curb migration through local employment and entrepreneurship

रिवर्स पलायन करने वाले काश्तकार बदलाव की मिसाल, स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार को मिलेगा बढ़ावा: डॉ. शरद सिंह नेगी

पौड़ी, 28 जुलाई: उत्तराखंड सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन रोकने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयासरत है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर ग्राम्य विकास एवं राज्य पलायन निवारण आयोग की ओर से मंगलवार को विकास भवन सभागार में प्रवासी पंचायत-2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न विकासखंडों से आए प्रवासियों, रिवर्स पलायन कर गांव लौटे काश्तकारों, उद्यमियों और युवाओं के साथ संवाद कर स्थानीय रोजगार, स्वरोजगार, उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने पर व्यापक चर्चा की गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ राज्य पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. शरद सिंह नेगी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाले काश्तकारों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया।

रिवर्स पलायन करने वाले युवा बन रहे प्रेरणा

डॉ. शरद सिंह नेगी ने कहा कि प्रवासी पंचायत का उद्देश्य गांवों से बाहर रह रहे लोगों के अनुभवों और सफल प्रयासों को समाज के सामने लाना है, ताकि अधिक से अधिक लोग अपने गांव लौटकर स्वरोजगार और उद्यमिता को अपनाएं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पलायन की चुनौती से निपटने के लिए कृषि, बागवानी, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, जैविक खेती और अन्य स्थानीय आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि रिवर्स पलायन कर अपने गांवों में सफल उद्यम स्थापित करने वाले काश्तकार अन्य युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त सुझावों का गंभीरता से अध्ययन कर उन्हें योजनाओं में शामिल किया जाएगा, ताकि स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप रोजगार और आय के बेहतर अवसर विकसित किए जा सकें।

सभी जनपदों में आयोजित हो रही हैं प्रवासी पंचायतें

आयोग के सदस्य सचिव ए.के. राजपूत ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार प्रदेश के सभी जनपदों में प्रवासी पंचायतों का आयोजन किया जा रहा है। टिहरी, चंपावत, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में इनका सफल आयोजन हो चुका है। आयोग के प्रयासों से अनेक लोगों ने गांव लौटकर स्वरोजगार स्थापित किया है और अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध कराया है।

महिलाओं को स्थानीय उत्पादों से जोड़ने पर जोर

आयोग की सदस्य एवं गौरा देवी पुरस्कार से सम्मानित रंजना रावत नेगी ने कहा कि एकीकृत कृषि और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने महिलाओं को प्रशिक्षण, प्रोत्साहन और बेहतर विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराकर स्वरोजगार से जोड़ने पर बल दिया।

वहीं, आयोग के सदस्य एवं पौड़ी जिला प्रभारी दिनेश रावत ने कहा कि प्रवासी नागरिकों का अनुभव, ज्ञान और संसाधन ग्रामीण विकास को नई दिशा दे सकते हैं। प्रवासी पंचायत ऐसा प्रभावी मंच है, जहां प्रवासी अपने अनुभव साझा कर गांवों के विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए सुझाव दे रहे हैं।

ब्रांडिंग और मार्केटिंग से बढ़ेगी किसानों की आय

मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी ने कहा कि सरकार स्वरोजगार एवं आजीविका संवर्धन योजनाओं का प्रभावी संचालन कर रही है, जिससे बड़ी संख्या में लोग गांवों में ही रोजगार से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में होमस्टे, पारंपरिक खेती, उद्यानिकी, मत्स्य पालन, मशरूम उत्पादन और स्थानीय उत्पादों पर आधारित उद्यमों की अपार संभावनाएं हैं। यदि स्थानीय उत्पादों की आकर्षक पैकेजिंग, ब्रांडिंग और प्रभावी विपणन किया जाए तो किसानों और उद्यमियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

प्रवासियों ने साझा किए अनुभव और सुझाव

कार्यक्रम में रिवर्स पलायन कर स्वरोजगार स्थापित करने वाले काश्तकारों ने कृषि, उद्यानिकी, होमस्टे, मत्स्य पालन और अन्य आजीविका गतिविधियों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने, उत्पादों के बेहतर विपणन और ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर भी अपने सुझाव दिए।

इस अवसर पर आयोग के सदस्य सचिव रामप्रकाश पैन्यूली, पीडी डीआरडीए विवेक कुमार उपाध्याय, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विशाल शर्मा, मुख्य कृषि अधिकारी ऋतु कुकरेती जुयाल, जिला उद्यान अधिकारी मनोरंजन भंडारी, जिला खादी एवं ग्रामोद्योग अधिकारी डॉ. अल्का पांडेय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, प्रवासी काश्तकार, उद्यमी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।