• उत्तराखण्ड
    • देहरादून
    • गढ़वाल
    • कुमाऊँ
  • उत्तर प्रदेश
    • लखनऊ
    • कानपुर
    • आगरा
    • नोएडा
    • ग्रेटर नोएडा
    • गाजियाबाद
  • दिल्ली-NCR
    • ग्रेटर नोएडा
    • नोएडा
    • गाजियाबाद
    • गुरुग्राम
    • फरीदाबाद
  • राजनीति
  • देश-विदेश
  • एजुकेशन/जॉब्स
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
    • मनोरंजन
    • फोटो गैलरी
  • ज्योतिष
  • पर्यटन
  • स्पेशल स्टोरी
Search
  • उत्तराखण्ड
    • देहरादून
    • गढ़वाल
    • कुमाऊँ
  • उत्तर प्रदेश
    • लखनऊ
    • कानपुर
    • आगरा
    • नोएडा
    • ग्रेटर नोएडा
    • गाजियाबाद
  • दिल्ली-NCR
    • ग्रेटर नोएडा
    • नोएडा
    • गाजियाबाद
    • गुरुग्राम
    • फरीदाबाद
  • राजनीति
  • देश-विदेश
  • एजुकेशन/जॉब्स
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
    • मनोरंजन
    • फोटो गैलरी
  • ज्योतिष
  • पर्यटन
  • स्पेशल स्टोरी
Sign in
Welcome! Log into your account
Forgot your password? Get help
Privacy Policy
Password recovery
Recover your password
A password will be e-mailed to you.
Devbhoomisamvad.com
  • उत्तराखण्ड
    • देहरादून
    • गढ़वाल
    • कुमाऊँ
  • उत्तर प्रदेश
    • लखनऊ
    • कानपुर
    • आगरा
    • नोएडा
    • ग्रेटर नोएडा
    • गाजियाबाद
  • दिल्ली-NCR
    • ग्रेटर नोएडा
    • नोएडा
    • गाजियाबाद
    • गुरुग्राम
    • फरीदाबाद
  • राजनीति
  • देश-विदेश
  • एजुकेशन/जॉब्स
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
    • मनोरंजन
    • फोटो गैलरी
  • ज्योतिष
  • पर्यटन
  • स्पेशल स्टोरी
Home उत्तराखण्ड उत्तराखंड में ‘भू कानून’ लागू करने के लिए सीएम धामी ले सकते...
  • उत्तराखण्ड

उत्तराखंड में ‘भू कानून’ लागू करने के लिए सीएम धामी ले सकते हैं बड़ा फैसला, कमेटी ने सौंपी कमेटी ने 80 पेज की रिपोर्ट

By
DBS Reporter
-
September 5, 2022
0
930
'Land Law' in Uttarakhand

‘Land Law’ in Uttarakhand: उत्तराखंड में करीब एक साल पहले ‘भू कानून’ लागू करने के लिए स्थानीय लोगों ने व्यापक स्तर पर आंदोलन चलाया था। ‌‌ राजधानी देहरादून समेत कई शहरों में लोगों ने बैनर, पोस्टर लेकर रैली भी निकाली थी। वहीं देवभूमि के लोगों ने भू कानून लागू करने के लिए सोशल मीडिया पर भी काफी समय तक मुहिम भी चलाई थी। राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भू कानून को लेकर एक 5 सदस्यीय कमेटी का भी गठन किया था। इसी साल फरवरी महीने में विधानसभा चुनाव के दौरान भू कानून का मुद्दा भी छाया रहा।

उत्तराखंड में भू कानून को लेकर बनाई गई कमेटी ने आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड में भू कानून को लेकर जल्द ही फैसला लेंगे। भू-कानून के परीक्षण व अध्ययन को पूर्व मुख्य सचिव सुभाष कुमार की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति की बैठक में कानून को सख्त बनाने की संस्तुति को अंतिम रूप दिया गया। गौरतलब है कि भू कानून समिति में अध्यक्ष समेत कुल पांच सदस्य हैं। इसमें समिति के अध्यक्ष पूर्व मुख्य सचिव सुभाष कुमार हैं। सदस्य के तौर पर दो रिटायर्ड आईएएस अधिकारी डीएस गर्ब्याल और अरुण कुमार ढौंडियाल शामिल हैं। डेमोग्राफिक चेंज होने की शिकायत करने वाले अजेंद्र अजय भी इसके सदस्य हैं। उधर, सदस्य सचिव के रूप में राजस्व सचिव आनंद वर्धन फिलहाल इस समिति में हैं।

