लॉकडाउन में फंसे दो परिवारों के लिए मसीहा साबित हुए उत्तराखंड सांस्कृतिक समिति के सदस्य

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ग्रेटर नोएडा : संकट की घड़ी में किसी जरूरतमंद की मदद करना मानवता का सबसे बड़ा धर्म होता है। कोरोना महामारी के चलते पैदा हुए हालात के बीच आज बहुत से लोग इस धर्म को निभा रहे हैं। उत्तराखंड सांस्कृतिक समिति ग्रेटर नोएडा के पदाधिकारियों ने भी लॉक डाउन में फंसे दो परिवारों की मदद कर उन्हें उनके मूल निवास उत्तराखंड भेजने का बड़ा काम किया है।

बता दें कि उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के किबर्स गाँव (अगरोड़ा) के मूल निवासी प्रदीप रावत पत्नी वा दो छोटे बच्चों के साथ ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 36 में किराये के मकान में रहते हैं। कोरोना महामारी के चलते लागू किए गए लॉक डाउन के दौरान प्रदीप रावत और उनकी पत्नी की मानसिक स्थिति खराब हो गयी। इसकी वजह भूत प्रेत का साया व देवी देवताओं का रूष्ट होना बताया गया। इस दौरान प्रदीप कभी भी घर से बाहर निकल कर बहकी बहकी बातें करते हुए जोर-जोर से रोने चिल्लाने लगते थे। प्रदीप रावत की मनोदशा के बारे में यहां रहने वाले उत्तराखंड सांस्कृतिक समिति के वरिष्ठ सदस्य त्रिलोक पंवार, पूरण सिंह पिल्ख्वाल सहित सेक्टर-36 के अन्य सदस्यों को मालूम हुई तो उन्होंने प्रदीप रावत की मदद के लिए हाथ बढ़ाया। इसकी जानकारी समिति के अध्यक्ष जेपीएस रावत वा अन्य सदस्यों को दी गई। समिति के सदस्यों ने मानवता का धर्म निभाते हुए सबसे पहले डॉक्टर को दिखाया। उसके बाद इस परिवार को गाँव भेजने का फैसला किया परन्तु उनकी मनोदशा ठीक न होने तथा इस बीमारी से संबंधित कोई मेडिकल सर्टिफिकेट न होने के कारण इनका पास भी नहीं बन पा रहा था। दरअसल इन दिनों किसी भी हॉस्पिटल में इस तरह की बीमारी के लिए डॉक्टरों की सेवाएं नहीं मिल रही हैं। वहीं मेडिकल साइंस भूत प्रेत या ऊपरी हवा को नहीं मानता है। समिति के अध्यक्ष जेपीएस रावत की लगातार कोशिशों के बाद एक मनोचिकित्सक से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा उनके इलाज के लिए प्रयास किया गया तथा 5 दिनों के इलाज के बाद जब उनकी स्थिति में थोडा सुधार हुआ और उन्होंने खाना खाना शुरू कर दिया, तब उनका पास बनवाकर संस्था के खर्च पर गाड़ी की व्यवस्था कर 10 मई को प्रदीप रावत व उनके परिवार को गाँव पहुचाया गया। इसके लिए संस्था के कुछ जागरूक सदस्यों ने स्वेच्छा से धनराशि एकत्रित की थी।

इसके अलावा उत्तराखंड सांस्कृतिक समिति ने उत्तराखंड मूल के ही एक अन्य परिवार की भी इस लॉकडाउन के दौरान मदद की। समिति के अध्यक्ष को व्हाट्सएप के माध्यम से जानकारी मिली थी कि उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग निवासी अरविंद आर्य का परिवार कासना में रह रहा है, उनके परिवार में पत्नी और तीन बेटियां हैं। उक्त व्यक्ति की पिछले कुछ समय से नौकरी छूट चुकी है। लॉकडाउन चलते वह अपने गाँव भी नहीं जा पा रहा है और अब उसके पास खाने के लिए राशन तक नहीं है। जेपीएस रावत ने इस मामले को समिति के पदाधिकारियों से चर्चा करने के बाद सबसे पहले अरविंद आर्य के अकाउंट में संस्था की ओर से 5 हजार रुपये पेटीएम से ट्रांसफर कराये। तथा साथ ही उनके घर पर करीब एक महीने का राशन भी भिजवाया। इसके बाद अब उनके लिए पास की व्यवस्था भी कर दी है। अरविंद आर्य का परिवार आगामी 15 मई को रुद्रप्रयाग स्थित अपने गाँव जायेगा।

समिति के अध्यक्ष जेपीएस रावत ने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें पता चला है। कुछ लोग जिनका प्रदीप रावत की मदद करने ने रत्तीभर भी योगदान नहीं है वे लोग इसका श्रेय लेने के  लिए सोशल मीडिया में अफवाह फैला रहे हैं कि उन लोगों ने उत्तराखंड के किसी बड़े मंत्री की सहायता से प्रदीप रावत को घर पहुँचाने में मदद की। जबकि वास्तविकता यह नहीं है। जिस समय प्रदीप रावत इस मनोदशा के गुजर रहे थे उस समय उत्तराखंड सांकृतिक समिति के सदस्यों खासकर सेक्टर-36 में रहने वाले सदस्यों ने ही उनकी मदद की और उन्हें उनके गाँव तक पहुंचा कर ही राहत की साँस ली।