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9 साल 9 महीने बाद इंद्रमणि नौटियाल की स्वदेश वापसी की उम्मीद जगी, जनसहयोग से 2.5 करोड़ रुपये जुटाने की मुहिम सफल

अंतरराष्ट्रीय समाजसेवी रोशन रतूड़ी ने जनता का जताया आभार, कहा— इंसानियत की इस मिसाल को हमेशा याद रखा जाएगा

देहरादून: उत्तराखंड के इंद्रमणि नौटियाल की लगभग नौ वर्ष नौ महीने बाद स्वदेश वापसी की उम्मीद प्रबल हो गई है। सऊदी अरब में लंबे समय से फंसे इंद्रमणि नौटियाल की घर वापसी के लिए चलाए गए जनसहयोग अभियान के तहत करीब 2 करोड़ 51 लाख 65 हजार रुपये की आवश्यक धनराशि जुटा ली गई है। अभियान के सफल समापन के बाद अब सऊदी अरब में न्यायालय की प्रक्रिया पूरी कर उनकी स्वदेश वापसी का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है।

इस अभियान का नेतृत्व मानव अधिकार एवं अपराध नियंत्रण संगठन के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं अंतरराष्ट्रीय समाजसेवी रोशन रतूड़ी ने किया। उन्होंने इसे “इंसानियत की पवित्र मुहिम” बताते हुए उत्तराखंड सहित देश-विदेश के सभी सहयोगकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

दुर्घटना के बाद वर्षों तक फंसे रहे इंद्रमणि

मूलरूप से उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद निवासी इंद्रमणि नौटियाल रोजगार की तलाश में वर्ष 2018 में सऊदी अरब गए थे। वर्ष 2019 में ट्रक चलाते समय हुई एक सड़क दुर्घटना में सऊदी नागरिकों की मृत्यु हो गई। मामले में उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना पड़ा। बाद में सऊदी न्यायालय ने मृतकों के परिजनों को 9,84,000 सऊदी रियाल (ब्लड मनी/रक्त मूल्य) अदा करने का आदेश दिया।

परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण इतनी बड़ी धनराशि का भुगतान संभव नहीं हो सका, जिसके चलते उन पर यात्रा प्रतिबंध लगा रहा और वे वर्षों तक अपने परिवार से दूर रहने को विवश रहे। वहीँ उत्तराखंड में उनकी पत्नी, बेटी और बेटा वर्षों से उनकी राह देखते रहे। हर दिन दरवाजे की चौखट पर लौटती निगाहें एक ही सवाल करती थीं, “पिता आखिर कब घर लौटेंगे?”

बेटी दीपिका की पहल बनी उम्मीद

इंद्रमणि नौटियाल की बेटी दीपिका नौटियाल ने अपने पिता की स्वदेश वापसी के लिए लगातार प्रयास किए। इसी दौरान अंतरराष्ट्रीय समाजसेवी रोशन रतूड़ी ने इस मामले को मानवीय आधार पर उठाते हुए 29 जुलाई से जनसहयोग अभियान शुरू किया। अभियान का उद्देश्य न्यायालय द्वारा निर्धारित धनराशि जुटाकर इंद्रमणि की स्वदेश वापसी सुनिश्चित करना था।

उत्तराखंड सहित देश-विदेश से मिला अभूतपूर्व सहयोग

करीब दो माह तक चले इस अभियान को उत्तराखंड सहित देश-विदेश से व्यापक समर्थन मिला। आम नागरिकों ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार आर्थिक सहयोग दिया। रिक्शा चालक, टैक्सी एवं टेंपो चालक, बस चालक, शिक्षक, छात्र-छात्राएं, अस्पताल कर्मी, सरकारी कर्मचारी, व्यापारी, सामाजिक संगठन, मंदिर समितियां, कीर्तन मंडलियां और प्रवासी उत्तराखंडियों ने बढ़-चढ़कर योगदान दिया।

अभियान में उत्तराखंड की मातृशक्ति की सक्रिय भागीदारी भी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। पंजाब, मेरठ सहित देश के विभिन्न राज्यों तथा विदेशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों ने भी आर्थिक सहयोग भेजा।

जनसहयोग से बनी मिसाल

अभियान मुख्य रूप से क्राउड फंडिंग और जनसहयोग के माध्यम से संचालित किया गया। अभियान से जुड़े पक्ष के अनुसार, इस दौरान किसी मंत्री, मुख्यमंत्री, विधायक, सांसद अथवा केंद्र सरकार या विदेश मंत्रालय से प्रत्यक्ष आर्थिक सहयोग प्राप्त नहीं हुआ। इसके बावजूद आम लोगों के सहयोग से लक्ष्य के अनुरूप धनराशि जुटाकर उत्तराखंड ने इंसानियत और सामाजिक एकजुटता की अनूठी मिसाल पेश की।

अब स्वदेश वापसी की प्रक्रिया होगी आगे

अभियान के आयोजकों के अनुसार, अब न्यायालय के आदेशानुसार मृतकों के परिजनों को निर्धारित धनराशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इसके बाद इंद्रमणि नौटियाल की भारत वापसी का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।

रोशन रतूड़ी ने जताया आभार

अंतरराष्ट्रीय समाजसेवी एवं मानव अधिकार एवं अपराध नियंत्रण संगठन के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रोशन रतूड़ी ने कहा कि इस अभियान की वास्तविक ताकत कोई एक व्यक्ति नहीं, बल्कि वे हजारों-लाखों संवेदनशील लोग हैं जिन्होंने अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देकर एक परिवार को फिर से मिलाने का प्रयास किया।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब किसी का दर्द अपना दर्द बन जाता है, तब असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्य भी पूरे किए जा सकते हैं।

जनता को किया नमन

रोशन रतूड़ी ने अभियान में सहयोग देने वाले सभी दानदाताओं, मातृशक्ति, युवाओं, वरिष्ठ नागरिकों, कर्मचारियों, मजदूरों, व्यापारियों, सामाजिक संगठनों, प्रवासी भारतीयों तथा देश-विदेश में रहने वाले सभी उत्तराखंडियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसी ने लाखों रुपये दिए तो किसी ने कुछ सौ रुपये, लेकिन हर सहयोग समान रूप से अमूल्य रहा क्योंकि उसके पीछे इंसानियत की भावना थी।

उन्होंने कहा कि इंद्रमणि नौटियाल की स्वदेश वापसी केवल एक व्यक्ति की घर वापसी नहीं होगी, बल्कि यह उन सभी लोगों की जीत होगी जिन्होंने निस्वार्थ भाव से एक परिवार को फिर से मिलाने में अपना योगदान दिया।