केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत बोले—तीनों विभूतियों ने भारत की ज्ञान परंपरा को अमिट बनाया
नई दिल्ली, 20 सितंबर। भारतीय ज्ञान, विज्ञान, इतिहास, साहित्य और आयुर्वेद की समृद्ध परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कार्यरत संस्था भारतीय धरोहर द्वारा आयोजित वार्षिक सम्मान समारोह का भव्य आयोजन रविवार को लोधी कॉलोनी स्थित चिन्मय मिशन सभागार में संपन्न हुआ। समारोह में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने वर्ष 2026 के भारतीय धरोहर सम्मान से तीन प्रतिष्ठित विद्वानों प्रो. बलवंत सिंह राजपूत, प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकज और प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान को सम्मानित किया।
सम्मान स्वरूप प्रत्येक विभूति को एक लाख रुपये की धनराशि, सम्मान-पत्र, प्रतीक चिह्न और शॉल प्रदान किए गए। अस्वस्थता के कारण प्रो. बलवंत सिंह राजपूत समारोह में उपस्थित नहीं हो सके। उनकी ओर से उनके पुत्र मनु राजपूत ने सम्मान ग्रहण किया।
मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय धरोहर द्वारा ऐसे मनीषियों का सम्मान किया जाना देश की ज्ञान परंपरा के प्रति सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सम्मानित तीनों विभूतियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देकर भारतीय ज्ञान परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है और भारत की सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत को अमर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि प्रो. बलवंत सिंह राजपूत ने विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है, जबकि प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकज ने इतिहास और साहित्य के क्षेत्र में अपनी विद्वत्ता से नई पीढ़ी का मार्गदर्शन किया है। वहीं प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने आयुर्वेद के संरक्षण, अनुसंधान और प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान देकर आधुनिक युग में भारतीय चिकित्सा पद्धति को नई पहचान दिलाई है।
समारोह की अध्यक्षता आईजीएमसी के चेयरमैन एवं वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय ने की। उन्होंने कहा कि भारतीय धरोहर केवल सम्मान देने वाली संस्था नहीं, बल्कि भारतीय समाज को जोड़ने और उसकी सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का अभियान है। उन्होंने कहा कि आज जब समाज में पारिवारिक विघटन और सामाजिक तनाव बढ़ रहे हैं, ऐसे समय में भारतीय धरोहर जैसी संस्थाओं की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकज के व्यापक अध्ययन और प्रमाणिक शोध कार्यों की भी सराहना की।
पूर्व लोकसभा सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि देश आज अपनी सांस्कृतिक पहचान और आत्मगौरव की पुनर्स्थापना की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारतीय धरोहर जिस उद्देश्य के साथ कार्य कर रही है, वह समाज के लिए प्रेरणास्रोत है और भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन रही है।
समारोह में रमेश कपूर, प्रवीण शर्मा, सुधीर गुप्ता, संजीव गोयल, अरुण गोयल, विजय शंकर तिवारी, मोहन लाल शुक्ला, राजकुमार अग्रवाल, प्रो. जे.एस. चौहान, पंकज त्रिपाठी, प्रो. मयंक पांडेय, प्रो. प्रदीप कुमार वेदवाल, डॉ. रोशन गौड़, प्रो. डॉ. राजेश अग्रवाल, आशुतोष शर्मा, डॉ. बी.एम. भट्ट, डॉ. नवदीप जोशी, विनोद कबटियाल, कुसुम कंडवाल भट्ट, राजेश डंडरियाल और मयंक हिन्दू सहित अनेक शिक्षाविद, साहित्यकार, चिकित्सक और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।













