श्रीनगर गढ़वाल: ‘कविता कारवां’ श्रीनगर गढ़वाल की अगस्त माह की बैठक 26 अगस्त, बुधवार को अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सभाकक्ष में आयोजित की गई। शाम पांच बजे से आयोजित इस साहित्यिक गोष्ठी में काव्य रसिकों ने अपने पसंदीदा कवियों की चुनिंदा रचनाओं का पाठ कर साहित्यिक वातावरण को जीवंत बना दिया।
बैठक में सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. आर.एन. गैरोला ने सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की चर्चित कविता ‘तुम्हारे साथ रहकर अक्सर मुझे ऐसा एहसास हुआ है कि दिशाएं पास आ गयी हैं’ का पाठ किया। श्रीमती कौशल्या नैथानी ने जुगल मिलन की सामयिक रचना ‘भ्रष्टाचार की लड़ाई’ प्रस्तुत की।
शिव सिंह नेगी ने बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ की कविता ‘भूल-भुलैया’ का प्रभावशाली पाठ किया, जबकि श्रीमती माधुरी नैथानी ने प्रीति सृजनिका सोशल मीडिया से उद्धृत कविता ‘कलश’ का वाचन किया। राजेन्द्र प्रसाद कपरुवाण ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कालजयी रचना ‘रश्मिरथी’ के महत्वपूर्ण अंश प्रस्तुत किए।
इसी क्रम में श्रीमती सीमा मिश्रा ने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की प्रसिद्ध रचना ‘नर हो, न निराश करो मन को’ का सुंदर पाठ किया। नगर निगम श्रीनगर के पार्षद प्रवेश चमोली ने सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता ‘मेरा नया बचपन’ का श्रेष्ठ वाचन किया।
श्रीमती अनीता नौडियाल ने संत कबीर के चयनित दोहों की प्रस्तुति दी, जबकि नीरज नैथानी ने चंद्रकुंवर बर्त्वाल की रचना ‘मेरे उर से उमड़ रही गीतों की धारा’ का पाठ किया।
सितंबर की बैठक श्रीकोट गंगानाली में होगी
कार्यक्रम के समापन से पूर्व श्रीमती अनीता नौडियाल ने प्रस्ताव रखा कि ‘कविता कारवां’ की आगामी सितंबर माह की बैठक उनके आवास श्रीकोट गंगानाली में आयोजित की जाए। उनके इस प्रस्ताव का उपस्थित सभी सदस्यों ने करतल ध्वनि से स्वागत किया।
बैठक में विभिन्न रचनाकारों की कविताओं के माध्यम से साहित्य, समाज और मानवीय संवेदनाओं के विविध पक्षों को अभिव्यक्ति मिली। ‘कविता कारवां’ की यह बैठक साहित्य प्रेमियों के बीच रचनात्मक संवाद और काव्य पाठ की परंपरा को आगे बढ़ाने वाली रही।












