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कोरोना संकट काल में बच्चों की स्कूल फीस माफ कर मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत देने की मांग

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वैश्विक महामारी का रूप ले चुके कोरोना वायरस की चपेट में आज दुनियाभर के लाखों लोग आ चुके हैं। जिससे हमारा प्रदेश एवं हमारा देश भी अछूता नहीं रहा है। भारत में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए बीते मार्च महीने से देशभर में लॉकडाउन किया हुआ है। लॉकडाउन की वहज से कई लोगों की नौकरियां चली गई हैं तो कई लोगों के काम धन्धे चौपट हो गए हैं। संकट की इस घड़ी में मध्यम वर्गीय परिवारों को बच्चों की स्कूल फ़ीस चुकाना भारी पड़ रहा है। लॉकडाउन के चलते आज हर कोई परेशान है। कामकाज ठप पड़ा है, ऐसे में स्कूलों की तरफ से फीस जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है। इसी को लेकर ग्रेटर नोएडा-नोएडा-गाजियाबाद अभिभावक महासंघ के पदाधिकारियों प्रकाश कोटिया, हेम चंद तिवारी, अनिल पुंडीर, योगेश भगौर, चन्जीत, दुर्गेश, रजनीश, अमित अरोड़ा आदि ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर लॉकडाउन पीरियड में बच्चों की स्कूल फीस माफ करने की मांग की है। इसके अलावा इस संबंध में महासंघ के पदाधिकारी आगामी शनिवार को जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपेंगे तथा आगामी 14 जून को क्षेत्र में प्राइवेट स्कूलों की फीस माफी की मांग को लेकर एक शांतिपूर्ण  मार्च निकाला जाएगा।

हेम चंद तिवारी का कहना है कि वर्तमान में मध्यमवर्गीय परिवारों द्वारा कोरोनावायरस के चलते समय-समय पर सरकार द्वारा दिए गए आदेशों का पालन भी किया गया। साथ ही मजदूरों के पलायन के वक्त उन्हें भोजन पानी एवं अन्य जरूरी साधनों का भी सहयोग भी मध्यम वर्ग के परिवारों द्वारा किया गया। इसके अलावा प्रधानमंत्री राहत कोष, मुख्यमंत्री राहत कोष एवं जिलाधिकारी राहत कोष में भी मध्यम वर्गीय परिवारों द्वारा अपने सामर्थ्य के अनुसार सहयोग राशि भी जमा कराई गई। परंतु इतना सब करने के बावजूद भी सरकारों द्वारा मध्यमवर्गीय परिवारों की हितों की रक्षा की अनदेखी की गई एवं सरकार द्वारा घोषित राहत में कहीं भी मध्यम वर्गीय परिवारों का कोई भी जिक्र नहीं किया गया। उन्होंने पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि वर्तमान में देश के सभी मध्यम वर्ग के परिवार घोर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं बहुत सारे लोगों की नौकरियां भी चली गई है आय के सारे स्रोत बंद होते जा रहे हैं ऐसी स्थिति में स्कूलों द्वारा परिवारों को प्रताड़ित किया जा रहा है कि बच्चों की फीस समय पर ना भरने के कारण बच्चों को स्कूल से निष्कासित करने की धमकियां भी दी जा रही है। अतः अगर सरकार द्वारा मध्यम वर्गीय परिवारों की चिंता को ध्यान में रखते हुए अप्रैल से जून माह तक की फीस माफी की घोषणा की जाए तो मध्यमवर्गीय परिवारों को थोड़ी राहत मिलेगी एवं साथ ही बच्चों का भविष्य भी खराब नहीं होगा।

 

इतना आसान नहीं ग्रामीण पत्रकार जगमोहन डांगी होना

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पहाड़ के जीवन परिवेश से लेखन और पत्रकारिता के क्षेत्र में कई ऐसे नाम जुड़े हैं। जिन्होंने ताउम्र अपनी कलम के माध्यम से ईमानदारी के साथ ऐसे जीवन को उकेरा है। जो वास्तव में पहाड़ जैसे तटस्थ है। जो तमाम आपदा-विपदाओं के बाद भी अपने मार्ग से हटता नहीं बल्कि संघर्षों के मायने तलाशते हुए आगे बढ़ जाते है।

पहाड़ के परिपेक्ष में यदि बात की जाए तो आज ग्रामीण प्रवेश में पत्रकारिता के क्षेत्र से कई ऐसे नाम जुड़े हैं। जो पहाड़ के जनमानस की आवाज़ बन उस आवाज़ के लिए संघर्ष ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि पहाड़ की माटी से जुड़ी हर छोटी-बड़ी समस्याओं को सत्ता के गलियारों से लेकर उन्हें हल करने वाले शासन-प्रशासन की दहलीज़ तक पूरी मज़बूती के साथ पहुँचाते भी है।

