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प्रत्येक माह वेतन कटौती पर शिक्षकों में आक्रोश

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सरकार के द्वारा मई 2020 से मार्च 2021 तक प्रत्येक माह एक दिन का वेतन कटौती के आदेश पर शिक्षकों ने रोष व्यक्त करते हुए इसे मनमाना निर्णय करार दिया है। राजकीय शिक्षक संघ के पूर्व मंडलीय मंत्री (गढवाल) शिव सिंह नेगी ने कहा कि शिक्षक सदैव सरकार के हर निर्णय के साथ दृढता से खडे रहे हैं, किन्तु वर्ष भर तक हर माह एक दिन की बेतन कटौती निश्चित रुप से ज्यादती है। शिक्षकों ने कोरोना महामारी के चलते निरंतर बेसहारा लोगों को निजी व्यय से राशन वितरण का कार्य किया है। पीएम केयर्स फंड में भी योगदान करने के साथ ही पूर्व में की गई कटौती और वर्ष भर के डीए को फ्रीज किये जाने को भी स्वीकारा है।

नेगी ने कहा कि सरकार एक ओर तो माननीय विधायकों से बकायदा बेतन कटौती की सहमति ले रही है, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों से संवाद करने की जरूरत भी नहीं समझी जा रही है। सरकार के इस निर्णय से निसंदेह शिक्षकों पर आर्थिक बोझ पडेगा और उन्हें अपने पारिवारिक दायित्वों की पूर्ति हेतु आर्थिक तंगी का सामना करना पडेगा। नेगी ने प्रति माह बेतन कटौती के आदेश को आपत्तिजनक मानते हुए पुनर्विचार करने की मांग की है।

उत्तराखंड : मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में ऑनलाइन आवेदन शुरू, यहाँ करें आवेदन

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Apply online under Mukhyamantri Swarozgar Yojana

देहरादून : मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में अब ऑनलाइन आवेदन भी किया जा सकता है। योजना की वेबसाइट msy.uk.gov.in को मंगलवार  को लांच कर दिया गया है। मुख्यमंत्री के आईटी सलाहकार रवींद्र दत्त ने बताया मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की वेबसाइट को उत्तराखंड सरकार के आईटी पार्क स्थित स्टेट डेटा सेंटर में होस्ट किया गया है।

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में ऑनलाईन आवेदन के लिए आवेदक को वेबसाईट पर पंजीकरण करते हुए लॉग-इन आईडी बनानी होगी। इस आईडी से लॉग-इन कर अपने नाम, पता, शैक्षिक योग्यता, मोबाईल नम्बर, पैन नम्बर आदि व्यक्तिगत विवरण के साथ ही प्रस्तावित इकाई, उत्पाद/सेवा, निवेश, वित पोषित बैंक आदि का विवरण देना होगा। आवेदन के लिए हिंदी या अंग्रेजी भाषा का विकल्प चुना जा सकता है।

28 मई मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का शुभारंभ किया था। उत्तराखंड के उद्यमशील युवाओं और कोविड-19 के कारण राज्य में लौटे प्रवासी कामगारों को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने के लिए ये योजना प्रारम्भ की गई है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत कुशल और अकुशल दस्तकारों, हस्तशिल्पियों और बेरोजगार युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। योजना के तहत राष्ट्रीयकृत बैंकों, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और सहकारी बैंकों के माध्यम से लाभार्थियों को ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

