पौड़ी गढ़वाल: उत्तराखंड में स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की सरकारी योजनाएं अब ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। इसका जीवंत उदाहरण पौड़ी गढ़वाल के कोट ब्लॉक स्थित देवार गांव के प्रगतिशील किसान नरेश चंद्र भट्ट हैं, जिन्होंने आधुनिक तकनीक आधारित खेती अपनाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि गांव की सात महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध कराया है।
वर्ष 2014 से खेती और पशुपालन को अपनी आजीविका का आधार बनाने वाले नरेश भट्ट आज लगभग 20 नाली भूमि पर व्यावसायिक सब्जी उत्पादन कर रहे हैं। उनके पॉलीहाउस में गोभी, लहसुन, खीरा, लौकी, कद्दू, शिमला मिर्च और टमाटर जैसी उच्च गुणवत्ता वाली सब्जियों का उत्पादन किया जाता है। इनकी बिक्री पौड़ी सहित आसपास के स्थानीय बाजारों में होती है, जिससे उन्हें नियमित और बेहतर आय प्राप्त हो रही है।
नरेश भट्ट के अनुसार, बीते वर्ष केवल गोभी की बिक्री से उन्हें लगभग 60 हजार रुपये की आय हुई। इसके अलावा लहसुन, खीरा, लौकी, कद्दू, शिमला मिर्च और टमाटर का करीब 12-12 क्विंटल उत्पादन कर उन्होंने अच्छा मुनाफा अर्जित किया। वर्तमान में वे खेती से प्रतिवर्ष लगभग 8 लाख रुपये की बचत कर रहे हैं।
उनकी इस सफलता से गांव की सात महिलाओं को नियमित रोजगार भी मिला है। नरेश का कहना है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक अपनाएं और कृषि एवं उद्यान विभाग की योजनाओं का सही तरीके से लाभ लें, तो पहाड़ों में खेती सबसे बड़ा रोजगार का माध्यम बन सकती है।
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय कृषि एवं उद्यान विभाग को दिया। विभाग की ओर से उन्हें पॉलीहाउस, उन्नत बीज, पानी की टंकी, घेरबाड़ और सिंचाई पाइपलाइन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, जिससे उनके स्वरोजगार को नई मजबूती मिली।
जिला उद्यान अधिकारी मनोरंजन सिंह भंडारी ने बताया कि नरेश भट्ट जैसे प्रगतिशील किसान आधुनिक तकनीक आधारित खेती अपनाकर विभागीय योजनाओं का प्रभावी लाभ उठा रहे हैं। पॉलीहाउस में हाइब्रिड सब्जियों का उत्पादन कर वे अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक एवं व्यावसायिक खेती से किसान गांव में रहकर भी सम्मानजनक आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने कहा कि कोट ब्लॉक के प्रगतिशील किसान स्थानीय स्तर पर सब्जी उत्पादन और स्वरोजगार का उत्कृष्ट मॉडल प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने उद्यान विभाग को किसानों की उपज के बेहतर विपणन के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार कर बाजार से सीधे जोड़ने के निर्देश दिए। साथ ही अधिक मांग वाली लाभकारी फसलों की पहचान कर अन्य किसानों को भी आधुनिक खेती से जोड़ने तथा महिलाओं को अधिक से अधिक स्वरोजगार उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से हो रहे पलायन के बीच नरेश भट्ट की यह सफलता इस बात का संदेश देती है कि आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं और दृढ़ इच्छाशक्ति के सहारे गांव में रहकर भी बेहतर आय और रोजगार के अवसर सृजित किए जा सकते हैं।