इसी लीक से जुड़ा नाम है ग्रामीण पत्रकार जगमोहन डांगी का, जो पहाड़ की विचारधारा को जानते-समझते हुए पहाड़ के लोगों की आवाज़ को पूरी तटस्थता के साथ उकेरते हुए उनके लिए लड़ते भी है। इसीलिए उन्हें ग्रामीण पत्रकार के नाम से जाना जाता है। उन्होंने अपने जीवन को संघर्षों के साथ जिया हैं और जी भी रहे है। वह गिर कर संभलने में विश्वास रखते हैं और संघर्षों को खुद का साथी।

19 जुलाई 1971 को पौड़ी गढ़वाल के कल्जीखाल ब्लॉक के अंतर्गत डांगी गाँव में जन्मे जगमोहन डांगी ने अपने गाँव का नाम रोशन करने के लिए अपने नाम के साथ डांगी जोड़ा है। जगमोहन डांगी को राष्ट्रीय स्तर की सामाजिक सरोकारों के प्रति समर्पित और निर्भीक पत्रकारिता के लिए उत्तर भारत श्रमजीवी पत्रकार परिषद की तरफ से कोरोना योद्धा सम्मान पत्र से नवाजा गया है। इसी के साथ डांगी जी को पत्रकारिता के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कार्य करने के लिए कई सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। गढ़वाली पाक्षिक पत्र छुयांल एवं हिमालयन न्यूज से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले जगमोहन डांगी, लाईस बिल्डिंग, हिंदी भारत देश हमारा, जयंत समाचार, व्हाइस ऑफ़ माउंटेन और तमाम पत्र-पत्रिकाओं/चैनलों में सेवा दे चुके हैं। वर्तमान में जगमोहन डांगी उत्तराखंड के अग्रणी न्यूज़पोर्टल देवभूमि संवाद से जुड़े हैं और देवभूमि संवाद के माध्यम से अपने क्षेत्र की समस्याओं को उजागर कर शासन/प्रशासन तक पहुंचा रहे हैं ।

पत्रकारिता के अलावा सामाजिक पटल पर भी जगमोहन डांगी की उपस्थिति हमेशा से अग्रणीय रही हैं। गरीब, पिछड़ा, असहाय, दिव्यांग, बृद्ध जनों की सेवा के लिए समर्पित 20 सालों से स्वयं दिव्यांग अस्वस्थ शारीरिक दुर्बल होने के बावजूद भी डांगी हर समय सामाजिक हितों के लिए तत्पर रहते है। समाजिक संस्था युवा संगठन समिति का गठन कर डांगी क्षेत्र में संस्था के माध्यम से गरीब एवं जरूरतमंद लोगों के हितों के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य कर रहे है।

अपने क्षेत्र में विभिन समाजिक संस्थाओं के अध्यक्ष/ मीडिया प्रभारी के अलावा सहकारी साधन समिति के कई सालों से अध्यक्ष हैं, जिसके माध्यम से डांगी पहाड़ के सामाजिक पटल पर सेवा भाव का नया अध्याय लिख रहे है। पौड़ी गढ़वाल की मनियाँरस्यू पट्टी के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली, पानी और आमजन के जीवन से जुड़ी छोटे-छोटे मुद्दों की आवाज़ बन उनके लिए लड़ता एक सशक्त नाम है जगमोहन डांगी, देवभूमि संवाद कलम के इस सिपाही के उज्वल भविष्य की कामना करता है।

 

उत्तराखंड मे आज दोपहर में आये 60 नए कोरोना पॉजिटिव केस, 1145 पहुंची मरीजों की संख्या

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Coronavirus Update uttarakhand :  उत्तराखंड में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. आज गुरुवार दोपहर तक प्रदेश में कोरोना वायरस के 60  नए मामले सामने आये हैं. स्वास्थ्य विभाग द्वारा दोपहर 02 बजे जारी हेल्थ बुलेटिन में 60 नए लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई है. आज अब तक मिले कुल 60 कोरोना संक्रमितों में से सबसे ज्यादा 35 लोग अकेले देहरादून जिले से हैं. जबकि 10-10 कोरोना संक्रमित लोग नैनीताल और टिहरी जनपदों हैं, इसके अलावा 04 पौड़ी गढ़वाल से तथा 01 कोरोना पॉजिटिव उत्तरकाशी जिले से है. जिसके बाद अब प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों को आंकड़ा बढ़कर 1145 पहुँच गया है. इसके अलावा 286 लोग ठीक होकर घर भी लौटे हैं. जबकि 10 लोगों की मौत हो चुकी है.

