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ग्रेटर नोएडा: गोवंश के संरक्षण व सड़कों पर घूमती गायों के लिए यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र के 20 गांवों को “ डेयरी विलेज”  के रूप में विकसित किया जाएगा। इस तरह का प्रस्ताव पिछली बोर्ड बैठक में पास हो चुका है। अब इसे आगामी फरवरी 19 में होनी वाली बोर्ड बैठक में अमली जामा पहनाया जाएगा। डेयरी विलेज योजना से किसानों को दूध का कारोबार, गोबर गैस के अलावा रोजगार भी मिलेगा। साथ ही डेयरी फार्मिंग को भी बढ़ावा मिलेगा। केंद्र सरकार राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) से डेयरी के लिए लोन भी उपलब्ध करायेगा। इस कारोबार को जेवर एयरपोर्ट से भी जोड़ने की योजना है।

यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में दूध के कारोबार की बहुत संभावना है। इसके अलावा इस क्षेत्र में जो गायें सड़कों पर घूमती रहती हैं, उनके संरक्षण के लिए प्राधिकरण डेयरी विलेज योजना शुरू कर रहा है। प्राधिकरण ने केपीएमजी एजेंसी से पूरा प्रस्ताव तैयार कराया है। इस प्रस्ताव को पिछली बोर्ड बैठक में भी रखा गया था। बोर्ड ने प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए सदस्यों से अपनी राय मांगी थी। इस योजना के तहत गायों को संरक्षण तो मिलेगा ही, साथ ही किसानों को दूध के कारोबार, पनीर, खाद, गौमूत्र आदि से भी आमदनी बढ़ाने का मौका मिलेगा।

प्रथम चरण में 20 गांवों को डेयरी विलेज के रूप मे विकसित किया जाएगा। जो किसान नाबार्ड बैंक से डेयरी के लिए लोन लेना चाहते हैं, उन्हें प्राधिकरण एनओसी जारी करेगा। शर्त यह होगी कि किसान दूध व किसी अन्य सामान की पैकेजिंग नहीं कर पायेंगे। प्राधिकरण के सीईओ डा. अरुणवीर सिंह ने बताया कि डेयरी विलेज योजना को मूर्तरूप देने के लिए अगली बोर्ड बैठक में फिर रखा जाएगा।

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