बता दें कि साल 2000 में जब उत्तराखंड को उत्तर प्रदेश से अलग कर अलग संस्कृति, बोली-भाषा होने के दम पर एक संपूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया था। उस समय कई आंदोलनकारियों समेत प्रदेश के बुद्धिजीवियों को डर था कि प्रदेश की जमीन और संस्कृति भू माफियाओं के हाथ में न चली जाए, इसलिए सरकार से एक भू-कानून की मांग की गई। और उत्तराखंड राज्य में भी भू कानून बना था। 09 नवंबर 2000 को राज्य की स्थापना के बाद सन 2002 में एक प्रावधान किया गया था कि अन्य राज्यों के लोग उत्तराखंड में सिर्फ 500 वर्ग मीटर तक जमीन खरीद सकते थे। उसके बाद 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जनरल बीसी खण्डूरी के समय में यह सीमा घटाकर 250 वर्गमीटर कर दी गई। इसका मतलब किसी भी राज्य से आया व्यक्ति उत्तराखंड में अधिकतम 250 वर्ग मीटर की कृषि जमीन ही खरीद सकता था।

परन्तु 06 अक्टूबर 2018 को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की सरकार एक नया अध्यादेश ले कर आयी जिसके मुताबिक “उत्तरप्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि सुधर अधिनियम” 1950 में संशोधन का विधेयक पारित किया गया। इसमें धारा 143 (क) और धारा 154(2) जोड़ी गई जिसके तहत पहाड़ों में भूमि खरीद की अधिकतम सीमा को ही समाप्त कर दिया गया। निवेश और उद्योगों को बढ़ावा देने के नाम पर लाये इस संशोधन से अन्य राज्य का व्यक्ति कितनी भी जमीन खरीद सकता था। जिसने कॉर्पोरेट के नाम पर, इन्वेस्टमेंट के नाम पर, निवेश के नाम पर, भू कानून तहस-नहस कर दिया। जिसके बाद से उत्तराखंड के कुछ जागरूक लोगों द्वारा एक सख्त भू-कानून की मांग लगातार की जा रही है। लोगोंकी मांग है कि एक पूरे राज्य भर के लिए भू-कानून होना चाहिए जिससे भूमाफिया दूर रहें।

सभी हितधारकों से सुझाव लेकर गहन विचार विमर्श कर 80 पृष्ठ में तैयार की रिपोर्ट

समिति ने राज्य के हितबद्ध पक्षकारों, विभिन्न संगठनों, संस्थाओं से सुझाव आमंत्रित कर गहन विचार – विमर्श कर लगभग 80 पृष्ठों में अपनी रिपोर्ट तैयार की है। इसके अलावा समिति ने सभी जिलाधिकारियों से प्रदेश में अब तक दी गई भूमि क्रय की स्वीकृतियों का विवरण मांग कर उनका परीक्षण भी किया।

समिति की प्रमुख संस्तुतियां

  • वर्तमान में जिलाधिकारी द्वारा कृषि अथवा औद्यानिक प्रयोजन हेतु कृषि भूमि क्रय करने की अनुमति दी जाती है। कतिपय प्रकरणों में ऐसी अनुमति का उपयोग कृषि/औद्यानिक प्रयोजन न करके रिसोर्ट/ निजी बंगले बनाकर दुरुपयोग हो रहा है। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में लोग भूमिहीन हो रहें और रोजगार सृजन भी नहीं हो रहा है।
  • समिति ने संस्तुति की है कि ऐसी अनुमतियां जिलाधिकारी स्तर से ना दी जाऐं। शासन से ही अनुमति का प्रावधान हो।
  • वर्तमान में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी के उद्योगों हेतु भूमि क्रय करने की अनुमति जिलाधिकारी द्वारा प्रदान की जा रही है। हिमांचल प्रदेश की भाँति ही ये अनुमतियाँ, शासन स्तर से न्यूनतम भूमि की आवश्यकता के आधार पर, प्राप्त की जाएं।
  • वर्तमान में राज्य सरकार पर्वतीय एवं मैदानी में औद्योगिक प्रयोजनों, आयुष, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, उद्यान एवं विभिन्न प्रसंस्करण, पर्यटन, कृषि के लिए 05 एकड़ से ज्यादा भूमि आवेदक संस्था/फर्म/ कम्पनी/ व्यक्ति को उसके आवेदन पर दे सकती है।
  • उपरोक्त प्रचलित व्यवस्था को समाप्त करते हुए हिमाचल प्रदेश की भांति न्यूनतम भूमि आवश्यकता (Essentiality Certificate) के आधार पर दिया जाना उचित होगा।
  • केवल बड़े उद्योगों के अतिरिक्त 4-5 सितारा होटल / रिसॉर्ट, मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वोकेशनल/प्रोफेशनल इंस्टिट्यूट आदि को ही Essentiality Certificate के आधार भूमि क्रय करने की अनुमति शासन स्तर से दी जाए। अन्य प्रयोजनों हेतु लीज पर ही भूमि उपलब्ध कराने की व्यवस्था लाने की समिति संस्तुति करती है।
  • वर्तमान में, गैर कृषि प्रयोजन हेतु खरीदी गई भूमि को 10 दिन में D.M. धारा- 143 के अंतर्गत गैर कृषि घोषित करते हुए खतौनी में दर्ज करेगा।
  • परन्तु क्रय अनुमति आदेश में 2 वर्ष में भूमि का उपयोग निर्धारित प्रयोजन में करने की शर्त रहती है। यदि निर्धारित अवधि में उपयोग ना करने पर या किसी अन्य उपयोग में लाने/विक्रय करने पर राज्य सरकार में भूमि निहित की जाएगी, यह भी शर्त में उल्लखित रहता है।