आज मिले  कोरोना संक्रमितों में से ज्यादातर लोग महाराष्ट्र (मुम्बई) से  हैं

उत्तराखंड में अब तक कोरोना covid-19 के जिलेवार मामले

जनपद कोरोना के मरीज
नैनीताल310
देहरादून323
टिहरी101
उधमसिंह नगर83
हरिद्वार85
पौड़ी42
अल्मोड़ा63
पिथौरागढ़28
चमोली25
उत्तरकाशी22
बागेश्वर21
चंपावत33
रुद्रप्रयाग8
कुल1145

 

बरसात के मौसम में फलों के पौधों का रोपण, उद्यान लगाने से पहले कुछ बातों का रखें ध्यान

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बरसात के मौसम में फल पौधों का रोपण

बरसात के मौसम यानी जुलाई-अगस्त में मुख्यत: आम, अमरूद, अनार, आंवला, लीची, कटहल, अंगूर तथा नींबू वर्गीय फल पौधों का रोपण किया जाता है। उद्यान लगाने से पहले किन बातों को ध्यान में रखा जाना आवश्यक है इसके बारे में विस्तृत जानकारी दे रहे हैं कृषि एवं बागवानी के विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र प्रसाद कुकसाल।

स्थल का चुनाव

1.वर्षाकालीन फलदार पौधों के बगीचे समुद्रतल से 1500 मी॰ ऊंचाई तक लगाये जा सकते हैं ढाल का भी ध्यान रखें पूर्व व उत्तरी ढाल वाले स्थान पश्चमी व दक्षिणी ठाल वाले स्थानौ से ज्यादा ठंडे होते हैं जो क्षेत्र हिमालय के पास हैं वहां पर आम, अमरूद, लीची के पौधों का रोपण व्यवसायिक दृष्टि से लाभकर नहीं रहते हैं, ऐसे स्थानों पर नींबू वर्गीय फलदार पौधों के उद्यान लगायें।
2. उद्यान लगाने से पूर्व यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जिस फल की ज्यादा मांग हो उसी फल के उद्यान लगाये जायें।
3. उद्यान सडक के पास होना चाहिये यदि यह सम्भव न हो तो यह आवश्यक है कि उद्यान में पहुंचने के लिए रास्ता सुगम हो ताकि फलों का ढुलान सुगमता से किया जा सके।
4. सिंचाई की उपयुक्त व्यवस्था हो।
5. कार्य हेतु मजदूर आसानी से उपलब्ध होते हों।
6. उद्यान की सुरक्षा हेतु घेर बाड़ की उचित व्यवस्था हो।

भूमि का चुनाव एवं मृदा परीक्षण

फलदार पौधे पथरीली भूमि को छोड़कर सभी प्रकार की भूमि में पैदा किये जा सकते हैं। परन्तु जीवाँशयुक्त बलुई दोमट भूमि जिसमें जल निकास की उचित व्यवस्था हो सर्वोत्तम रहती है। जिस भूमि में उद्यान लगाना है उस भूमि का मृदा परीक्षण अवश्य कराएं जिससे मृदा में कार्वन की मात्रा, पीएच मान (पावर औफ हाइड्रोजन या पोटेंशियल हाइड्रोजन) तथा चयनित भूमि में उपलव्ध पोषक तत्वों की जानकारी मिल सके।

यदि कार्वन की मात्रा 0.6 से कम है तो जंगल की या किसी बड़े पेड़ के नीचे की ऊपरी सतह की मिट्टी खुरच कर गड्ढे भरने के बाद ऊपर से पौधों के थावलौं में डाल लें। पीएच मान मिट्टी की अम्लीयता व क्षारीयता का एक पैमाना है यह पौधों की पोषक तत्वों की उपलब्धता को प्रभावित करता है यदि मिट्टी का पी.एच. मान कम (अम्लीय) है तो मिट्टी में चूना या लकड़ी की राख मिलायें यदि मिट्टी का पीएच मान अधिक (क्षारीय) है तो मिट्टी में कैल्सियम सल्फेट, (जिप्सम) मिलायें। भूमि के क्षारीय व अम्लीय होने से मृदा में पाये जाने वाले लाभ दायक जीवाणुओं की क्रियाशीलता कम हो जाती है साथ ही हानीकारक जीवाणुओ/फंगस में बढ़ोतरी होती है साथ ही मृदा में उपस्थित सूक्ष्म व मुख्य तत्त्वों की घुलनशीलता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। अधिकतर फल पौधों के लिए 5.5 – 7.5 के पीएच की भूमि उपयुक्त रहती है।

