसलन रोड़ का सर्वे करना जिससे कि कम से कम खेत व पेड़ कटें, साथ ही सड़क का अलाइनमेंट भी न बिगड़े। जिन लोगों के खेत सड़क निर्माण में आ रहे थे, उनका विरोध भी झेलना पड़ा। परन्तु सभी लोगों के प्रयासों से उन लोगों को समझा बुझाकर सड़क निर्माण कार्य को पूरा किया गया। लोगों का कहना है कि ग्रामीणों द्वारा बनाई गई यह सड़क पीडबल्यूडी की सड़क से भी अच्छी बनी है।
जगमोहन डांगी



