ऋषिकेश। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी शहीद पार्क, नेपाली फार्म में क्षेत्रीय संयुक्त संघर्ष समिति के नेतृत्व में शहीद स्मारक एवं उत्तराखंड की अस्मिता से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर चल रहा धरना शनिवार को 131वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान वक्ताओं ने वीरांगना तीलू रौतेली की जयंती पर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए प्रदेश की जनभावनाओं की अनदेखी का आरोप लगाया।
धरने को संबोधित करते हुए समिति के संयोजक शीशपाल सिंह पोखरियाल ने कहा कि वीरांगना तीलू रौतेली उत्तराखंड की पहचान, गौरव और स्वाभिमान की प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में प्रदेश की महान विभूतियों को उचित सम्मान देने के बजाय किसी बाहरी व्यक्ति की प्रतिमा स्थापित करने का प्रयास उत्तराखंड की अस्मिता और जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की धरती पर स्थापित होने वाले स्मारक और प्रतिमाएं यहां के आंदोलनकारियों, वीर-वीरांगनाओं तथा लोकनायकों के योगदान और जनता की भावनाओं को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए। सरकार से इस विषय पर पुनर्विचार कर जनभावनाओं का सम्मान करने की अपील भी की गई।
इस अवसर पर उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के प्रदेश महासचिव सुधीर राय रावत ने कहा कि सरकार इस मामले में हठधर्मिता का परिचय दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को सत्ता के अहंकार से बाहर निकलकर उत्तराखंड की जनता की भावनाओं और आकांक्षाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है और उसकी भावनाओं की अनदेखी उचित नहीं है।
सुधीर राय रावत ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जनभावनाओं की अनदेखी जारी रखी, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की अस्मिता, स्वाभिमान और महान विभूतियों के सम्मान से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
धरना स्थल पर उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के जिला महासचिव गौतम राणा, राज्य आंदोलनकारी, सामाजिक कार्यकर्ता तथा क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहे और आंदोलन को समर्थन दिया।
क्षेत्रीय संयुक्त संघर्ष समिति ने दोहराया कि शहीद स्मारक और उत्तराखंड की महान विभूतियों के सम्मान से जुड़े मुद्दों पर उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार जनभावनाओं के अनुरूप निर्णय नहीं लेती।