क्षारीय व कम उपजाऊ वाली भूमि में अमरूद तथा आंवले के पौधे लगाये जा सकते हैं

जातियों का चुनाव

मुख्य फलों की उन्नतिशील किस्में

(अ) आम- बाम्बे ग्रीन, बाम्बे यलो, दशहरी, लंगडा, चौसा। बौनी-आम्रपाली, मल्लिका।
पहाड़ी क्षेत्रों में यथास्थान (In situ grafting ) विधि से आम के बाग तैयार करें।
(ब) अमरूद-लखनऊ- 49, इलाहाबादी सफेदा।
(स) लीची– कलकतिया, रोजसेन्टेड, वेदाना।
(द) अनार-गणेश, ढोलका, वेदाना।
(य) आंवला-हाथी झूल, चकय्या, एन-7, एन-6.कृष्णा, कंचन।
(र) अंगूर– परलैट, हिमराड, पूसा सीडलेस।
(ल) कटहल

कटहल के बीजू पौधों का ही रोपण किया जाता है।

अगस्त सितम्बर माह में कटहल के फल पक जाते हैं पके फलों से बीज निकाल कर पौलीथीन बैग में बो कर भी कृषक कटहल के पौधे तैयार कर सकते हैं।
1- नींबू वर्गीय फल पौध
1- माल्टा कामन, जाफा, ब्लडरेड।
2- मेन्डरिन संतरा– श्रीनगर संतरा, हिल ओरेन्ज, किन्नो।
माल्टा की अपेक्षा संतरा (नारंगी) की बाजार में अधिक मांग रहती है इसलिए संतरे के बाग लगाने चाहिए।
3-नींबू– कागजी, कागजी कलां, पन्त लेमन, पहाड़ी नींबू।

रेखांकन तथा गढ्ढों की खुदाई

पौधों के सही विकास व अधिक फलत तथा अच्छे गुणों वाले फल प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि पौधों को निश्चित दूरी पर लगाया जाय।
विभिन्न फलदार पौधों के लिए लाइन से लाइन तथा पौधों से पौध की दूरी
1-आम, कटहल, आंवला 10 x 10 मी॰
2- लीची, बेर 8 x 8 मी॰
3- अमरूद, नींबू वर्गीय फल 6 x 6 मी॰
4- अंगूर – 3 x 3 मी॰

पौध लगाने से पूर्व  रेखांकन कर उचित दूरी पर 1x1x1 मी॰ आकार के गढ्ढे गर्मियों (मई – जून) में खोदकर 15 से 20 दिनों के लिए खुला छोड देना चाहिए ताकि सूर्य की तेज गर्मी से कीडे़ मकोड़े मर जाय। गड्डा खोदते समय पहले ऊपर की 6″तक की मिट्टी खोद कर अलग रख लेते हैं इस मिट्टी में जींवास अधिक मात्रा में होता है गड्डे भरते समय इस मिट्टी को पूरे गड्डे की मिट्टी के साथ मिला देते हैं इसके पश्चात एक भाग अच्छी सडी गोबर की खाद या कम्पोस्ट जिसमें ट्रायकोडर्मा मिला हुआ हो को भी मिट्टी में मिलाकर गढ्ढों को जमीन की सतह से लगभग 20से 25 से॰मी॰ ऊंचाई तक भर देना चाहिए ताकि पौध लगाने से पूर्व गढ्ढों की मिट्टी ठीक से बैठ कर जमीन की सतह तक आ जाये।

पौधों का चुनाव

पौधे क्रय करते समय निम्न बातों को ध्यान में रखना चाहिए।
1- सही जाति के पौधे हों।
2- पौधें स्वस्थ एवं मजबूत हों।
3- कलम का जुड़ाव ठीक हो।
4- पौधों की वृद्वि एवं फैलाव मध्यम श्रेणी का हों।
5- चश्मा (कलम) मूलवृंत पर 15 से 20 से॰मी॰ उँचाई पर लगा हों।
6- पौधों की उम्र 1 वर्ष से कम तथा 2 वर्ष से अधिक ना हो।
7- पौधों की पिण्डी सुडौल हो तथा मुख्य जड़ न कटी हो।
पौध विश्वसनीय स्थान जैसे राजकीय संस्था, कृषि विश्वविद्यालय अथवा पंजीकृत पौधालयों से ही क्रय किया जाय।

