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जिला पंचायत सदस्य व ग्राम प्रधान जुटे क्वारंटाइन सेंटर में रह रहे प्रवासियों की सेवा में

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सतपुली : विकासखंड पोखड़ा के जिला पंचायत सदस्य हेमलता रावत व ग्राम प्रधान सिलेत राजपाल रावत लॉकडाउन होते ही अपने क्षेत्र में एक्शन मोड में आ गए थे। दोनों जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र में लाउड स्पीकर के द्वारा लोगों को जागरूक करते रहे. इसके अलावा जगह-जगह  बस स्टैंड पर इनके द्वारा कोरोना जागरूकता की पैंटिंग करवायी गयी।

सरकार द्वारा लॉकडाउन के दौरान जारी गाइडलाइन के अनुसार बाहरी राज्यों से गाँव लौट रहे  प्रवासियों को 14 दिनों तक संस्थागत/ होम क्वारंटाइन करवाने के आदेश का पालन करते हुए दोनों पति पत्नी जनप्रतिनिधि होने के नाते स्वयं ही प्राथमिक विद्यालय की साफ सफाई व गांव को सेनिटाइज करने में लगे हैं। migrants-living-in-the-quarantine center

क्वारंटाइन में रह रहे युवा प्रवेश ढोंडियाल का कहना है कि क्वारंटाइन सेंटर में हमारे रहने की उचित व्यवस्था की गयी है तथा ग्राम प्रधान राजपाल रावत व उनकी पत्नी जिला पंचायत सदस्य हेमलता रावत समय-समय पर हमारे लिये चाय, पकौड़े व फलों का वितरण करते है साथ ही शाम को गांव के लोकगायक व युवाओं द्वारा सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए संगीत के साथ हमारा मनोरंजन किया जाता है।

मनीष खुगशाल ‘स्वतन्त्र’

उत्तराखंड में आज फिर मिले 11 कोरोना पॉजिटिव,  727 पहुंचा मरीजों का आंकड़ा

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Coronavirus Update uttarakhand : उत्तराखंड में आज फिर कोरोना वायरस के 11 नए मामले सामने आये हैं. जिसके बाद अब प्रदेश में कोरोना के मरीजों का आंकड़ा बढ़कर 727 पहुँच गया है. इससे पहले शुक्रवार को उत्तराखंड में कोरोना का कहर टूट पड़ा था. शुक्रवार को राज्य में 218 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे. जो एक दिन में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है.

स्वास्थ्य विभाग द्वारा आज (शनिवार) दोपहर में जारी हेल्थ बुलेटिन में राज्य में 11 नए लोगों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है. आज जो 11 कोरोना पॉजिटिव मिले हैं उनमे से 07 लोग देहरादून से तथा 04 टिहरी गढ़वाल से हैं. देहरादून में मिले कोरोना पॉजिटिव निरंजनपुर मंडी से संबंधित हैं, जबकि टिहरी में मिले कोरोना पॉजिटिव महाराष्ट्र से लौटे हुए हैं. अब तक 102 लोग ठीक होकर घर भी लौटे हैं. जबकि 05 लोगों की मौत हो चुकी है.

उत्तराखंड में अब तक कोरोना covid-19 के जिलेवार मामले

जनपद कोरोना के मरीज
नैनीताल222
देहरादून161
टिहरी74
उधमसिंह नगर62
हरिद्वार48
पौड़ी28
अल्मोड़ा39
पिथौरागढ़27
चमोली11
उत्तरकाशी14
बागेश्वर16
चंपावत8
रुद्रप्रयाग5
प्राइवेट लैबस12
कुल727

 

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चंदन के समान पवित्र माना जाने वाला, “पंय्यां का पेड़” उत्तराखंड में धार्मिक आस्थाओं से जुड़ा है, जानिए पंय्यां के अन्य फायदे

