MALVIYA NAGAR FIRE INCIDENT: दिल्ली के मालवीय नगर में हुए अग्निकांड प्रकरण में उत्तराखंड मूल के शेफ केशव नेगी की गिरफ्तारी का मामला गरमा गया है। इस संबंध में आज उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से बात की है। दिल्ली की मुख्यमंत्री से बातचीत में सीएम धामी ने मामले की पारदर्शी जांच की बात कही है।

जिस पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आश्वस्त किया है कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और जांच पूरी तरह तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होगी। पूर्ण विश्वास है कि दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियां निष्पक्ष जांच के माध्यम से सत्य को सामने लाएंगी।

क्या है पूरा मामला

बीते 3 जून को दिल्ली के मालवीय नगर के होटल में सुबह करीब आठ बजे भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में बेसमेंट में फंसे 21 लोगों की धुएं और आग की चपेट में आने से मौत हो गई थी। साथ ही दर्जनों लोग घायल हो गए थे। मरने वालों में ज्यादातर विदेशी हैं। बचाव कार्य के दौरान आग और धुएं की चपेट में आने से 10 पुलिसकर्मी भी घायल हो गए थे। पुलिस की शुरूआती जांच में मालवीय नगर के हौजरानी स्थित अवैध फ्लोरिश स्टे होटल में लगी भीषण आग ने सुरक्षा व्यवस्थाओं और बिल्डिंग बायलाज की धज्जियां उड़ाकर रखी है। इस मामले में होटल के मालिक को गिरफ्तार किया जा चुका है।

उसके बाद इस ममाले में दिल्ली पुलिस ने उत्तराखंड मूल से शेफ केशव नेगी को गिरफ्तार किया है। दिल्ली `पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में पता चला है कि आग शेफ केशव नेगी की लापरवाही से लगी हो सकती है। वहीं, मालवीय नगर अग्निकांड में शेफ केशव नेगी की गिरफ्तारी को लेकर उत्तराखंड के लोगों में जबरदस्त आक्रोश है। सोशल मीडिया पर शेफ केशव नेगी के लिए आवाज उठाई जा रही है। राजनीतिक दलों ने भी केशव नेगी के लिए न्याय की मांग की है। उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने शेफ केशव नेगी की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दिल्ली सरकार से जल्द इस मामले पर हस्तक्षेप किए जाने की मांग की। गणेश गोदियाल ने कहा कि मालवीय नगर के होटल में हुए अग्निकांड से पिछा छुड़ाने के लिए जिम्मेदार विभागों ने केशव नेगी को गिरफ्तार किया है।

वहीँ सोशल मीडिया पर उत्तराखंड के लोगों का कहना है कि इस दुखद घटना के बाद जिस तरह की कार्रवाई दिल्ली पुलिस द्वारा की गयी है बहुत कष्टदाई है। दिल्ली पुलिस ने केशव नेगी नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। केशव नेगी इसी होटल में शेफ के तौर पर काम किया करते थे। वे मूल रूप से उत्तराखंड के रहने वाले हैं। उनको गिरफ्तार करते हुए यह आरोप लगाया गया है कि होटल में लगी आग को बुझाने में उन्होंने अपना कोई योगदान नहीं दिया। लोगों का कहना है कि यह स्वाभाविक है कि जब अचानक आग लगती है तो हर कोई आग से अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागता है। यही केशव नेगी ने भी किया होगा। अब सवाल यह उठता है कि क्या फायर ब्रिगेड की जिम्मेदारी केशव नेगी के पास थी? केशव नेगी होटल में शेफ थे। आग बुझाने का काम उनका नहीं था। यह भी जांच का विषय है कि होटल में आग पर काबू पाने के समुचित प्रबंध थे या फिर नहीं थे। क्या होटल प्रबंधन की तरफ से नियमों का पालन किया जा रहा था या फिर नहीं? लोगों का कहना है कि यह शर्मनाक है कि शासन/ प्रशासन ने अपना पीछा छुड़ाने के लिए साधारण नौकरी करने वाले व्यक्ति को बलि का बकरा बना दिया है। लोगों ने दिल्ली सरकार से इस मामले पर हस्तक्षेप करते हुए तत्काल केशव नेगी को रिहा करने की मांग की है।