पौध लगाने का समय तथा विधि

वर्षाकालीन फल पौधों के लगाने का उपयुक्त समय मानसून की वर्षा शुरू होने पर करना उचित रहता है अर्थात माह जुलाई तथा अगस्त में पौधों का रोपण करना चाहिए पौधे लगाते समय निम्न बातों पर ध्यान देना चाहिए।
1- पौधों को गढ्ढे के मध्य में लगाना चाहिए।
2- पौधों को एकदम सीधा लगाना चाहिए।
3- पौधों को मिट्टी में इतना दबाया जाय जितना पौधालय में दबा है।
4- यह भी ध्यान रखा जाय कि किसी भी दशा में पौधों की कलम के जोड़ वाला भाग मिट्टी से ना ढकने पायें।
5- पौध लगाने के बाद मिट्टी की पिण्डी के चारों ओर से अच्छी तरह से दबाना चाहिए ध्यान रहे पौधे की पिन्डी न टूटने पाय तत्पश्चात किसी सीधी लकड़ी से पौधों को सहारा देना चाहिए।
6-लीची का नया बाग लगाने हेतु गड्ढ़ों को भरते समय जो मिट्टी व खाद आदि का मिश्रण बनाया जाता है उसमे पुराने लीची के बाग़ कि मिट्टी अवश्य मिला देना चाहिए क्योंकि लीची कि जड़ों में एक प्रकार की सहजीवी कवक जिसे माइकोराइजा कहते है पाई जाती है । यह कवक पौधों की जड़ों में रहता है तथा पौधों को फोसफोरस बोरोन व जिंक पोषक तत्व भूमि से उपलब्ध कराने है जिससे पौधे अच्छी प्रकार – फलते फूलते हैऔर नए पौधे में भी कवक अथवा लीची के बाग़ कि मिट्टी मिलाने से मृत्युदर कम हो जाती है ।

बाद की देखभाल

1- पौधे लगाने के तुरन्त बाद सिंचाई कर देनी चाहिए। यदि वर्षा न हो तो आवश्यकतानुसार पौधे की सिंचाई करते रहना चाहिए।
2- पौधे के मूलवृतों से निकले कल्लों को समय-समय पर तोड़ते रहना चाहिए।
नींबू वर्गीय पौधों में अनियमित तथा दोष पूर्ण कांट छांट के कारण एका एक पौधौं के मध्य से कोमल ,हरे चपटे , चौड़ी पत्तीके तथा अति शीघ्र बढ़ने वाली शाखाएं निकलती है जिन्हें जल प्रारोह(water shoots) कहते हैं इन शाखाओं को शीघ्र निकाल देना चाहिए।
3- जहां पर पानी की कमी हो तो नमी सुरक्षित रखने के लिए सूखी घास या पत्तियों से थावलों में अवरोध परत लगा देनी चाहिए।
4-शुरू के बर्षौ में पौधों को ठंड/पाला से बचाव के उपाय करने चाहिए।

हाल ही में रिपेयर हुये पौड़ी-टेका-कांसखेत-घंड़ियाल-मोटरमार्ग पर फिर से उखड़ने लगी है सड़क, भ्रष्टाचार के लग रहे हैं आरोप

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Pauri-Teka-Kansakhet-Ghandiyal road

पौड़ी गढ़वाल : यूँ तो पहाड़ों की ज्यादातर सड़कों का हाल किसी से छुपा हुआ नहीं हैं। परन्तु जब जनपद के व्यावसायिक दृष्टि से जुड़े मुख्य बाजारों/शहरों को आपस में जोड़ने वाली सड़क खस्ताहाल हो तो चिंता का विषय बन जाता है। जिला मुख्यालय पौड़ी से टेका-कांसखेत-घंड़ियाल-सतपुली मोटरमार्ग हाल ही में रिपेयर (डामरीकरण) होने के बावजूद भी जगह जगह उखड़ने लगा है।

उल्लेखनीय है कि बरसों पहले बना पौड़ी-टेका-कांसखेत-घंड़ियाल-सतपुली मोटरमार्ग को साल 2001-02 में पक्का (सीमेंट/कोलतार) किया गया था। परन्तु पिछले कुछ वर्षों से यह मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था। सड़क पर जगह-जगह गड्डे बन गए थे। बीते दिसम्बर माह में इसको लेकर कांग्रेस आईटी सेल के जिलाध्यक्ष नितिन रावत द्वारा जिलाधिकारी पौड़ी के माध्यम से विभाग को अवगत कराया गया था। जिसके बाद इस मोटरमार्ग पर डामरीकरण का कार्य शुरू हो चुका है।

नितिन रावत ने बताया कि इसबीच बहुत समय से स्थानीय लोगों के द्वारा सूचना मिल रही थी कि सड़क का कार्य अच्छा नहीं है सड़क अभी से उखड़नी शुरू हो चुकी है। परन्तु लोकडाउन होने की वजह से कहीं निकलना संभव नहीं था। काफी समय के बाद बुधवार को जब वह घंड़ियाल से पौड़ी जा रहे थे तो रास्ते में टेका के पास पूरी रोड जहां से डामरीकरण का कार्य अभी कुछ दिन पहले ही हुआ है कुछ दिन बीतने पर ही सड़क अभी से उखड़ने लग गई है। इसकी शिकायत उन्होंने संबंधित विभाग के अधिशासी अभियंता को दे दी है।