यदि 10 दिन में गैर कृषि प्रयोजन हेतु क्रय की गई कृषि भूमि को “गैर कृषि” घोषित कर दिया जाता है, तो फिर यह धारा-167 के अंतर्गत राज्य सरकार में (उल्लंघन की स्थिति में) निहित नहीं की जा सकती है। अतः नई उपधारा जोङते हुए उक्त भूमि को पुनः कृषि भूमि घोषित करना होगा तत्पश्चात उसे राज्य सरकार में निहित किया जा सकता है।

  • कोई व्यक्ति स्वयं या अपने परिवार के किसी भी सदस्य के नाम बिना अनुमति के अपने जीवनकाल में अधिकतम 250 वर्ग मीटर भूमि आवासीय प्रयोजन हेतु खरीद सकता है ।
  • समिति की संस्तुति है कि परिवार के सभी सदस्यों के नाम से अलग अलग भूमि खरीद पर रोक लगाने के लिए परिवार के सभी सदस्यों के आधार कार्ड राजस्व अभिलेख से लिंक कर दिया जाए।
  • राज्य सरकार ‘भूमिहीन’ को अधिनियम में परिभाषित करे। समिति का सुझाव है कि पर्वतीय क्षेत्र में न्यूनतम 5 नाली एवं मैदानी क्षेत्र में 5 एकड़ न्यूनतम भूमि मानक भूमिहीन’ की परिभाषा हेतु औचित्यपूर्ण होगा।
  • भूमि जिस प्रयोजन के लिए क्रय की गई, उसका उललंघन रोकने के लिए एक जिला / मण्डल / शासन स्तर पर एक टास्क फ़ोर्स बनायीं जाए। ताकि ऐसी भूमि को राज्य सरकार में निहित किया जा सके।
  • सरकारी विभाग अपनी खाली पड़ी भूमि पर साइनबोर्ड लगाएं।
  • कतिपय प्रकरणों में कुछ व्यक्तियों द्वारा एक साथ भूमि क्रय कर ली जाती है तथा भूमि के बीच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमि पड़ती है तो उसका रास्ता रोक दिया जाता है। इसके लिए Right of Way की व्यवस्था।
  • विभिन्न प्रयोजनों हेतु जो भूमि खरीदी जायेगी उसमें समूह ग व समूह ‘घ’ श्रेणीयो में स्थानीय लोगो को 70% रोजगार आरक्षण सुनिश्चित हो। उच्चतर पदों पर योग्यतानुसार वरीयता दी जाए।
  • विभिन्न अधिसूचित प्रयोजनों हेतु प्रदान की गयीं अनुमतियों के सापेक्ष आवेदक इकाइयों/ संस्थाओं द्वारा कितने स्थानीय लोगों को रोजगार दिए गए, इसकी सूचना अनिवार्य रूप से शासन को उपलब्ध कराने की व्यवस्था हो
  • वर्तमान में भूमि क्रय करने के पश्चात भूमि का सदुपयोग करने के लिए दो वर्ष की अवधि निर्धारित है और राज्य सरकार को अपने विवेक के अनुसार इसे बढ़ाने का अधिकार दिया गया है। इसमें संशोधन कर विशेष परिस्थितयों में यह अवधि तीन वर्ष (2 + 1 = 3) से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • पारदर्शिता हेतु क्रय- विक्रय, भूमि हस्तांतरण एवं स्वामित्व संबंधी समस्त प्रक्रिया Online हो। समस्त प्रक्रिया एक वेबसाइट के माध्यम से पब्लिक डोमेन में हो।
  • प्राथमिकता के आधार पर सिडकुल/ औद्योगिक आस्थानों में खाली पड़े औौद्योगिक प्लाट्स/ बंद पड़ी फैक्ट्रियों की भूमि का आबंटन औद्योगिक प्रयोजन हेतु किया जाए।
  • प्रदेश में वर्ष बन्दोबस्त हुआ है। जनहित/ राज्य हित में भूमि बंदोबस्त की प्रक्रिया प्रारंभ की जाए।
  • भूमि क्रय की अनुमतियों का जनपद एवं शासन स्तर पर नियमित अंकन एवं इन अभिलेखों का रख-रखाव ।
  • धार्मिक प्रयोजन हेतु कोई भूमि क्रय/ निर्माण किया जाता है तो अनिवार्य रूप से जिलाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर शासन स्तर से निर्णय लिया जाए।
  • राज्य में भूमि व्यवस्था को लेकर जब भी कोई नया अधिनियम/ नीति / भूमि सुधार कार्यक्रम चलायें जायें तो राज्य हितबद्ध पक्षकारों / राज्य की जनता से सुझाव अवश्य प्राप्त कर लिए जाएँ।
  • नदी – नालों, वन क्षेत्रों, चारागाहों, सार्वजनिक भूमि आदि पर अतिक्रमण कर अवैध कब्जे /निर्माण / धार्मिक स्थल बनाने वालों के विरुद्ध कठोर दंड का प्रावधान हो। संबंधित विभागों के अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई का प्रावधान हो। ऐसे अवैध कब्जों के विरुद्ध प्रदेशव्यापी अभियान चलाया जाए।