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उत्तराखंड सहित दुनिया के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाने वाले खूबसूरत पंय्यां के पेड़ का वैज्ञानिक नाम प्रुनस सेरासोइडिस है। पंय्यां को अंग्रेजी में हिमालयन वाइल्ड चेरी, बर्ड चेरी, हिन्दी में पद्म, पदमख या पदमकाष्ठा, संस्कृत में चारू, हिमा, कैदरा, मालाया, पदमागन्दी तथा नेपाली में पैयु के नाम से जाना जाता है। वैसे तो औसधीय गुणों से भरपूर पंया वृक्ष का इस्तेमाल दवाईयां बनाने में किया जाता हैं, परन्तु भारतीय संस्कृति में देव वृक्ष यानी देवताओं का पेड़ माने जाने वाले पय्यां का उत्तराखंड खासकर पहाड़ में एक विशेष महत्व हैं। उत्तराखंड में धार्मिक आस्था का प्रतीक माने जाने वाले पंय्यां के पेड का सीधा संबंध सांस्कृतिक रीति रिवाजों से भी है। गांव में होने वाली शादियों मे प्रवेश द्वार पर पंय्यां की शाखाऐं लगाई जाती हैं। इसके अलावा शादी का मंडप भी पंय्यां की शाखाओं और पत्तियों के बिना अधूरा माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से पंय्यां का बड़ा महत्व है। पंया की लकड़ी को चंदन के समान पवित्र माना जाता है। हवन में पंय्यां की लकड़ी का इस्तेमाल पवित्र माना जाता है। पंय्यां की पत्तियों वाली डाल को पवित्र मानकर इसका उपयोग धार्मिक कार्यों में किया जाता है। जिस तरह शहर में लोग आम की पत्तियों की माला घर के द्वार पर गृह प्रवेश या हवन इत्यादि के बाद लगाते हैं ठीक उसी तरह उत्तराखंड मे इस पेड़ की पत्तियों का इस्तेमाल होता है।

 

बसंत ऋतु में गाँव में फूलों से लदे पंय्यां के पेड़ की खूबसूरती देखने लायक होती है। गढ़रत्न नरेन्द्र सिंह नेगी ने बसंत ऋतु में उत्तराखंड की खूबसूरती पर जो गीत लिखा है उसमे पंयाँ का भी जिक्र आता है। “लय्या, पंय्यां ग्विराळ फूलों ना होलि धरती सजीं देखि ऐई…बसंत ऋतु मा जैई.”, इसके अलावा पुराने लोकगीत “सेरा की मींडोळी नै डाळी पंय्यां जामि..” में भी पंय्यां का जिक्र आता है। उत्तराखंड में पंय्यां प्राकृतिक रूप से 1200 से 2500 मीटर की ऊँचाई तक गांवों के आस पास कृषि खेतों के किनारों पर पाया जाता है। पंय्यां को रोपड़ करके 500 मीटर की ऊँचाई पर भी आसानी से उगाया जा सकता है। धार्मिक आस्था वाले बृक्ष पंय्यां की लम्बी आयु होती है।

पर्यावरण की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण पय्यां उत्तराखंड के अलावा हिमाचल प्रदेश, कशमीर, आसाम में अका तथा खासी हिल्स, मणिपुर, साउथ वेस्ट चाइना, बर्मा तथा थाइलैंन्ड तथा नेपाल आदि क्षेत्रों में भी पाया जाता है।

उत्तराखंड में यह वृक्ष काफी मात्रा में मिलता है लेकिन लोगों की उपेक्षा के कारण अब इन पेड़ों की संख्या धीरे धीरे कम होती जा रही है जो की एक चिंता का विषय है। पय्यां का वृक्ष गुणों की खान माना गया है। इन्हीं गुणों के कारण लोगों द्वारा पंय्यां के पेड़ का अत्यधिक दोहन तथा रोपड़ ना के बराबर करने की वजह से आज पंय्यां विलुप्ति होने की कगार पर आ गया है।