इस सड़क पर प्रतिदिन कई वाहनों की आवाजाही होती रहती है भारी भरकम वाहन भी इस सड़क पर काफी चलते हैं जो सड़क चंद दिन पहले बनी और 2 दिन बाद ही उखड़ने लगी है इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस सड़क के डामरीकरण में किस मात्रा व गुणवत्ता का मैटीरियल प्रयोग हो रहा है तथा कितना समय तक यह सड़क चल पाएगी। नितिन का कहना है इस निर्माण कार्य में बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने ने इसकी जाँच की मांग की है। उनका कहना है कि इस सड़क से कई छोटे-बड़े नेता/ अधिकारी आवागमन करते रहते हैं परंतु अभी तक किसी ने भी इस बात की सुध नहीं ली है। उन्होंने सम्बंधित विभाग से इस संबंध में उचित जांच कर कार्यवाही की मांग की है।

जगमोहन डांगी

गढ़वाली लघु फिल्म “मंगतू परदेशी”, मात्र 2 दिन में एक लाख से अधिक लोगों को पसंद आया ट्रेलर

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Mangtu Pardeshi

रुद्रप्रयाग : रोजगार के लिए अपने घर गाँव छोड़कर बड़े-बड़े शहरों में गए लाखों प्रवासी कोरोना महामारी के चलते अपने मूल गांवों में लौट चुके हैं। हालाँकि कि इसबीच कुछ कोरोना संक्रमित प्रवासियों के आने से पहाड़ में भी कोरोना पहुँच गया है। कोरोना संकट काल में पहाड़ लौटे युवाओं का मन अब वापस जाने का नहीं है। ज्यादातर लोगों को समझ आ गया है कि बड़े शहरों में मशीनों की रफ़्तार से जिन्दगी गुजारने से कहीं अच्छी पहाड़ के गांवों की सुकून भरी जिन्दगी है। गाँव लौटे युवाओं के लिए यहाँ करने के लिए बहुत कुछ है।

कोरोना संकट के दौर में रुद्रप्रयाग की टीम मंगतू ने पलायन पर  कटाक्ष करती हुई एक गढ़वाली लघु फिल्म मंगतू परदेशी बनायीं है। फिल्म यूट्यूब चैनल पर 5 जून को रिलीज़ होगी। मंगतू परदेशी का ट्रेलर दो दिन पहले रिलीज़ किया गया था और मात्र दो दिन में ही फेसबुक, यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया के माध्यम से एक लाख से अधिक लोगों द्वारा इसको देखा जा चुका है, और बहुत पसंद किया जा रहा है। लोगों को नवीन सेमवाल (बामणी फेम) और बिपिन सेमवाल की जुगल बंदी काफी पसंद आ रही है।  फिल्म की पटकथा उत्तराखंड की युवा लेखिका उपासना सेमवाल ने लिखी है। जबकि फिल्म की फोटोग्राफी/वीडियो ग्राफी हिम्मी चौहान द्वारा किया गया है।

टीम मंगतू इससे पहले भी दो सफल लघु फिल्में बना चुकी है, “covid 19 भितर रा सुरक्षित रा एवं “परदेशी मंगतू अर परदान दिदा जो लोगों द्वारा काफी पसंद की गई हैं। मंगतू परदेशी” का ट्रेलर यहां देखें

भारतीय पेट्रोलियम संस्थान देहरादून में कोविड-19 परीक्षण सुविधा प्रारम्भ

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covid-19 test facility started at Indian Petroleum Institute Dehradun

देहरादून : वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर)-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान देहरादून (आईआईपी) में आरटी–पीसीआर विधि के माध्यम से कोविड-19 रोगियों के नमूनों का परीक्षण प्रारंभ कर दिया गया है। बुधवार को उत्तराखंड के अपर सचिव, स्वास्थ्य युगल किशोर पंत द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखंड के डॉ. पंकज सिंह तथा डॉ. अर्जुन सेंगर तथा आईआईपी के निदेशक डॉ. अंजन रे की उपस्थिति में भारतीय पेट्रोलियम संस्थान में नवनिर्मित जैव सुरक्षा स्तर– 2+ की अत्याधुनिक कोविड-19 परीक्षण सुविधा का उद्घाटन किया गया. इस अवसर पर आईआईपी के अन्य सम्बद्ध वैज्ञानिक और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे.

