पौड़ी: तहसील पौड़ी के मासौं तल्ला गांव में गुरुवार को गुलदार के रेस्क्यू अभियान के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब ट्रैंकुलाइज किए गए गुलदार के दोबारा होश में आने के बाद उसने रेस्क्यू अभियान में जुटे दो वन आरक्षियों पर हमला कर दिया। हमले में दोनों वन कर्मी घायल हो गए। दोनों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब 5 बजे गुलदार अर्जुन सिंह के मुर्गीबाड़े में घुस गया। जाली के रास्ते होते हुए गुलदार एक कमरे में पहुंच गया और अंदर बंद हो गया। इसकी सूचना मिलने पर वन विभाग की रेस्क्यू टीम तत्काल मौके पर पहुंची और गुलदार को सुरक्षित पकड़ने की कार्रवाई शुरू की।
डीएफओ महातिम यादव के अनुसार, गुलदार की उम्र करीब एक वर्ष आंकी गई है। रेस्क्यू टीम ने उसे ट्रैंकुलाइज कर सुरक्षित रूप से पिंजरे में कैद करने का प्रयास किया। इसी दौरान मौके पर बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी एकत्रित हो गए। लोगों की मौजूदगी के कारण गुलदार को बाहर निकालने की प्रक्रिया में समय लगा और रेस्क्यू अभियान में विलंब हुआ।
डीएफओ ने बताया कि ट्रैंकुलाइजेशन के बाद दवा का प्रभाव एक निर्धारित अवधि तक रहता है। रेस्क्यू प्रक्रिया में देरी के कारण गुलदार दोबारा होश में आ गया। इसके बाद उसने रेस्क्यू अभियान में जुटे दो वन आरक्षियों पर हमला कर दिया, जिससे दोनों घायल हो गए। वन विभाग के अनुसार, दोनों वन कर्मियों का तत्काल उपचार कराया गया तथा प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जिला अस्पताल भेजा गया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग की दूसरी रेस्क्यू टीम भी मौके पर पहुंच गई। टीम द्वारा गुलदार को दोबारा सुरक्षित रूप से ट्रैंकुलाइज कर पिंजरे में कैद करने की कार्रवाई की गई। वन विभाग की टीम ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए रेस्क्यू अभियान पूरा किया।
नागदेव रेंज ले जाया गया गुलदार
रेस्क्यू के बाद गुलदार को नागदेव रेंज लाया गया है, जहां उसका मेडिकल परीक्षण किया जा रहा है। डीएफओ गढ़वाल के अनुसार, मेडिकल परीक्षण के बाद उच्चस्तरीय निर्देशों के आधार पर गुलदार के संबंध में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, गुलदार के मुर्गीबाड़े में घुसने से हुए नुकसान के लिए प्रभावित व्यक्ति को वन विभाग की ओर से 10 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति राशि भी प्रदान की गई है।