पंय्यां के फायदे

  • पंय्यां आदि काल से ही महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियों व अन्य उपयोगी वनस्पतियों के भण्डार के रूप में विख्यात है।
  • पंय्यां के फल ऐसट्रिन्जैंन्ट होते हैं। पय्यां के फलों का सेवन पेट की कई समस्याओं को दूर करने में फाइदेमन्द बतलाया गया है।
  • पय्यां पके फलों का सेवन पाचन तंन्त्र को ठीक रखने में मददगार माना गया है।
  • पंय्यां के पेड़ की छाल का रस बैकपेन (कमरदर्द) के लिये लाभकारी माना गया है।
  • पंय्यां के फलों में एमिगडालिन, प्रुनासिन पाया जाता है। इसका सेवन सांस लेने की तकलीफ में राहत प्रदान करने वाला बतलाया गया है।
  • पंय्यां के फूले बृक्ष लीन पीरियड में मधुमख्खी पालन वालों के लिये लाभकारी माने गये हैं। इसके फूलों के परांगण का सेवन मधुमख्खियों द्वारा शुद्व एवं गुणकारी कार्तिक शहद के रूप में हमें उपलब्ध कराया जाता है।
  • पय्यां के पेड़ की छाल से टेनिन तथा पत्तियों से ग्रीन डाई तैयार की जाती है।
  • पय्यां के बीजों से प्राप्त किये गये तेल को फार्मास्यूटिकल परपज में इस्तेमाल किया जाता है।
  • पय्यां के सूखे बीजों का इस्तेमाल बीड्स, नैकलेस बनाने में किया जाता है।
  • स्थानीय लोगों द्वारा पंय्यां की डाल की लकडी़ को राजमा के पौधों की बढ़वार, ककडी़, लौकी इत्यादि की बेल बढ़वार के लिये इस्तेमाल किया जाता है।
  • धार्मिक दृष्टि से पंय्यां की पत्तियों वाली डाल को पवित्र मानकर उपयोग किया जाता है। जिस तरह शहर में लोग आम की पत्तियों की माला घर के द्वार पर गृह प्रवेश या हवन इत्यादि के बाद लगाये जाते है ठीक उसी तरह उत्तराखंड मे इस पेड़ की पत्तियों का इस्तेमाल होता है।
  • पंय्यां के पेड की छाल को दवा के साथ ही रंग बनाने मे भी प्रयोग किया जाता है।
  • पंय्यां की लकडी को भी चन्दन के सम्मान पवित्र माना गया है। हवन मे पंया की लकडी का इस्तेमाल करना पवित्र माना जाता है।
  • पंया के पेड़ की लकडी़ को विशेष रूप से ढोल ढमाऊं बजाने के काम में भी लाया जाता है। पंय्यां के पेड़ की लकडी़ से वाद्ययंत्र (डोल दमाऊँ) बजाने से दासों द्वारा अलग ही राग पैदा किया जाता है।
  • पय्यां की पत्तियों का इस्तेमाल गाय, बकरियों के सुखे विछोने के रूप में भी किया जाता है, जो आगे चलकर उर्वरा शक्तिदायक खाद का काम करती है।
  • पंय्यां के पेड का सांस्कृतिक महत्व भला कौन नहीं मानता होगा।
  • रीति रीवाजों के अनुसार, शादी में प्रवेश द्वार पर पंय्यां की शाखाऐं लगाकर निर्माण किया जाता है। साथ ही शादी का मंडप भी पंय्यां की शाखाओं के बगैर अधूरा माना जाता है।
  • पय्यां की लकडी़ मजबूत होती हैं, जिस कारण इसका इस्तेमाल सिर्फ जलाने तक ही सीमित नहीं होता, बल्कि इससे गेहूं कूटने वाला डंडा, गाय, भैंस बांधने के कीले, कृषि उपकरणों के हत्थे भी बनाये जाते हैं।
  • पंय्यां का पर्णपाती बृक्ष बहुत ही खूबसरत होने के कारण शोंन्द्रीकरण के लिये भी काफी उपयुक्त माना गया है।

