पौड़ी, 31 जुलाई: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बागवानी किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए आय का नया स्रोत बनती जा रही है। सरकारी योजनाओं के सहयोग और आधुनिक बागवानी तकनीकों के उपयोग से कई ग्रामीण स्वरोजगार की दिशा में सफलता हासिल कर रहे हैं। पौड़ी गढ़वाल जनपद के विकासखंड थलीसैंण के सुकई (बंज्वाड़) गांव निवासी शिक्षक दीनदयाल बिष्ट इसका एक उदाहरण हैं।

दीनदयाल बिष्ट वर्तमान में विकासखंड बीरोंखाल स्थित राजकीय इंटर कॉलेज बैंजरो में रसायन विज्ञान के प्रवक्ता हैं। कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान उन्होंने अपने गांव की अनुपयोगी भूमि को उपयोग में लाने का निर्णय लिया और वैज्ञानिक पद्धति से सेब एवं कीवी की बागवानी शुरू की। समय के साथ उनका यह प्रयास सफल होता गया और आज बागवानी उनकी नियमित आय के साथ-साथ अतिरिक्त आय का भी प्रमुख स्रोत बन चुकी है।

बिष्ट ने बताया कि बाग के विकास में उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिला। मनरेगा के तहत बाग की घेरबाड़ कराई गई, कृषि विभाग की सहायता से जियोटैंक और हाइड्रो प्रोजेक्ट पाइपलाइन के जरिए सिंचाई व्यवस्था विकसित हुई, जबकि उद्यान विभाग ने पौधों के चयन, रोपण, रखरखाव और वैज्ञानिक प्रबंधन संबंधी तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया। इससे उत्पादन के साथ-साथ फलों की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ।

उनके अनुसार वर्तमान में सेब और कीवी की बागवानी से उन्हें प्रत्येक सीजन में लगभग तीन से चार लाख रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। उनका कहना है कि यदि किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाएं और विभागीय योजनाओं का लाभ लें तो पर्वतीय क्षेत्रों में भी कम भूमि पर अच्छी आय अर्जित की जा सकती है।

जिला उद्यान अधिकारी मनोरंजन भांडाडी ने बताया कि जनपद में सेब, कीवी सहित उच्च मूल्य वाली फल बागवानी को बढ़ावा देने के लिए विभाग किसानों को तकनीकी परामर्श, प्रशिक्षण और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों की जलवायु इन फसलों के लिए उपयुक्त है और वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर किसान बेहतर उत्पादन के साथ अपनी आय बढ़ा सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन रोकने, स्वरोजगार को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से बागवानी को प्रोत्साहित करने वाली विभिन्न योजनाओं का संचालन कर रही है। दीनदयाल बिष्ट की पहल को इन्हीं प्रयासों की एक सफल मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। शिक्षक दीनदयाल बिष्ट की सफलता ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए यह संदेश है कि सरकारी योजनाओं, आधुनिक तकनीक और सतत परिश्रम के माध्यम से गांव में रहकर भी सम्मानजनक आजीविका अर्जित की जा सकती है।