श्रीनगर गढ़वाल: श्रीनगर में टीचर्स कॉलोनी, निकट चौरास पुल, बद्रीनाथ मार्ग स्थित निजी आवास पर पारंपरिक बैठकी होली का आयोजन उल्लास और सांस्कृतिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। फाग गायन की मधुर स्वर लहरियों से पूरा वातावरण फागुनी रंग में रंग गया और उपस्थित हुल्यारों ने समवेत स्वरों में होली का स्वागत किया।
कार्यक्रम में पूर्व राज्य मंत्री दर्जाधारी एवं नगर पालिका श्रीनगर के पूर्व अध्यक्ष कृष्णानंद मैठाणी ने पारंपरिक होली गीतों का सस्वर गायन कर समां बांध दिया। वरिष्ठ रंगकर्मी विमल बहुगुणा ने एक के बाद एक होली प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के सहायक निदेशक तथा संगीत अकादमी के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित डॉ. संजय पांडेय और श्रीमती लता तिवारी पांडेय ने श्रेष्ठ होली गीतों का गायन कर कार्यक्रम को ऊंचाई प्रदान की। अनुभवी संगीतकार एवं गीतकार वीरेन्द्र रतूड़ी (बिट्टू भाई) ने हारमोनियम पर साज छेड़ते हुए सुमधुर प्रस्तुति दी।
वरिष्ठ संस्कृतिकर्मी मदन लाल डंगवाल ने स्वांग मिश्रित होली नृत्य प्रस्तुत कर हास्य-परिहास से माहौल को सराबोर किया। प्रसिद्ध कवि जय कृष्ण पैन्यूली ने भी अपनी प्रस्तुतियों से महफिल को रंगीन बना दिया। शिक्षक अजय प्रकाश चौधरी ने ढपली की थाप पर होली गीतों का गायन किया, जबकि डॉ. महेशा नंद नौड़ियाल ने अपनी मधुर वाणी से वातावरण को सुरमय बनाया।
कार्यक्रम में डॉ. आर.पी. थपलियाल, कटकेश्वर महादेव के महंत महेश गिरि, आर.पी. कपरुवाण, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य हीरामणि काला, श्रीमती मीनाक्षी चमोली, हेम चन्द्र ममगाईं, श्रीमती माधुरी नैथानी, श्रीमती अनीता नौड़ियाल, श्रीमती कौशल्या नैथानी, श्रीमती पूनम थपलियाल, देवेन्द्र उनियाल, प्रो. आर.एन. गैरोला, शिव सिंह नेगी तथा नगर निगम पार्षद प्रवेश चमोली सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने सहभागिता कर समवेत स्वरों में होली गीतों का गायन किया।
लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के तबला वादक जैनेन्द्र गुंसाई ने प्रभावशाली ढोलक वादन से होली गायन में चार चांद लगा दिए। कार्यक्रम के अंतिम चरण में “ऐसी होली खेलें जनाब ए अली…” के सामूहिक गायन के साथ फूलों की वर्षा और नृत्य के बीच हुल्यारों के ‘जुग-जुग जीवें’ की मंगलकामना की गई।
बैठकी होली के दौरान सजग पत्रकार डॉ. श्रीकृष्ण उनियाल ने कार्यक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ वरिष्ठ होल्यारों के साक्षात्कार भी लिए, जिसमें उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर चर्चा की गई।
यह आयोजन न केवल होली पर्व के आगमन की आहट था, बल्कि गढ़वाल की लोक संस्कृति और पारंपरिक बैठकी होली की जीवंत परंपरा का सशक्त उदाहरण भी साबित हुआ।