डॉ. विजय कान्त पुरोहित
हाई एल्टीट्यूड प्लांट फिजियोलॉजी रिसर्च सेंटर (HAPPRC), श्रीनगर (गढ़वाल), उत्तराखंड

 

उत्तराखंड : कर्मचारियों के भत्ते के बजाय मार्च 2021 तक हर महीने कटेगा एक दिन वेतन, जाने कैबिनेट के अन्य फैसले

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देहरादून : मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अगुवाई में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में कुल 18 प्रस्तावों पर चर्चा की गई। इसमें कई अहम फैसलों पर मुहर लगी। इस दौरान कोरोना की रोकथाम को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में कोरोना से निपटने के लिए जहां टेस्टिंग को तेज करने का निर्णय लिया है, वहीं कर्मचारियों के भत्ते के बजाय उनका एक दिन वेतन मार्च तक हर महीने काटने का निर्णय लिया है। शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने बताया कि कोरोना महामारी (कोविड-19) से लड़ने के लिए सरकार को धन की आवश्यकता है। इसके लिए पहले भत्तों की कटौती करने पर विचार किया जा रहा था, लेकिन मंत्रिमंडल ने जब यह देखा कि भत्तों के रूप में कर्मचारियों को अधिक आर्थिक नुकसान हो रहा है तो निर्णय लिया गया कि मुख्य सचिव से नीचे सभी कर्मचारियों को आगामी मार्च 2021 तक हर महीने एक दिन का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में देना होगा। कैबिनेट ने इस फैसले से पेंशनरों को अलग रखा है। यानि इस अवधि में जो कर्मचारी रिटायर होगा, उसको रिटायरमेंट के बाद कटौती नहीं करानी होगी। सरकार ने निर्णय लिया कि दायित्वधारियों से प्रतिमाह पांच दिन का वेतन सीएम राहत कोष में जमा किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि सरकार ने पहले ही विधायकों को एक साल तक हर महीने वेतन भत्तों का 30 फीसद कोविड से निपटने के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में देने का निर्णय लिया है।