सीएसआईआर द्वारा पांच स्तम्भ; निगरानी(सर्वेलेंस), निदान,  औषधि, अस्पताल में सहयोगी उपकरण तथा सप्लाई चेन लॉजिस्टिक्स के माध्यम से कोविड-19 के विरुद्ध जंग में सतत महत्वपूर्ण एवं वृहत योगदान दिया जा रहा है. संस्थान द्वारा इस कोविड-19 परीक्षण सुविधा की स्थापना भी इन्हीं प्रयासों की एक कड़ी है। सीएसआईआर, अपने पांच स्तम्भ सर्वेक्षण, निदान,  औषधि, अस्पताल में उपयोगी उपकरण तथा सप्लाई चेन लॉजिस्टिक्स में सहयोग की अपनी प्रतिबद्धता के अंतर्गत इस वैश्विक महामारी;  कोविड-19 के विरुद्ध जंग में सतत अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है.

सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान सदैव राष्ट्रीय हित के लिए समर्पित रहा है. संस्थान द्वारा स्थापित इस सुविधा का निर्माण पोटा केबिन के प्रयोग से किया गया है। इस मोडल के अनुसार सुदूर क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुसार आसानी से ऐसी परीक्षण सुविधा का निर्माण किया जा सकता है। सीएसआईआर- भारतीय पेट्रोलियम संस्थान में स्थापित इस परीक्षण सुविधा में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के द्वारा निर्धारित नियम एवं मानकों के अनुसार कोविड-19 के नमूनों का परीक्षण किया जाएगा। संस्थान के निदेशक डॉ. अंजन रे ने बताया कि वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद के वित्तीय सहयोग से सीएसआइआर-आईआईपी द्वारा यह आरटी-पीसीआर आधारित कोविड-19 परीक्षण सुविधा स्थापित की गई है। यहां विशेष रूप से प्रशिक्षित  कर्मचारियों के द्वारा, आवश्यक जैव सुरक्षा सावधानियों का अनुपालन करते हुए एक दिन में 100 नमूनों का परीक्षण किया जा सकता है।

उन्होने कहा कि निश्चित रूप से इस सुविधा के स्थापना से उत्तराखंड में कोविड-19 की सार्वजनिक परीक्षण सुविधाओं में वृद्धि होगी तथा देहरादून जिले में अब अधिक संख्या में कोविड-19 नमूनों का परीक्षण किया जा सकेगा। वर्तमान में इस प्रकार की सुविधा केवल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश तथा दून अस्पताल में ही उपलब्ध है। उन्होंने यह भी बताया कि  इस कोविड – 19 परीक्षण सुविधा का संचालन हमारे वैज्ञानिकों का एक दल करेगा, जिसमें डॉ. देवाशीष घोष, डॉ. सुनील के सुमन, डॉ. दीप्ति अग्रवाल तथा डॉ. दीपतारिका दासगुप्ता एवं अन्य प्रशिक्षित तकनीशियन शामिल हैं।  डॉ. टी भास्कर इस सुविधा के प्रमुख होंगे।

 

 

 

डॉ. अंजन रे ने यह भी बताया कि इस सुविधा की स्थापना तथा पूर्ण रूप से प्रचालन प्रारंभ करने के लिए हमारी टीम नियमित रूप से उत्तराखंड राज्य के स्वास्थ्य मंत्रालय तथा सभी सरकारी अस्पतालों के संपर्क में थी और सबके सहयोग से आज इस कोविड-19 नमूना परीक्षण सुविधा की स्थापना हो पाई है तथा इसका प्रचालन प्रारंभ हुआ है। सीएसआईआर – भारतीय पेट्रोलियम संस्थान अब कोविड-19 के परीक्षण के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की एक मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला है। सीएसआईआर – भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, देहरादून द्वारा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, ऋषिकेश तथा दून अस्पताल के साथ इस सम्बन्धी मार्गदर्शन तथा परीक्षण परिणाम के वैधीकरण के लिए समझौता ज्ञापन भी दर्ज किए गए हैं।  राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखंड राज्य के द्वारा संस्थान को परीक्षण किट उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

 

इस अवसर पर सभी आगंतुकों तथा मीडिया सहयोगियों को संस्थान द्वारा निर्मित सेनेटाइजर(250 मि. ली.)  भेंट किया गया।

उत्तराखंड में क्वारंटाइन सेंटरों की व्यवस्था के लिए सभी ग्राम प्रधानों को दिए जाएंगे 10-10 हजार रुपये

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देहरादून : मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के निर्देश पर कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव व राहत कार्यों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से जिलाधिकारियों को स्वीकृत धनराशि में से 10-10 हजार रूपए की राशि ग्राम प्रधानों को क्वारेंटाईन की व्यवस्था के लिए दी जानी है। पूर्व में मुख्यमंत्री राहत कोष से कोरोना संक्रमण से राहत कार्यों के लिए 4 जिलों को 3-3 करोड रुपये और 9 जिलों को 2-2 करोड रुपये आवंटित किए गए थे। इस राशि से असंगठित क्षेत्र के बेरोजगार श्रमिकों को खाद्य सामग्री किट व अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध करानी थी।

