उत्तराखण्ड से देवभूमि संवादाता अजय तिवाड़ी की एक रिपोर्ट

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आज जगह जगह कार्यक्रम व विचार गोष्ठियां हो रही हैं। पर्यावरण को बचाने के लिऐ कार्ययोजना बनती है, लेकिन वनान्दोलन जैसें बड़े व सफल कार्यक्रम बिना जन सहयोग व सहभागिता के बस औपचारिकता भर रह जाती हैं। जिस तरह से भारत जैसें बहुधर्मी देश मे जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ रही है, उसी तरह पर्यावरण से जुडी समस्यायें व चुनौतियां भी बिकराल रुप लेने लगी हैं। ग्लेशियर सिकुड़ रहे हैं। गौमुख इसका जीता जागता उदारहण हैं। हिमालय से एक बेचैन करने वाली खबर आयी कि सतोपंथ झील सूख रही है। ये घटनाएँ भविष्य मे जल संकट की ओर इशारा कर रही हैं। जनसंख्या मे हो रही बेतहाशा बढोतरी ने सरकार के सम्मुख चुनौतियां पेश की है, विकास व निर्माण के लिए वनो का कटान भी होगा, इस पर आलोचना महज निठल्ले चिंतन के सिवा कुछ नही है। आवश्यक्ता है जनसंख्या की बेतहाशा, बेलगाम, बढोत्तरी को रोकना, एक परिवार मे दो बच्चों का कानून, अनिवार्य हो, पर्यावरण संरक्षण के लिऐ मैती आंदोलन जैसें कार्यक्रम देश भर मे हों, “एक परिवार दो पेड़” जैसें कार्यक्रम शुरु हों, विद्यालय स्तर पर पर्यावरण से जुडे कार्यक्रम हों। बिना जनसहयोग व सहभागिता के वनान्दोलन कभी सफल नही हो सकते, साथ ही थोपे गये वन कानूनो से सडकों जैसीं बेहद जरूरी विकासात्मक योजनाऔ मे बाधा भी नही आनी चाहिऐ क्योकि ये कानून ही आम आदमी को वनो के संरक्षण से दूर करते हैं। मनरेगा और उससे पहले चली जवाहर रोजगार योजनाऐं फेल हुई, कारण था जनजुड़ाव न होना व योजनाऔ मे भ्रष्टाचार, कम से कम हिमालयी राज्यों मे ऐसी जनरोजगार परक योजनाऔ को पेड़ लगाने से जोड़ने तथा उनके संरक्षण के लिऐ व्यक्तिगत स्तर से ग्रांम सभाऔ को “अपना वन” जैसें कार्यक्रमों से जोडना, पहाडों पर प्राकृतिक जलस्रोतो, चाल खाल के संरक्षण के लिऐ कार्यक्रम, कार्बन उत्सर्जन को कम करना आदि। एक विचार विश्व स्तर पर बन रहा है, कि अगला विश्व युद्ध पानी के लिऐ ही लड़ा जायेगा। विश्व स्तर पर चल रही डैम निर्माण जल की निर्बाध बहाव मे रुकावटें अन्तर्देशीय रूप मे शुरु हो चुकी हैं। पर्यावरण अब जीवन पर संकट के रुप मे परिवर्तित हो चुका है। महानगरो मे वायु सांस लेने में कई विजातीय तत्व लेकर शरीर मे पंहुच रहे हैं। एक गम्भीर चुनौती को जनसहभागिता व कठोर कानूनो की आवश्यक्ता है।

पौड़ी गढ़वाल के अंतर्गत ज्वाल्पा देवी मंदिर परिसर मे आज विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वृक्ष सेवा अभियान के संयोजक श्री प्रदीप रावत द्वारा पौधरोपण तथा पर्यावरण संरक्षण पर संगोष्टी आयोजित की गयी ।जिसमे श्रीनगर के ज्योतिषाचार्य अखिलेश चन्द्र चमोला मुख्य अतिथि के रूप मे आमन्त्रित किये गए। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंदिर के पुजारी ने की। कार्यक्रम के बाद मंदिर प्रांगण के बाहर पौधरोपण किया गया।

 

गगास बचाओ जन चेतना रैली

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आज अल्मोड़ा जिले के विकास खंड द्वाराहाट के अंतर्गत ग्रामसभा डोटलगांव व डोटलगांव सेवा समिति दिल्ली द्वारा वहां की स्थानीय गगास नदी में हो रहे खनन को रोकने के लिये एक जन चेतना रैली निकाली गई। बता दें कि गगास नदी से पूरी गगास घाटी व रानीखेत को पानी मिलता है। लेकिन आज यह नदी सूखकर विलुप्त होने के कगार पर है।

 इस अभियान में ग्रामप्रधान मदन मोहन सिंह, सरपंच दीपक शाही  पूर्व प्रधान प्रतापशाही, पूर्व बीडीसी सदस्य जयमल शाही व डोटलगांव सेवा समिति दिल्ली से संरक्षक प्रताप शाही, अध्यक्ष नन्दन शाही, उपाध्यक्ष भुवन शाही, महासचिव गंगा शाही, कोषाध्यक्ष लक्ष्मण शाही प्रचार सचिव कुलदीप बिष्ट, तारा मेहरा, प्रवक्ता प्रभाकर शाही , वरिष्ठ सलाहकार पूरन शाही,  कैप्टन हरीश‌ शाही, पूर्व उपप्रधान राजेंद्र शाही, सलाहकार लक्ष्मण शाही, भैरव बिष्ट, डीपीएमआई के छात्र, बग्लाली पोखर इंटर कालेज के प्रिंसिपल महोदय व उनके छात्रों व  बजरंग दल के सदस्यों ने काफी सहयोग दिया।

ग्रेटर नोएडा के आसपास भी विश्व पर्यावरण दिवस पर लोगों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आज ग्रेटर नॉएडा के विभिन्न सेक्टरों मे RWA एवं अन्य सामाजिक संगठनों द्वारा पौधरोपण कार्यक्रम किये. एक्टिव सिटिजन संस्था, महिला उन्नति संस्था, गोल्डन फेडरेशन ऑफ आर०डब्ल्यू०ऐज ग्रेटर नोएडा, RWA अल्फ़ा-1, RWA गामा-1 के सदस्यों ने ग्रेटर नॉएडा शहर के अलग-अलग स्थानों पर पौधे लगाकार पर्यावरण बचाने का संदेश दिया। इसके अलावा एक्टिव सिटीजन टीम के सदस्यों ने तुगलपुर मार्किट मे जाकर लोगों एवं दुकानदारों को पौलीथीन से पर्यावरण को होने वाले नुक्सान के बारे मे बताया तथा लोगों से पौलीथीन का उपयोग ना करने कीअपील की।

इस अवसर पर महिला उन्नति संस्था के संस्थापक डा राहुल वर्मा ने लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करतें हुए क़हा कि आज हम जिस माहौल में सांस ले रहे है वह जीवन  के लिये बेहद घातक है । हमारा पर्यावरण आज इतना दूषित हो चुका है कि मनुष्य की औसत उम्र महज 70 साल से भी कम रह गयी है और इसका कारण नये नये शहर बसाने और उद्योग लगाने के लिये जंगलों और पेड़ो का अधिकाधिक स्तर पर कटान होना है। पेड़ हमारे जीवन रक्षक है जो हमें शुध्द हवा प्रदान करने और प्रक्रति को शुध्द बनाने में सहायक है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पेड़ लगाकार पर्यावरण को शुद्ध बनाने की अपील की।