श्रीनगर गढ़वाल: शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली एवं राजकीय सेवा से सेवानिवृत्त हो रही प्रधानाध्यापिका श्रीमती मुन्नी रौथाण को ‘बाल प्रतिभा सम्मान समारोह परिषद, श्रीनगर गढ़वाल’ द्वारा ‘सेवानिवृत्ति सम्मान’ से सम्मानित किया गया। वह आगामी 31 मई 2026 को शिक्षा विभाग उत्तराखंड में प्रधानाध्यापिका पद से 33 वर्षों की गौरवशाली एवं बेदाग सेवा पूर्ण कर सेवानिवृत्त हो रही हैं।
इस अवसर पर परिषद के निदेशक तथा राज्यपाल पुरस्कार एवं अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से सम्मानित डॉ. अखिलेश चन्द्र चमोला ‘वाचस्पती’ ने उनके कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि श्रीमती रौथाण ने “सा विद्या या विमुक्तये” के आदर्श को आत्मसात करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में समर्पण, निष्ठा एवं शुचिता के साथ अतुलनीय योगदान दिया है।
दुर्गम परिस्थितियों में जगाई शिक्षा की अलख
सम्मान समारोह में वक्ताओं ने कहा कि पहाड़ की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में शिक्षा की अलख जगाना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसे श्रीमती मुन्नी रौथाण ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति एवं ममतामयी व्यवहार से सफल बनाया। उन्होंने एक कुशल शिक्षिका एवं प्रशासिका के रूप में हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों की बाल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
परिषद द्वारा जारी सम्मान पत्र में उनके सुदीर्घ, निष्कलंक एवं प्रेरणादायी कार्यकाल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके सुखद, स्वस्थ एवं आनंदमय भविष्य की कामना की गई। परिषद सदस्यों ने मां दक्षिण काली एवं बाबा केदारनाथ से उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।
कार्यक्रम में दीपशिखा, आशा डिमरी, विद्या नेगी सहित अन्य शिक्षिकाओं ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए श्रीमती रौथाण के योगदान को प्रेरणादायी बताया।



