देहरादून: मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वह वर्तमान राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह की जगह लेंगे। आयुर्वेद-होम्योपैथी चिकित्सा के माहिर डॉ. बिसेन किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वे प्रदेश के 9वें राज्यपाल होंगे।
मूल रूप से मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के पिपरिया गांव निवासी डॉ. ढाल सिंह बिसेन पेशे से आयुर्वेद एवं होम्योपैथी के चिकित्सक रहे हैं। चिकित्सा क्षेत्र से निकलकर उन्होंने राजनीति में लंबा और सफर तय किया है। वे मध्य प्रदेश की राजनीति के एक स्थापित स्तंभ रहे हैं। डॉ. बिसेन ने वर्ष 1990 में पहली बार विधायक बनने के बाद 1993, 1998 और 2003 में भी विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की।
इस दौरान उन्होंने वर्ष 2003 से 2005 तक मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में सेवाएं दीं। इसके अलावा, उन्होंने 2011 से 2013 तक मध्य प्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष का दायित्व भी बखूबी संभाला। उन्होंने 2019 का लोकसभा चुनाव बालाघाट लोकसभा सीट से जीता। हालांकि 2024 में पार्टी ने उनकी जगह नया चेहरा चुनावी मैदान में उतारा था। संगठन के प्रति उनकी अटूट निष्ठा और समर्पण का इनाम अब पार्टी ने उन्हें राज्यपाल बनाकर दिया है।
मुख्यमंत्री धामी ने दी बधाई
डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड के नए राज्यपाल के पद पर नियुक्ति मिलने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ ढाल सिंह बिसेन का दीर्घ राजनीतिक अनुभव, जनसेवा के प्रति समर्पण तथा सार्वजनिक जीवन में उनका उल्लेखनीय योगदान प्रेरणादायी है। मध्य प्रदेश सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री, पूर्व सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता के रूप में उन्होंने जनहित और समाजसेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि डॉ. ढाल सिंह बिसेन के अनुभव एवं मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड विकास, सुशासन और जनकल्याण के नए आयाम स्थापित करेगा।
राजनीतिक सफर
विधायक के रूप में सेवाएं: वह मध्य प्रदेश विधानसभा में कई बार विधायक चुने गए (वर्ष 1990, 1993, 1998 और 2003)।
कैबिनेट मंत्री: मध्य प्रदेश सरकार में वर्ष 2003 से 2005 के बीच उन्होंने कैबिनेट मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण विभागों की कमान संभाली।
वित्त आयोग के अध्यक्ष: वर्ष 2011 से 2013 तक उन्होंने मध्य प्रदेश के चौथे राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली।
लोकसभा सांसद: वर्ष 2019 के आम चुनावों में वह मध्य प्रदेश की बालाघाट लोकसभा सीट से भारी बहुमत से सांसद चुने गए और संसद में क्षेत्र की मजबूत आवाज बने।

















