ग्रेटर नोएडा। बंगाली समाज के सबसे बड़े सांस्कृतिक एवं धार्मिक महापर्व दुर्गा पूजा के आयोजन का समय आ गया है। ग्रेटर नोएडा कालीबाड़ी में 11 से 21 अक्टूबर तक आयोजित होने वाला शारदोत्सव-2026 इस वर्ष बंगाली संस्कृति, परंपरा, कला, हस्तशिल्प और सामुदायिक सहभागिता का भव्य उत्सव बनने जा रहा है। ग्रेटर नोएडा शारदिया सांस्कृतिक समिति (रजि.) द्वारा आयोजित इस महोत्सव में मां दुर्गा की आराधना के साथ बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
समिति के अनुसार, बंगाल में दुर्गा पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भावनाओं, कला, संगीत, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक एकता का महापर्व है। शारदोत्सव-2026 में मां दुर्गा के दिव्य श्रृंगार, पारंपरिक हस्तशिल्प, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालुओं को बंगाल की संस्कृति से रूबरू कराया जाएगा। आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में विशाल पारंपरिक सड़क-अल्पना, ढाक की गूंज, बंगाली लोककलाओं का प्रदर्शन तथा बच्चों, युवाओं और महिलाओं की सक्रिय सांस्कृतिक सहभागिता शामिल रहेगी। समिति का कहना है कि यह आयोजन केवल पूजा तक सीमित नहीं होगा, बल्कि समाज के सभी वर्गों को जोड़ने वाला सांस्कृतिक महोत्सव बनेगा।
मां के श्रृंगार से बुनी है बंगालियों की सांस्कृतिक पहचान
मां दुर्गा की पोशाक केवल सुंदर वस्त्र नहीं, बल्कि बंगाल की पारंपरिक सौंदर्य दृष्टि, कारीगरों के हुनर और भक्तों की श्रद्धा का अद्भुत संगम है। बंगाली दुर्गा पूजा की परंपरा कोलकाता की प्रसिद्ध कुम्हारटोली से गहराई से जुड़ी हुई है, जहां पीढ़ियों से मूर्तिकार मिट्टी से मां दुर्गा और उनके परिवार की दिव्य प्रतिमाओं का निर्माण करते आ रहे हैं।
प्रतिमा निर्माण और पोशाक निर्माण अलग-अलग शिल्प हैं, लेकिन दोनों का उद्देश्य मां के दिव्य स्वरूप को पूर्णता प्रदान करना है। प्रतिमा के चेहरे की अभिव्यक्ति, चक्षुदान की परंपरा, मुकुट, आभूषण और अंतिम पोशाक मिलकर उस दिव्य स्वरूप को पूर्ण करते हैं, जिसके दर्शन के लिए श्रद्धालु पूरे वर्ष प्रतीक्षा करते हैं।
मां की पोशाक का निर्माण थीम और डिजाइन के चयन से शुरू होता है। कारीगर प्रतिमा के आकार, मुकुट, आभूषण और पूजा की अवधारणा को ध्यान में रखकर रूपरेखा तैयार करते हैं। पारंपरिक लाल, सफेद और सुनहरे रंगों का विशेष महत्व होता है। इसके बाद कपड़े की कटिंग कर जरी, जरदोजी, गोटा-पट्टी, लेस, मोती, सजावटी स्टोन तथा हस्तनिर्मित मोटिफ से बारीक कढ़ाई और अलंकरण किया जाता है। डिजाइन और हस्तकढ़ाई की जटिलता के आधार पर एक विस्तृत पोशाक तैयार करने में तीन से छह सप्ताह अथवा उससे अधिक समय लग सकता है। बनारसी और रेशमी कपड़ों, साटन, कढ़ाई के धागों तथा अन्य अलंकरणों का चयन भी पूजा की थीम के अनुरूप किया जाता है। हर टांका कारीगर की कला और हर अलंकरण मां के श्रृंगार को पूर्णता प्रदान करता है।
लाल, सफेद और सुनहरे रंगों में झलकती है बंगाल की सांस्कृतिक पहचान
