Kavita Karwan

श्रीनगर गढ़वाल: “कविता कारवां” ने अपनी सफल दस वर्षीय यात्रा पूर्ण कर ली है। इस अवसर पर अप्रैल माह की मासिक बैठक अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सभाकक्ष में आयोजित की गई, जिसमें सभी सदस्यों ने एक दशक की इस साहित्यिक यात्रा पर एक-दूसरे को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम वरिष्ठ रंगकर्मी विमल बहुगुणा की गरिमामय उपस्थिति में संपन्न हुआ। बैठक में विभिन्न साहित्य प्रेमियों ने अपनी पसंदीदा (गैर-स्वरचित) रचनाओं का पाठ कर वातावरण को काव्यमय बना दिया।

कार्यक्रम में राजेन्द्र कपरुवाण ने महादेवी वर्मा की प्रसिद्ध कविता “मैं नीर भरी दुख की बदली” का पाठ किया, जबकि अजय प्रकाश चौधरी ने डॉ. दीपक द्विवेदी के काव्य संग्रह “मैं प्रेम हूं” से चयनित अंश प्रस्तुत किए। शम्भू प्रसाद भट्ट ‘स्नेहिल’ एवं पार्षद प्रवेश चमोली ने अयोध्या सिंह उपाध्याय की रचना “प्रिय प्रवास” से पंक्तियां सुनाईं।

श्रीमती सुशांत मेनका मिश्रा ने सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की प्रसिद्ध कविता “वह तोड़ती पत्थर” का भावपूर्ण पाठ किया। श्रीमती माधुरी नैथानी ने उदय प्रताप सिंह की कविता “हम किसको दोषी ठहराएं” प्रस्तुत की। वीरेन्द्र रतूड़ी ‘बिट्टू भाई’ ने मधुर स्वर में ग़ज़ल गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इसके अतिरिक्त श्रीमती अनीता नौडियाल ने निरंकार देव सेवक की “चिड़िया का गीत”, गणेश बलूनी ने बाबा नागार्जुन की “बाघ आया उस रात”, श्रीमती कौशल्या नैथानी ने अटल बिहारी वाजपेई की “अपने ही मन से कुछ बोलें” तथा शिव सिंह नेगी ने जसवीर सिंह हलधर की रचना का पाठ किया। स्वयं विमल बहुगुणा ने सूरदास के पद प्रस्तुत किए। नीरज नैथानी ने राम दयाल मेहरा की जनवादी रचना का पाठ कर कार्यक्रम में नई ऊर्जा का संचार किया।

इस अवसर पर श्रीमती मेनका सुशांत मिश्रा ने अपने सुपुत्र के दसवीं बोर्ड परीक्षा में 90 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर मिष्ठान वितरण किया। उपस्थित सभी सदस्यों ने उन्हें बधाई दी तथा छात्र के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

कार्यक्रम का समापन आपसी संवाद एवं साहित्यिक चर्चाओं के साथ हुआ।