कैबिनेट में आज लिए गए फैसले

• कोविड सैंपलिंग, टैस्टिंग की प्रक्रिया को गति दी जाएगी। प्राइवेट लैब को टैंडर प्रक्रिया से लेने के लिए 4 दिन का अवधि निर्धारित किया गया।
• किसी भी कार्मिक के किसी भी रूप में भत्ते में कटौती नहीं की जाएगी, मुख्य सचिव से लेकर नीचे के सभी कार्मिकों का मार्च 2021 तक प्रत्येक माह में, एक दिन का वेतन में मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा किया जायेगा। पेंशनरों से किसी भी प्रकार की कटौती नहीं की जाएगी। दायित्वधारियों का प्रत्येक माह में 5 दिन का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा किया जाएगा, मार्च 2021 तक।
• अब उत्तराखंड के अंदर कोई भी व्यक्ति राज्य के किसी भी क्षेत्र में आने जाने के लिए स्वतंत्र होगा। कैबिनेट ने इस पर मुहर लगाई है। इस फैसले के बाद ऑनलाइन पास अप्लाई करने पर राज्य के अंदर कहीं भी आम जनता जा सकेगी। जाने वाले शख्स को क्वारन्टीन नहीं होना होगा।
• मुख्यमंत्री एकीकृत बागवानी विकास योजना में राहत प्रदान की गयी है। बागवानी मिशन में सब्जी, बीज, पुष्प पर दिया जाने वाला 50 प्रतिशत का अनुदान शेष सभी कृषकों को दिया जाएगा। बागवानी मिशन से अलग फल, बीज, आलू, अदरक 50 प्रतिशत राज्य सहायता अनुदान के रूप में दिया जायेगा तथा कोल्ड स्टोर और ए.सी. वैन पर भी अनुदान दिया जायेगा। 15 लाख रुपये लागत के कोल्ड स्टोरेज पर 50 प्रतिशत अनुदान तथा 26 लाख रुपये एसी वैन की लागत पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।
• श्रम विभाग के श्रम अधिनियम के अंतर्गत दुकान, प्रतिष्ठान के नियोजकों को संदिग्ध कोविड कर्मचारियों को 28 दिन के क्वॉरंटीन अवधि का वेतन भुगतान करना होगा।
• सभी दुकानों, कारखानों जहां 10 से अधिक कर्मचारी हैं, कोविड को रोकथाम के लिए सैनिटाइजर की व्यवस्था की जाएगी।
• उत्तरकाशी में 1000 मि.टन क्षमता के कोल्ड स्टोर को बनाने के लिए मंडी परिषद को 13 करोड़ 46 लाख में बनाने की अनुमति।
• उत्तराखंड उपखनिज 2016 चुगान नीति में परिवर्तन करते हुए निगम के पट्टे की अवधि एक वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी गई है। यदि अन्य क्षेत्र में टेंडर के बाद कोई फर्म नहीं मिलता है तो इसका संचालन निगम करेगा।
• कोविड स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत उपकरण क्रय का अधिकार 03 माह से बढ़ाकर 28 फरवरी तक कर दिया गया है। अग्रिम धनराशि को 40 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया। निदेशक के 03 करोड़ के अधिकार को अब प्राचार्य भी उपयोग कर सकेंगे।
• श्रम सुधार अधिनियम में यूनियन बनाने के लिए कर्मचारियों के 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत की संख्या कर दी गयी।
• रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्ट्री की डिजिटल नकल दो रुपये प्रति पृष्ठ और न्यूनतम 100 रुपये की गयी।
• आउटसोर्सिंग के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग में भर्ती के लिए तीन माह की निर्धारित अवधि बढ़ाकर 20 फरवरी 2021 किया गया।
• मेगा इंडस्ट्री एवं इंवेस्टमेंट पालिसी में संसोधन करते हुए वैधता अवधि 31 मार्च 2020 से 30 जून 2020 किया गया।
• जिला योजना समिति के चुनाव के संबंध में अध्यादेश लाते हुए जिलाधिकारी प्रभारी मंत्री की स्वीकृति से कार्य करा सकते है।
• पंचायती राज अध्यादेश लाते हुए जहां पर जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लाक प्रमुख ग्राम प्रधान का चुनाव नहीं हो पाया है एवं अन्य पदों का चुनाव हो गया है वहां जिलाधिकारी के माध्यम से शेष पदों पर मनोनीत किया जा सकता है।
• प्रदेश के भीतर वाहनों की आवाजाही होगी, लेकिन संबंधित जिले में जिलाधिकारी कार्यालय में करना होगा ऑनलाइन आवेदन, सिर्फ आवेदन ही पर्याप्त, उसके बाद पास लेने की आवश्यकता नहीं।

 

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मुख्यमंत्री राहत कोष में दी अब तक की सबसे बड़ी सहयोग राशि

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देहरादून : कोविड-19 के दृष्टिगत उत्तराखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड  ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 50 करोड़ रुपये का सहयोग दिया है। यह अब तक का सबसे बड़ा सहयोग है। यह चेक मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को प्रमुख सचिव आनन्द वर्धन ने सौंपा। इसके साथ ही कोविड- 19 के दृष्टिगत मुख्यमंत्री राहत कोष में जितेन्द्र आनन्द, दि आढ़ती एसोसियेशन (रजि़) फ्रूट एंड वेजिटेबल न्यू सब्जी मण्डी निरंजनपुर, देहरादून के माध्यम से विभिन्न महानुभावों द्वारा 5 लाख 26 हजार रुपये की धनराशि सौंपी गई।

क्वारंटाइन रह रहे युवा लगे हैं स्कूल संवारने में

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The quarantine youth are engaged in grooming the school

