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देवताल में 17,800 फीट की ऊंचाई पर अद्भुत कवि संगम: साहित्यकारों, पत्रकारों और कवियों ने हिमालय की गोद में किया काव्य पाठ

देहरादून: समुद्र तल से लगभग 17,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित पवित्र देवताल में साहित्य, संस्कृति और अध्यात्म का अनूठा संगम देखने को मिला। हिमालय की दुर्गम वादियों में आयोजित इस विशेष आयोजन में साहित्यकारों, पत्रकारों, कवियों, समाजसेवियों तथा पर्वतारोहियों ने सहभागिता कर इसे यादगार बना दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता देहरादून दूरदर्शन केंद्र के पूर्व निदेशक डॉ. सुभाष थलेड़ी ने की, जबकि उत्तराखंड सरकार मे दायित्व धारी राज्य मंत्री राम शरण गौड़ मुख्य अतिथि के रूप में अपनी धर्मपत्नी लाजवंती गौड़ के साथ उपस्थित रहे।

इस अवसर पर डॉ. सुभाष थलेड़ी ने स्वर्गीय मोहन सिंह ग्रामवासी (पूर्व कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड सरकार) द्वारा प्रारंभ की गई देवताल–माणा पास धार्मिक यात्रा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसी यात्राएं हिमालय की धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन विरासत को नई पहचान देती हैं।

लगातार हो रही बर्फबारी और तेज हिमालयी शीत लहर जैसी विषम परिस्थितियों के बावजूद पंडित राजेन्द्र प्रसाद कपरुवाण तथा गढ़ कवि पंडित देवेन्द्र उनियाल ने देवताल में विधिवत पूजा-अर्चना एवं हवन संपन्न कराया। उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने क्षेत्र की सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की।

यात्रा के दौरान देहरादून दूरदर्शन केंद्र के पूर्व निदेशक डॉ. सुभाष थलेड़ी, वरिष्ठ पत्रकार अमरेंद्र राय (गाजियाबाद), डॉ. राजेश जैन (श्रीनगर गढ़वाल), गढ़ कवि देवेन्द्र उनियाल, अंतरराष्ट्रीय कवयित्री माधुरी नैथानी, राजेन्द्र प्रसाद कपरुवाण, राजेश नंबूरी, नरेश नौटियाल, रक्षा उनियाल, रेणु नौटियाल, संजय उनियाल, विपिन रावत, सत्यपाल रावत सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

संध्या बेला में श्री बद्रीनाथ धाम में आयोजित कवि गोष्ठी की अध्यक्षता देवेन्द्र राय ने की। गोष्ठी में माधुरी नैथानी, डॉ. राजेश जैन, रक्षा उनियाल, गढ़ कवि देवेन्द्र उनियाल तथा नीरज नैथानी ने अपनी रचनाओं का प्रभावशाली काव्य पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

यात्रा के दौरान प्रतिभागियों ने भविष्य बद्री, योग बद्री, वृद्ध बद्री, श्री बद्रीनाथ धाम, श्री नृसिंह मंदिर सहित अनेक प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन किए तथा वसुधारा तक रोमांचकारी पर्वतारोहण का भी अनुभव प्राप्त किया। प्रतिभागियों ने इसे आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक दृष्टि से अत्यंत प्रेरणादायक यात्रा बताया।