समिति के अनुसार लाल रंग शक्ति, ऊर्जा और उत्सव का प्रतीक है, सफेद पवित्रता एवं शांति का और सुनहरी जरी मां के श्रृंगार को दिव्य आभा प्रदान करती है। पारंपरिक पोशाक और आभूषणों से सजी मां दुर्गा बंगाल की सामूहिक स्मृति और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बन जाती हैं। बंगाली परिवारों के लिए मां दुर्गा केवल देवी नहीं, बल्कि मायके आई बेटी का स्वरूप हैं। भक्तों को मां के श्रृंगार में अपनी मां, बेटी, बचपन की स्मृतियां और घर लौटने की खुशी दिखाई देती है।
विशाल सड़क-अल्पना बनेगी मुख्य आकर्षण
इस वर्ष शारदोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण विशाल पारंपरिक सड़क-अल्पना होगी। कालीबाड़ी के मुख्य प्रवेश मार्ग पर सामुदायिक सहभागिता से बनाई जाने वाली यह अल्पना बंगाल की लोककला और सामूहिक रचनात्मकता का अद्भुत उदाहरण होगी। इसमें महिलाएं, बच्चे, युवा और समुदाय के सदस्य मिलकर लाल और सफेद रंगों से मां दुर्गा, कमल, शंख, धान की बालियां तथा अन्य पारंपरिक आकृतियां उकेरेंगे, जिससे पूरा परिसर सांस्कृतिक रंगों से सराबोर दिखाई देगा।
कार्यक्रम की प्रमुख तिथियां
11 अक्टूबर को आगमनी के साथ मां दुर्गा का स्वागत किया जाएगा तथा पारंपरिक सड़क-अल्पना और विभिन्न प्रतियोगितियों का आयोजन होगा।
15 अक्टूबर को महापंचमी के अवसर पर आनंदमेला एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ होगा।
16 से 20 अक्टूबर तक षष्ठी से नवमी के दौरान मुख्य पूजा, पुष्पांजलि, भोग, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, बच्चों और युवाओं की गतिविधियां तथा विभिन्न प्रतियोगितियां आयोजित की जाएंगी।
21 अक्टूबर को विजयदशमी के अवसर पर सिंदूर खेला, मां दुर्गा का विसर्जन एवं भावपूर्ण विदाई के साथ महोत्सव का समापन होगा।
हर वर्ग की सहभागिता वाला सांस्कृतिक महोत्सव
समिति का कहना है कि यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता का प्रतीक है। मूर्तिकार प्रतिमाएं गढ़ते हैं, कारीगर श्रृंगार तैयार करते हैं, कलाकार अल्पना सजाते हैं और बच्चे, युवा तथा महिलाएं विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। शारदोत्सव के दौरान आनंदमेला, चित्रकला, आवृत्ति (कविता पाठ), फैशन शो, प्रश्नोत्तरी, अंताक्षरी, संगीत, समूहगान, समूह नृत्य, नाटक सहित अनेक सांस्कृतिक प्रतियोगितियों का आयोजन किया जाएगा।
समिति ने बताया कि विजयदशमी के साथ उत्सव समाप्त नहीं होगा। इसके बाद भी बंगाली संस्कृति की परंपरा के अनुरूप कोजागरी लक्ष्मी पूजा, काली पूजा, भाई फोटा, गोवर्धन पूजा, छठ पूजा और जगद्धात्री पूजा जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन क्रमशः आयोजित किए जाएंगे।
ग्रेटर नोएडा शारदिया सांस्कृतिक समिति ने दिल्ली-एनसीआर के सभी श्रद्धालुओं एवं नागरिकों से शारदोत्सव-2026 में शामिल होकर मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने, बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को निकट से देखने तथा इस सांस्कृतिक महोत्सव का हिस्सा बनने की अपील की है।

