सतपुली : विकासखंड एकेश्वर के अन्तर्गत ग्राम सभा बौंसाल में प्राथमिक विद्यालय बौंसालधार मे लॉकडाउन के बाद दिल्ली, गुडगांव व अन्य शहरों से आए प्रवासी युवा 14 दिन के क्वारंटाइन रह रहे। युवा दो महीने से बंद पड़े स्कूल की झाड़ियों को काटकर सफाई में लगे हैं ओर स्कूल को संवारने में लगे हैं।

ग्राम प्रधान विकास रावत ने कहा कि ये सभी युवा अपने गांव के लिए बहुत चिन्तित है और आने वाले समय में गांव में ही रोजगार करने के लिए तैयार है। साथ ही कहा कि जो स्कूल है वह गांव से लगभग डेढ किमी दूर है जहाँ बिजली की कोई सुविधा नही है और शासन प्रशासन को कई बार अवगत भी कराया जा चुका लेकिन कोई सुध लेना वाला नही है. जिसके बाद स्वयं ही बिजली के लिये सौर ऊर्जा की व्यवस्था ग्राम करायी। क्वारंटाइन सेंटर में पानी की कमी होने पर जल संस्थान पौड़ी से टैंकर मंगवा पानी की टंकी भरी गयी।

उसके बाद गांव से लगभग 6 किमी दूर पेयजल के स्त्रोत में पैदल चलकर गांव के युवाओं द्वारा टूटी हुई पानी की लाइन बनायी गई। वहीँ ग्राम प्रधान द्वारा क्वारंटाइन सेंटर में खाना व समय समय पर फलों की व्यवस्था की जा रही है।

मनीष खुगशाल ‘स्वतन्त्र

पौड़ी गढ़वाल : भालू के हमले से युवक की मौत

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पौड़ी गढ़वाल में भालू के हमले से युवक की मौत

सतपुली : तहसील लैन्सडौन के अन्तर्गत पैनलगांव में बकरी चुगा रहे ग्रामीण अर्जुन सिंह पर भालू ने हमला कर बुरी तरह घायल कर दिया जिससे उसकी मौत हो गई। मुतक का पोस्टमार्टम कर मृतक के परिजनों को तत्काल सहायता के रूप में पचास हजार की अनुग्रह राशि दी गई है। भालू के हमले के बाद पैनलगावं क्षेत्र में भालू का आतंक व्याप्त हो गया है। ग्रामीणों ने शासन से भालू के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरूवार को दोपहर लैन्सडौन तहसील के तल्ला बदलपुर पटटी के पैनलगांव निवासी अर्जुन सिंह पुत्र स्व. आनन्द सिंह गांव से लगभग दो किलोमीटर दूर जगंल में गाय बकरी चुगा रहा था. इतने में सामने से भालू ने उस पर हमला कर उसे बुरी तरह घायल कर दिया। अर्जुन सिंह की पत्नी रजनी देवी द्वारा घटना की जानकारी गांव वालो को दिये जाने पर ग्रामीण घायल अर्जुन सिंह को इलाज के लिए ले गये परन्तु गांव से तीन किलोमीटर दूर पीपलचैड़ में उसकी मृत्यु हो गई।

घटना की जानकारी मिलते ही राजस्व उपनिरीक्षक राजेन्द्र लाल घटना स्थल पर पंहुचे और शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए कोटद्वार भेज दिया गया। मृतक के परिजनों को तत्काल सहायता के रूप में पचास हजार की अनुग्रह राशि भी दी गई है। भालू के हमले से हुई मौत से जंहा ग्रामीणों में मातम पसर गया है वही समूचे क्षेत्र में भालू का आतंक भी व्याप्त हो गया है।

मनीष खुगशाल ‘स्वतन्त्र’

उत्तराखंड में एक दिन में मिले 218 कोरोना पॉजिटिव, देर शाम आये 114 नए मामले, 716 पहुंचा मरीजों का आंकड़ा

