- गांवों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर
- सरकारी योजनाओं का लाभ गांव तक सरलता से पहुंचे : धामी
- मुख्यमंत्री आवास में ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग की बैठक में शामिल हुए अनिल सिंह शाही
देहरादून, 21 अगस्त 2026: उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन की चुनौती के समाधान, रिवर्स पलायन को गति देने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने को लेकर आज मुख्यमंत्री आवास, देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में द्वाराहाट विधानसभा से पूर्व विधायक प्रत्याशी एवं ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के सदस्य अनिल सिंह शाही भी शामिल हुए।
बैठक में पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन की वर्तमान स्थिति, रिवर्स पलायन को प्रोत्साहित करने, ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार एवं आजीविका के नए अवसर विकसित करने तथा स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
गांवों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर
बैठक में आयोग की ओर से विभिन्न जनपदों में आयोजित की जा रही प्रवासी पंचायतों, पलायन निवारण एवं स्वरोजगार जागरूकता कार्यक्रमों की प्रगति एवं अनुभवों की जानकारी मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत की गई। आयोग के सदस्यों ने पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने, स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने और युवाओं को अपने गांवों से जोड़ने के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बैठक में प्राप्त सुझावों पर गंभीरता से विचार करते हुए ठोस एवं प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि रिवर्स पलायन को बढ़ावा देने के लिए सभी विभाग अपनी योजनाओं एवं विभागीय गतिविधियों के माध्यम से आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना सुनिश्चित करें।
सरकारी योजनाओं का लाभ गांव तक सरलता से पहुंचे
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को स्वरोजगार एवं आजीविका से जुड़ी योजनाओं की जानकारी सरल, सहज और प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराई जानी चाहिए। योजनाओं का लाभ लेने के लिए लोगों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों और बैंकों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा योजनाओं की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जाए।
स्थानीय संसाधन और पारंपरिक कौशल बनें रोजगार का आधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं। स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान, हस्तशिल्प, कृषि एवं अन्य स्थानीय कौशल को रोजगार से जोड़कर युवाओं के लिए अपने गांव में ही आजीविका के अवसर विकसित किए जाने चाहिए।
उन्होंने स्थानीय उत्पादों को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान देने तथा उन्हें बेहतर एवं व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
सिर्फ रोजगार नहीं, गांवों में बेहतर सुविधाएं भी जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि रिवर्स पलायन केवल रोजगार उपलब्ध कराने से संभव नहीं होगा, बल्कि इसके लिए गांवों में बेहतर मूलभूत सुविधाएं, आजीविका के अवसर और विकास की संभावनाएं भी सुनिश्चित करनी होंगी। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ परिणामोन्मुखी कार्य करने के निर्देश दिए।
बैठक में ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष एस.एस. नेगी, सदस्य अनिल सिंह शाही, दिनेश रावत, सुरेश सुयाल, राम प्रकाश पैन्यूली एवं श्रीमती रंजना रावत, सचिव धीराज गर्ब्याल, डॉ. श्रीधर बाबू अद्दांकी, सी. रविशंकर, अहमद इकबाल, अपर सचिव सौरभ गहरवार, श्रीमती अनुराधा पाल एवं संतोष बडोनी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।






