श्रीनगर गढ़वाल। हिमालयन साहित्य एवं कला परिषद्, श्रीनगर गढ़वाल की ओर से प्रकृति के चितेरे कवि स्वर्गीय चंद्र कुंवर बर्त्वाल की जन्मतिथि के अवसर पर साहित्यिक-सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। परिषद् के शिविर कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में साहित्यकारों एवं साहित्यप्रेमियों ने स्व. बर्त्वाल को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके साहित्यिक योगदान को याद किया।
वरिष्ठ रंगकर्मी विमल बहुगुणा की अध्यक्षता में आयोजित साहित्यिक गोष्ठी में संस्था की प्रधान ट्रस्टी प्रो. उमा मैठाणी ने स्व. चंद्र कुंवर बर्त्वाल के साहित्यिक जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि स्व. बर्त्वाल के तत्कालीन मित्र स्व. शम्भू प्रसाद बहुगुणा ने उनके निधन के बाद उनकी रचनाओं का अन्वेषण किया और अधिकांश रचनाओं को संकलित कर काव्य संग्रह के रूप में प्रकाशित कराया। इस प्रयास से बर्त्वाल की महत्वपूर्ण रचनाओं का संरक्षण और पुनर्संयोजन संभव हो सका।
प्रो. मैठाणी ने बताया कि स्व. शम्भू प्रसाद बहुगुणा ने बर्त्वाल की जन्मपत्री को भी सामने लाते हुए उनके जन्मदिन के रूप में 21 अगस्त को मनाए जाने की परंपरा स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष कृष्णानंद मैठाणी ने कहा कि लगभग 12 वर्षों तक स्व. प्रताप सिंह पुष्पबाण और प्रो. उमा मैठाणी के संयुक्त प्रयासों से अगस्त्यमुनि में 20 अगस्त को स्व. चंद्र कुंवर बर्त्वाल की जन्मतिथि की पूर्व संध्या पर कवि सम्मेलन तथा 21 अगस्त को जन्मदिन मनाने की परंपरा रही है।
इस अवसर पर कवि नीरज नैथानी ने स्व. चंद्र कुंवर बर्त्वाल की साहित्यिक यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उन्हें छायावादी युग के प्रमुख कवियों की श्रेणी का महत्वपूर्ण रचनाकार बताया। उन्होंने कहा कि क्षय रोग से पीड़ित होने के कारण बर्त्वाल अल्पायु में ही इस संसार से विदा हो गए, लेकिन अपने छोटे से जीवनकाल में उन्होंने उत्कृष्ट रचनाओं का सृजन कर हिंदी साहित्य में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।
विमल बहुगुणा को उत्तराखंड यंग सिने अवार्ड की घोषणा पर दी बधाई
साहित्यिक गोष्ठी के दौरान नगर के प्रसिद्ध रंगकर्मी विमल बहुगुणा को उत्तराखंड यंग सिने अवार्ड प्रदान किए जाने की घोषणा पर उपस्थित साहित्यकारों एवं सदस्यों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी।
कार्यक्रम में आगामी 30 अगस्त को डा. प्रकाश चमोली की पुस्तक के लोकार्पण कार्यक्रम तथा प्रतिवर्ष वितरित की जाने वाली छात्रवृत्ति के आयोजन को लेकर भी चर्चा की गई।
कार्यक्रम में प्रो. रामानंद गैरोला, डा. विमला चमोली, वीरेंद्र रतूड़ी, डा. प्रकाश चमोली, जय कृष्ण पैन्यूली, डा. प्रदीप अणथ्वाल, श्रीमती मेनका मिश्रा सहित साहित्य एवं कला क्षेत्र से जुड़े कई लोग उपस्थित रहे।