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Coronavirus Update uttarakhand : उत्तराखंड में आज कोरोना वायरस का बम फूट गया है. आज उत्तराखंड में 218 कोरोना पॉजिटिव मामले सामने आये हैं. स्वास्थ्य विभाग द्वारा रात 8 बजे जारी हेल्थ बुलेटिन में 114 नए लोगों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है. इससे पहले आज दोपहर में भी राज्य में 102 कोरोना पॉजिटिव मामले सामने आये थे. जिसके बाद राज्य में कुल कोरोना संक्रमित मरीजों की सक्ख्या 716 हो गई है.

स्वास्थ्य विभाग द्वारा देर शाम जारी रिपोर्ट के मुताबिक जो 114 कोरोना पॉजिटिव मिले हैं उनमे से सबसे ज्यादा 82 लोग अकेले नैनीताल जिले के रहने वाले हैं. इसके अलावा 17 लोग देहरादून से, 06 अल्मोड़ा से, 04 उत्तरकाशी से, 03 पौड़ी से, 01 हरिद्वार तथा 01 उधमसिंह सिंह नगर जनपद से है. सभी कोरोना पॉजिटिव लोग बाहरी राज्यों से यहाँ पहुंचे हैं. इनमे से ज्यादातर लोग दिल्ली/ गुडगाँव से लौटे हैं. इससे पहले स्वास्थ्य विभाग द्वारा शुक्रवार दोपहर को जारी रिपोर्ट में जो 102 कोरोना पॉजिटिव मिले थे उनमे से सबसे ज्यादा 55 लोग अकेले देहरादून जिले के रहने वाले थे. इसके अलावा 15 अल्मोड़ा से, 08 बागेश्वर से, 08 टिहरी से, 04 हरिद्वार से, 04 उधमसिंह नगर से, 03 नैनीताल से, 02 पौड़ी से, 02 रुद्रप्रयाग से तथा 01 मरीज पिथोरागढ़ जनपद से थे.

कुल मिलाकर आज उत्तराखंड में जो 218 कोरोना पॉजिटिव मामले सामने आये हैं उनमे से सबसे ज्यादा 85 लोग अकेले नैनीताल जिले के रहने वाले हैं, इसके अलावा 72 लोग देहरादून जिले से, 21 अल्मोड़ा से, 08 बागेश्वर से, 08 टिहरी से, 05 हरिद्वार से, 05 उधमसिंह नगर से, 05 पौड़ी से, 04 उत्तरकाशी से, 02 रुद्रप्रयाग से तथा 01 मरीज पिथोरागढ़ जनपद से है. जिसके बाद राज्य में कुल कोरोना संक्रमित मरीजों की संक्या 716 हो गई है. इसके अलावा 102 लोग ठीक होकर घर भी लौटे हैं. जबकि 05 लोगों की मौत हो चुकी है.

उत्तराखंड में अब तक कोरोना covid-19 के जिलेवार मामले

जनपद कोरोना के मरीज
नैनीताल222
देहरादून154
टिहरी70
उधमसिंह नगर62
हरिद्वार48
पौड़ी28
अल्मोड़ा39
पिथौरागढ़27
चमोली11
उत्तरकाशी14
बागेश्वर16
चंपावत8
रुद्रप्रयाग5
प्राइवेट लैबस12
कुल716

 

बड़ी खबर: उत्तराखंड में 01 जून से आम दिनों की तरह खुलेंगे सभी सरकारी दफ्तर और सचिवालय

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government offices and secretariat will open in Uttarakhand

देहरादून : उत्तराखंड सरकार ने लॉकडाउन के बीच सभी सरकारी दफ्तरों को पहले की भांति पूरी तरह से खोलने का आदेश जारी किया है। राज्य में 01 जून से सभी सरकारी ऑफिस आम दिनों की तरह सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुलेंगे। वहीँ विधानसभा सचिवालय भी सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक खोला जाएगा।