 

  • TAGS
  • CM Dhami can take a big decision to implement land law in Uttarakhand
  • committee submitted 80 page report
  • land-law-committee-submitted-report-to-cm-dhami
  • strict land law will be implemented in Uttarakhand soon
  • उत्तराखंड में जल्द लागू होगा सख्त भू-कानून
  • उत्तराखंड में भू कानून लागू करने के लिए सीएम धामी ले सकते हैं बड़ा फैसला
  • कमेटी ने 80 पेज की रिपोर्ट सौंपी
Previous articleराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उत्तराखंड के 2 शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से किया सम्मानित
Next articleशिक्षक दिवस पर राजकीय महाविद्यालय शीतलाखेत,अल्मोड़ा में भव्य रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन
DBS Reporter
DBS Reporter
http://www.devbhoomisamvad.com

RELATED ARTICLESMORE FROM AUTHOR

संस्कृतिकर्मी, रंगकर्मी, शिक्षाविद प्रो. डी आर पुरोहित इंद्रमणि बडोनी सम्मान से नवाजे गए

चमोली टनल हादसा: भूस्खलन के दौरान सुरंग फंसे 10 श्रमिकों की मौत, 12 श्रमिक सुरक्षित निकाले गए, 117 घंटे बाद रेस्क्यू ऑपरेशन समाप्त

Two-storey house collapses in Mahar village

पौड़ी गढ़वाल के इस गांव में भारी बारिश से दो मंजिला मकान ढहा, मलबे में दबे चार लोग, 3 के शव बरामद, एक महिला...

Recent Posts

  • संस्कृतिकर्मी, रंगकर्मी, शिक्षाविद प्रो. डी आर पुरोहित इंद्रमणि बडोनी सम्मान से नवाजे गए
  • चमोली टनल हादसा: भूस्खलन के दौरान सुरंग फंसे 10 श्रमिकों की मौत, 12 श्रमिक सुरक्षित निकाले गए, 117 घंटे बाद रेस्क्यू ऑपरेशन समाप्त
  • पौड़ी गढ़वाल के इस गांव में भारी बारिश से दो मंजिला मकान ढहा, मलबे में दबे चार लोग, 3 के शव बरामद, एक महिला को बचाया
  • 16वें महाकौथिग-2026 की कार्यकारिणी का गठन, इंद्रा चौधरी अध्यक्ष निर्वाचित; इस बार नौ दिनों तक सजेगा महाकौथिग मेला
  • स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परेड ग्राउंड में किया ध्वजारोहण

EDITOR PICKS

POPULAR POSTS

Guru Tegh Bahadur shahid divas

यूपी में भी 24 नवंबर 2022 के अवकाश में बदलाव, अब...

November 23, 2022
Garhwali Brahmin

गढ़वाल की 75 ब्राह्मण जातियों का इतिहास, यहाँ पढ़ें

February 8, 2022
CBSE Re-verification- Revaluation date

CBSE बोर्ड परीक्षा में मिले अंकों से असंतुष्ट छात्रों को रीचेकिंग...

May 13, 2023

POPULAR CATEGORY

  • उत्तराखण्ड11623
  • गढ़वाल6554
  • देहरादून3914
  • दिल्ली-एनसीआर2740
  • देश-विदेश2708
  • ग्रेटर नोएडा1902
  • कुमाऊँ1887
  • एजुकेशन/ जॉब्स1563
  • नोएडा839
ABOUT US
FOLLOW US
  • About Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy
©