नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। रविवार को दिल्ली-एनसीआर में इस वर्ष की सबसे अधिक उमस भरी गर्मी दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, दिल्ली का ‘फील्स लाइक’ (अनुभूत) तापमान 51.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस साल का सबसे अधिक है। वहीं वेट-बल्ब तापमान 29.77 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे लोगों को भीषण गर्मी और उमस का सामना करना पड़ा।
रविवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 41.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.1 डिग्री अधिक रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 30.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2.9 डिग्री अधिक था। दिनभर हवा में नमी 35 से 63 प्रतिशत के बीच बनी रही, जिसके कारण गर्मी का असर और अधिक महसूस हुआ।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अरब सागर से आने वाली दक्षिण-पश्चिमी हवाएं पाकिस्तान और उत्तर-पश्चिम भारत में नमी बढ़ा रही हैं। यही वजह है कि वास्तविक तापमान से कहीं अधिक गर्मी महसूस हो रही है। स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने बताया कि फिलहाल मानसून दिल्ली के करीब नहीं पहुंचा है। यदि मानसूनी हवाएं बंगाल की खाड़ी से आने लगेंगी, तभी मौसम में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिलेगा।
दिल्ली में असल तापमान 41.3°C होने के बावजूद 51°C जैसा क्यों महसूस हो रहा है?,
दिल्ली में असल अधिकतम तापमान 41.3°C होने के बावजूद 51°C जैसा महसूस होने की वजह वेट-बल्ब टेंपरेचर है जो तापमान-ह्यूमिडिटी का संयुक्त प्रभाव दर्शाता है। जब हवा में नमी अधिक होती है तो शरीर से निकलने वाला पसीना आसानी से वाष्पित नहीं होता। इससे शरीर को ठंडा होने में कठिनाई होती है और इंसान को कहीं अधिक गर्मी लगती है।
विशेषज्ञों के अनुसार 32 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक वेट-बल्ब तापमान होने पर स्वस्थ व्यक्ति के लिए भी लंबे समय तक बाहर काम करना मुश्किल हो जाता है। यदि यह तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाए तो मानव शरीर अपनी गर्मी नियंत्रित नहीं कर पाता, जिससे हीट स्ट्रोक और बेहोशी का खतरा बढ़ जाता है। आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार सोमवार तक अधिकतम तापमान 39 से 41 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। इसके बाद तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आएगी और सप्ताह के अंत तक यह 33 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच सकता है।
वेट-बल्ब तापमान क्या होता है?
वेट-बल्ब तापमान शरीर की ठंडक झेलने की ताकत मापता है। वेट-बल्ब तापमान में हवा के तापमान और उसमें मौजूद नमी को मिलाकर तापमान मापा जाता है। जब हवा में नमी का स्तर बढ़ जाता है तो पसीना सूखने में समय लगता है। इस दौरान इंसानी शरीर को ठंडा करके रखने वाला कूलिंग सिस्टम कमजोर पड़ जाता है और तापमान से ज्यादा गर्मी महसूस होती है। जबकि शरीर का तापमान सामान्य रखने के लिए पसीना एक महत्वपूर्ण कारक है और यह तभी संभव है जब हवा सूखी हो न कि उसमें ज्यादा नमी हो। इसलिए अगर पसीना सूखने में ज्यादा समय लगेगा तो शरीर का तापमान भी कम नहीं होगा क्योंकि पसीना जब हवा में उड़ता है तो यह अपने साथ गर्मी भी ले जाता है। इस वजह से दिल्लीवासियों को 41 डिग्री वाली गर्मी 51 डिग्री वाली महसूस हो रही है। उदाहरण के तौर पर अगर तापमान नमी के साथ 44 डिग्री सेल्सियस है तो यह इंसानी शरीर को 50 से 51 डिग्री सेल्सियत तक महसूस होगा।
दिल्ली को गर्मी से राहत कब मिलेगी?
मौसम विभाग ने सोमवार से शुक्रवार तक दिल्ली में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है। मंगलवार और बुधवार के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। न्यूनतम तापमान में भी गिरावट आने की संभावना है और शुक्रवार तक यह 21 से 23 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि 2 या 3 जुलाई से छिटपुट बारिश शुरू होने पर गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है, जबकि 4 जुलाई के बाद दिल्ली में मानसून के प्रवेश की संभावना है।