शुक्रवार को उत्तराखंड के प्रभारी सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार 01 जून 2020 से प्रदेश के समस्त शासकीय कार्यालय लॉकडाउन की अवधि से पहले की तरह विभागस्तर पर प्रात: 10 बजे से सांय 5 बजे तक खुलेंगे। इसके साथ ही पांच दिवसीय कार्यालयों यथा राज्य सचिवालय एवं राज्य विधानसभा आदि में प्रात: 9:30 से सांय 6:00 बजे तक खोले जायेंगे। समूह क एवं ख के अधिकारी शत प्रतिशत तथा समूह ग एवं घ की उपस्थिति 50 प्रतिशत सुनिश्चित की जाएगी। शेष शर्तें पिछले शासनादेश (02 मई) के अनुसार यथावत रहेंगी। उल्लेखनीय है कि लॉकडाउन के पहले चरण में सभी सरकारी कार्यालयों को बंद करने के आदेश दिए गए थे। लेकिन बाद के चरणों में कुछ राज्यों ने सीमित संख्या में कर्मचारियों को कार्यालय आने के आदेश जारी किए थे।

हालाँकि उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। आज उत्तराखंड में अब तक के एक दिन में सबसे ज्यादा 102 कोरोना पॉजिटिव केस सामने आये हैं। जिनमे से अकेले 55 मामले देहरादून जनपद से हैं। जिसके बाद अब प्रदेश के कुल कोरोना संक्रमित मरीजो की संख्या 602 पहुँच गई है।

प्रवासी मजदूरों के लिए रोजगार सहायता केंद्र की स्थापना करेगा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण

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employment assistance center for migrant laborers

ग्रेटर नोएडा : कोरोना महामारी के चलते शहर में रह रहे प्रवासी मजदूरों व श्रमिकों को काम नहीं मिल पा रहा है,जिसकी वजह से उनको काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। संकट के दौर से गुजर रहे प्रवासी मजदूरों को रोजगार दिलाने के लिए ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण रोजगार सहायता केंद्र की स्थापना किए जाने की तैयारी कर रहा है। प्राधिकरण सीईओ नरेंद्र भूषण वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर इस संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दे चुके हैं। इसके साथ ही क्षेत्र के किसानों के लिए कॉमन सर्विस सेंटर भी स्थापित किया जाएगा। बता दें कि लॉकडाउन के चलते प्रवासी मजदूरों का पलायन जारी है,इसके बावजूद कुछ लोग काम शुरू होने के इंतजार में बैठे हुए हैं।

प्राधिकरण सीईओ नरेंद्र भूषण ने बताया कि ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में निवास कर रहे प्रवासी मजदूरों की सहायता के लिए कोविड-19 ग्रेटर नोएडा रोजगार सहायता केंद्र की स्थापना की जाएगी, जिसके माध्यम से सबसे पहले शहर में निवास कर रहे प्रवासी मजदूरों का पंजीकरण कराया जाएगा। इसके बाद संबंधित प्रवासी मजदूरों को स्किल डेवेलपमेंट सेंटर के सहयोग से प्रशिक्षण दिलाने में मदद की जाएगी। प्रशिक्षण के बाद अनुभव व योग्यता के आधार पर औद्योगिक इकाइयों,संस्थानों, बिल्डर्स व डेवेलपर्स से समन्वय स्थापित कर उनकी आवश्यकता के अनुरूप रोजगार दिलवाने में प्राधिकरण द्वारा सहयोग किया जाएगा। वहीं क्षेत्र में स्थित गांवों की सुविधाओं के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा कामन सर्विस सेंटर के माध्यम से किसानों को प्राधिकरण के ऑनलाइन पत्राचार तथा निर्धारित देयों के ऑनलाइन भुगतान में सहायता हेतु समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्यवाही किए जाने की कार्य योजना तैयार कर शीघ्र लागू किए जाने का भी आदेश दिया गया है।

सीएल मौर्य