मालवीय नगर अग्निकांड: लापरवाही से अव्यवस्था तक

दिल्ली के मालवीय नगर के हौजरानी स्थित अवैध फ्लोरिश स्टे होटल में लगी भीषण आग ने सुरक्षा व्यवस्थाओं और बिल्डिंग बायलाज की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। दिल्ली पुलिस और अग्निशमन विभाग की संयुक्त शुरुआती जांच में होटल प्रबंधन की रोंगटे खड़े कर देने वाली खामियां उजागर हुई हैं। जांच अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि यदि होटल में सुरक्षा के न्यूनतम मानकों का भी पालन किया गया होता, तो मरने वालों का आंकड़ा इतना बड़ा नहीं होता। अव्यवस्थाओं का आलम यह था कि आग लगने के बाद न तो अंदर फंसे लोग खुद बाहर निकल पाए और न ही राहत कार्य में जुटे फायर कर्मी, एनडीआरएफ व दिल्ली पुलिस के जवान समय रहते उन्हें सुरक्षित निकाल सके।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, बुधवार सुबह करीब आठ बजे जब होटल में आग लगी, तब सीढ़ियों से छत पर जाने वाले मुख्य दरवाजे पर ताला जड़ा हुआ था। यदि यह दरवाजा खुला होता, तो अधिकांश लोग छत पर भागकर जान बचा सकते थे। चूंकि, इलाके में आसपास की इमारतों की छतें एक-दूसरे से सटी हैं, लोग आसानी से दूसरी बिल्डिंग की छत पर कूदकर सुरक्षित निकल जाते।

नियमों के मुताबिक, होटलों और गेस्ट हाउसों में पर्याप्त वेंटिलेशन होना अनिवार्य है, लेकिन इस अवैध होटल में वेंटिलेशन का नामोनिशान नहीं था। पूरी इमारत और खिड़कियां डबल लेयर (दोहरी परत) के मजबूत शीशों से पूरी तरह पैक थीं। सुरक्षा कारणों से व्यावसायिक भवनों की खिड़कियों में ऐसे शीशे नहीं लगाए जाते। आग लगने के बाद पुलिस और फायर कर्मियों को इन्हें तोड़ने में भारी मशक्कत करनी पड़ी।

पहले ईंट, पत्थरों और लोहे के डंडों से पहली परत को तोड़ा गया, फिर दूसरी परत को भेदने में कीमती समय बर्बाद हो गया, जिससे बचाव अभियान में देरी हुई। आगे के बजाय पीछे की तरफ थीं सीढ़ियां, इमरजेंसी गेट नदारदकमर्शियल गतिविधियों वाली इमारतों में सीढ़ियां हमेशा आगे की तरफ होनी चाहिए ताकि आपात स्थिति में लोग तुरंत बाहर भाग सकें।

इसके विपरीत, इस होटल में सीढ़ियां पीछे की तरफ छिपी हुई थीं, जहां धुआं भरने के बाद भागना नामुमकिन हो गया। इसके अलावा, पूरी बिल्डिंग में कोई भी आपातकालीन निकास द्वार नहीं था। जांच में होटल की एकमात्र लिफ्ट भी बेसमेंट में फंसी हुई पाई गई।

बेसमेंट में शॉर्ट-सर्किट से आग लगने की आशंकाशुरुआती तफ्तीश में पुलिस को आशंका है कि आग सबसे पहले बेसमेंट में शार्ट सर्किट के कारण लगी, जिसने देखते ही देखते ऊपर की मंजिलों को अपनी चपेट में ले लिया। हालांकि, फायर विभाग की टीम अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है और विस्तृत वैज्ञानिक जांच जारी है। कागजों में हेरफेर कर बनाई गई इस पांच मंजिला अवैध इमारत के कोने-कोने का इस्तेमाल व्यावसायिक मुनाफे के लिए किया जा रहा था।

जांच में सामने आया कि बेसमेंट में किचन, डाइनिंग एरिया और चार कमरे, ग्राउंड फ्लोर पर एक किचन और दो कमरे, पहली, दूसरी और तीसरी मंजिल पर पांच-पांच कमरे थे। चौथी और पांचवीं मंजिल में प्रत्येक पर दो-दो कमरे (जिसमें दो सर्वेंट क्वार्टर शामिल हैं)। इस प्रकार पूरी बिल्डिंग में कुल 25 कमरे अवैध रूप से संचालित थे।