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MBBS नीट काउंसलिंग में फर्जी प्रमाण पत्रों से आरक्षण का लाभ लेने सभी अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की होगी जांच, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दिए सख्त निर्देश

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नैनीताल। उत्तराखंड में नीट काउंसलिंग और एमबीबीएस प्रवेश प्रक्रिया के दौरान कथित रूप से फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर आरक्षण का लाभ लेने के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य के राजस्व सचिव और गृह सचिव को आरक्षण श्रेणी के तहत प्रस्तुत किए गए संदिग्ध प्रमाण पत्रों की व्यापक जांच और सत्यापन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

यह आदेश नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने पारित किया। न्यायालय ने राजस्व सचिव को निर्देश दिया कि सभी संदिग्ध प्रमाण पत्रों की गहन जांच कर दो वर्ष के भीतर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जाए।

फ्रीडम फाइटर कोटे में फर्जी प्रमाण पत्रों का मामला आया सामने

सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य रखा गया कि नीट की प्रथम एवं द्वितीय काउंसलिंग में कुछ अभ्यर्थियों ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी (फ्रीडम फाइटर) श्रेणी का लाभ लेने के लिए कथित रूप से फर्जी प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए। जांच में पाया गया कि कई दस्तावेजों में प्रमाण पत्र संख्या और संबंधित व्यक्तियों के नामों में गंभीर विसंगतियां थीं।

ईडब्ल्यूएस, डोमिसाइल और अन्य दस्तावेजों पर भी सवाल

याचिकाकर्ता की ओर से किए गए सत्यापन में यह भी दावा किया गया कि केवल फ्रीडम फाइटर श्रेणी ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), निवास प्रमाण पत्र (डोमिसाइल), आधार कार्ड समेत अन्य दस्तावेजों में भी कथित अनियमितताएं सामने आई हैं।

करीब 770 छात्रों पर अनियमित लाभ लेने का आरोप

याचिका में आरोप लगाया गया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लगभग 770 ऐसे छात्र/छात्राओं ने आरक्षण का लाभ उठाया, जो उत्तराखंड के मूल निवासी नहीं हैं. जबकि, उनके स्कूल और कॉलेज तमिलनाडु, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे अन्य राज्यों से संबंधित पाए गए।

सरकार ने एसआईटी जांच की दी जानकारी

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि इस प्रकरण की जांच के लिए पहले ही विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया जा चुका है, जो विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है।

हाईकोर्ट ने दिए सत्यापन के स्पष्ट निर्देश

सरकार का पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट ने राजस्व सचिव को सभी संदिग्ध प्रमाण पत्रों का विधिवत सत्यापन कराने के निर्देश दिए। साथ ही, मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रक्रिया समयबद्ध ढंग से पूरी करने पर जोर दिया। इन निर्देशों के साथ न्यायालय ने जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया।