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देहरादून: मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शनिवार को मीडिया सेन्टर सचिवालय में ज्ञान कुम्भ के लोगो एवं वेबसाइट का लोकार्पण किया। उच्च शिक्षा में सुधार पर मंथन के लिए उत्तराखण्ड के हरिद्वार में 3 व 4 नवम्बर, 2018 को ज्ञान कुम्भ का आयोजन होगा। इसका उद्घाटन राष्ट्रपति करेंगे। उच्च शिक्षा पर विचार विमर्श के लिए इतने व्यापक स्तर देश में पहली बार ज्ञान कुम्भ का आयोजन हो रहा है। उच्च शिक्षा के उन्नयन के लिए देश में उत्तराखण्ड की यह एक अभिनव पहल है

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा हमारे सामाजिक विकास का अभिन्न हिस्सा रही है। आज उच्च शिक्षा का दायरा तेजी से फैल रहा है। लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता पर उतना ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसलिए आज इस बात की जरूरत महसूस हुई है कि उच्च शिक्षा में नए नए प्रयोग तो हों, लेकिन शिक्षा के मूल गुण प्रभावित न हों, उसकी क्वालिटी भी बरकरार रखी जा सके। उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और इसे इनोवेटिव सोच के साथ शोधपरख बनाने के मकसद से ही, इस बार ज्ञान कुंभ 2018 का आयोजन किया जा रहा है।gyan-kumbha

मुख्यमंत्री ने कहा कि 3-4 नवम्बर 2018 को हरिद्वार में ज्ञान कुम्भ का आयोजन होगा, इसका उद्घाटन महामहिम राष्ट्रपति जी द्वारा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस ज्ञान कुंभ में उच्च शिक्षा की वर्तमान स्थिति और इसके भविष्य को लेकर मंथन होगा। इसमें देश के अलग अलग क्षेत्रों से आए तमाम बुद्धिजीवी और कई विश्वविद्यालयों के कुलपति भाग लेंगे। हरिद्वार में ज्ञान कुंभ के आयोजन का मकसद ये है कि देवभूमि उत्तराखंड, संस्कृति सभ्यता और वैदिक शिक्षा का केन्द्र रहा है। आज के दौर मे जब पश्चिमी देश भारत की वैदिक संस्कृति की ओर मुड़ रहे हैं, तो क्यों न हम अपनी इस महान परंपरा को जीवन में आपनाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा के लिये अच्छे माहौल व अनुकूल वातारण का होना भी जरूरी, इस ज्ञान कुम्भ में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के ज्ञान मन्थन से निकलने व ज्ञानामृत निश्चित रूप से उच्च शिक्षा के उन्नयन एवं गुणवत्ता के विकास में मददगार होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भी शिक्षा में उन्नयन में तीन गुणों उच्च विचार, आचार एवं संस्कार का होना जरूरी बताया है। यदि शिक्षा में अच्छे संस्कार न हो तो वह सृजन की ओर नहीं बल्कि विध्वंस की ओर ले जायेगी। इसलिये शिक्षा के क्षेत्र में अच्छे संस्कार उच्च विचार एवं संस्कारों का होना भी जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा नदी के किनारे कुम्भनगरी में स्थित पतंजलि योगपीठ में आयेजित होने वाले ज्ञान का महाकुंभ ज्ञानी जनों द्वारा किये जाने वाला मंथन निश्चित रूप से उच्च शिक्षा को नई ऊर्जा और नई दिशा देने में सक्षम साबित होगा।

उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने कहा कि ज्ञान कुम्भ का यह आयोजन भारत वर्ष में अपने प्रकार का पहला आयोजन है। इसमें भारत वर्ष के सभी राज्यों के उच्च शिक्षा मंत्री, उच्च शिक्षा सचिव, सभी विश्वविद्यालय के कुलपति, समस्त आई.आई.टी., एन.आई.टी, आई.आई.आई.टी. तथा समस्त शैक्षणिक संस्थानों के निदेशक/अध्यक्ष सम्मिलित होंगे। उत्तराखण्ड में अवस्थित समस्त महाविद्यालयों के प्राचार्य अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले शिक्षाविद् एवं मेधावी छात्र-छात्रायें प्रतिभाग करेंगे। उच्च शिक्षा के उन्नयन के लिये आयोजित हो रहे इस सम्मेलन से उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार को बल मिलेगा। उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ.रावत ने कहा कि राज्य व उच्च शिक्ष उन्नयन के लिये प्रभावी पहल की गई है। हमारी पहल को यूजीसी द्वारा सराहा गया है। रूसा के तहत उत्तराखण्ड को सर्वाधिक धनराशि अनुदान के रूप में स्वीकृत की गई है। आज हमारे 93 प्रतिशत महाविद्यालयों में फैकल्टी पूरी है। शीघ्र ही सभी महाविद्यालयों में फैकल्टी की व्यवस्था के साथ ही प्रधानाचार्यों की तैनाती हो जायेंगी।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव डॉ.रणवीर सिंह, कुलपति श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय डॉ.यू.एस.रावत, पतंजलि योगपीठ के प्रतिनिधि डॉ.राकेश मित्तल, मुख्यमंत्री के तकनीकि सलाहकार नरेन्द्र सिंह, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट, महानिदेशक सूचना दीपेन्द्र कुमार चौधरी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।