दिनांक 27 मई को जारी आदेश के अनुसार इस राशि का उपयोग कुछ अन्य कार्यों में भी करने की स्वीकृति दी गई है। जनपदों में फंसे छात्रों, पर्यटकों, अन्य बैसवारा लोगों के रहने व भोजन व्यवस्था आदि, क्वारेंटाईन सेंटरों में व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने, प्रवासियों को राशन किट उपलब्ध कराने में भी जिलाधिकारी इस राशि का उपयोग कर सकेंगे। साथ ही उन्हें निर्देश दिये गये हैं कि ग्राम प्रधानों द्वारा क्वारेंटाईन सेंटर में की गई व्यवस्थाओं के लिए 10-10 हजार रुपये की राशि दी जाए।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग में उपलब्ध रिक्तियों को आउटसोर्स के माध्यम से 20 फरवरी 2021 तक रखे जाने के लिए जिलाधिकारियों को अधिकृत किया गया है।

पौड़ी गढ़वाल: क्वारंटाइन में रह रही 23 वर्षीय महिला की मौत, दिल्ली से लौटा था परिवार

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पौड़ी गढ़वाल: पौड़ी गढ़वाल के थलीसैंण ब्लॉक के अंतर्गत मासों गांव में क्वारंटीन में रह रही एक 23 वर्षीय महिला की कल देर रात अचानक मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक बीते 19 मई को थलीसैंण ब्लॉक के मासों गांव में दिल्ली से एक परिवार के 5 लोग लौटे थे। जिन्हें गाँव में ही एक खाली पड़े घर में क्वारंटाइन किया गया था। सूचना के मुताबिक बीते 29 मई को क्वारंटाइन में रह रहे इस परिवार की महिला की तबियत अचानक खराब हो गई थी। खबर मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने महिला का स्वास्थ्य परीक्षण किया और दवाइयां दे दी थी। जिसके बाद वह स्वस्थ्य हो गई थी। इसीबीच मंगलवार रात उक्त महिला की तबियत फिर से अचानक बिगड़ने लगी, और देर रात उसकी मौत हो गई। बताया गया है कि इस परिवार की 14 दिन की क्वारंटाइन अवधि आज बुधवार को पूरी होनी थी। इसीबीच क्वारंटाइन अवधि से चंद घंटो पहले ही महिला की मौत हो गई। सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम गाँव में पहुंच गई है। महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल पौड़ी भेजा गया है। कोरोना संदिग्ध होने के कारण महिला का सैंपल लिया जाएगा। एहतिहात के तौर पर मृतक महिला के परिजनों को होम क्वारंटाइन कर दिया गया है। इसके साथ ही पौड़ी जनपद में क्वारंटीन में होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़कर 6 पहुंच गया है।

उत्तराखंड मे आज फिर 42 नए कोरोना पॉजिटिव मिले, 1085 पहुंचा कुल मरीजों का आंकड़ा

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Coronavirus Update uttarakhand :  प्रदेश में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. आज बुधवार को प्रदेश में कोरोना वायरस के कुल 42 नए मामले सामने आये हैं. स्वास्थ्य विभाग द्वारा दोपहर 02 बजे जारी हेल्थ बुलेटिन में 23 लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई थी. जबकि अभी रात 8 बजे जारी दूसरी रिपोर्ट में 19 नए लोग कोरोना पॉजिटिव मिले हैं. आज मिले कुल 42 कोरोना संक्रमितों में से सबसे ज्यादा 15 लोग नैनीताल जिले से हैं, वहीँ देहरादून तथा हरिद्वार जिलों से क्रमशः 9-9 कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. इसके अलावा 06 लोग चमोली से, 01 पौड़ी गढ़वाल से, 01 पिथोरागढ़ से तथा 01 कोरोना पॉजिटिव मरीज उधमसिंह नगर जिले से है. जिसके बाद अब प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों को आंकड़ा बढ़कर 1085 पहुँच गया है. इसके अलावा 282 लोग ठीक होकर घर भी लौटे हैं. जबकि 08 लोगों की मौत हो चुकी है.

आज मिले  कोरोना संक्रमितों में से ज्यादातर लोग मुम्बई से तथा कुछ एक दिल्ली से यहाँ पहुंचे हैं. जबकि  कुछ की ट्रेवल हिस्ट्री पता नहीं चल पाई है.

उत्तराखंड में अब तक कोरोना covid-19 के जिलेवार मामले

जनपद कोरोना के मरीज
नैनीताल300
देहरादून288
टिहरी91
उधमसिंह नगर83
हरिद्वार85
पौड़ी38
अल्मोड़ा63
पिथौरागढ़28
चमोली25
उत्तरकाशी21
बागेश्वर21
चंपावत33
रुद्रप्रयाग8
कुल1085