एमएसएमई विभाग द्वारा योजना के अन्तर्गत मार्जिन मनी की धनराशि अनुदान के रूप में उपलब्ध कराई जायेगी। विनिर्माण क्षेत्र में परियेाजना की अधिकतम लागत 25 लाख रुपये और सेवा व व्यवसाय क्षेत्र के लिए अधिकतम लागत 10 लाख रूपये होगी। एमएसएमई नीति के अनुसार वर्गीकृत श्रेणी ए में मार्जिन मनी की अधिकतम सीमा कुल परियोजना लागत का 25 प्रतिशत, श्रेणी बी में 20 प्रतिशत तथा सी व डी श्रेणी में कुल परियोजना लागत का 15 प्रतिशत तक मार्जिन मनी के रूप में देय होगी।  उद्यम के दो वर्ष तक सफल संचालन के बाद मार्जिन मनी अनुदान के रूप में समायोजित की जायेगी। योजना के अन्तर्गत सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों द्वारा परियोजना लागत का 10 प्रतिशत जबकि विशेष श्रेणी के लाभार्थियों को कुल परियोजना लागत का पांच प्रतिशत स्वयं के अंशदान के रूप में जमा

पहाड़ों में अदरक की खेती पर विशेष: लाभकारी उपज हेतु कृषक स्वयंम करे अदरक बीज उत्पादन

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पहाड़ों में अदरक की व्यासायिक खेती कहाँ और कैसे की जाती है, तथा इसमें किसानों को क्या-क्या कठिनाईयां आती हैं इसकी विस्तृत जानकारी दे रहे हैं कृषि एवं बागवानी के विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र प्रसाद कुकसाल। 

पहाड़ी क्षेत्रों में अदरक की व्यवसायिक खेती परम्परागत रूप से कृषक करते आ रहे हैं। समय पर प्रमाणित/ ट्रुथफुल बीज न मिल पाने के कारण कृषक अदरक की अधिक लाभकारी खेती नहीं कर पा रहे हैं।

अच्छी उपज देने वाले ट्रुथफुल अदरक बीज प्राप्त करने के मुख्य स्रोत हैं :

  1. आई.आई.एस.आर प्रयोगिक क्षेत्र केरल।
  2. कृषि एवं तकनीकी वि० वि० पोट्टांगी उडीसा।
  3. डा० वाइ.एस.परमार यूनिवर्सिटी आफ हार्टिकल्चर नौणी सोलन हिमांचल प्रदेश ।
  4. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के मसाला विकास संस्थान।

उद्यान विभाग वर्षों से टेंडर द्वारा निजी फर्मों के माध्यम से पूर्वोत्तर राज्यों असम, मणिपुर, मेघालय व अन्य राज्यों से सामान्य किस्म के अदरक को क्रय कर प्रमाणित/Truthful  रियोडी जिनेरियो किस्म बताकर राज्य के कृषकों को बीज के नाम पर बांटता आ रहा है। अदरक उत्पादकों का कहना है कि उद्यान विभाग से प्राप्त अदरक बीज समय पर नहीं मिल पाता साथ ही इस बीज से कई तरह की बीमारियों खेतों में आने का डर रहता है।

उद्यान विभाग द्वारा मसाला विकास के नाम पर कई योजनाएं चलाई जा रही हैं – हार्टिकल्चर टैक्नालाजी मिशन, पारम्परिक कृषि योजना, कृषि विकास योजना, जिला विकास योजना, राज्य सैक्टर की योजना आदि नाना प्रकार की योजनाएं चल रही है, जिन पर हजारों करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं किन्तु कभी भी राज्य में अदरक बीज उत्पादन के प्रयास नहीं किए गए. जिससे राज्य अदरक बीज में हिमाचल प्रदेश की तरह आत्म निर्भर बन सके।

प्रगतिशील अदरक उत्पादक स्वयमं अपनी अदरक उपज से अदरक को बीज हेतु भंडारित करते हैं। इसलिए आवश्यक है कि अदरक की भरपूर उपज हेतु कृषक अपनी स्वस्थ उपज से ही अदरक बीज का भंडारण करें। अदरक उत्पादित क्षेत्रों में कुछ प्रगतिशील कृषक स्वयंम अदरक  बीज का उत्पादन करते हैं। टिहरी जनपद के फगोट विकास खण्ड के अन्तर्गत, आगरा खाल के कस्मोली, आगर आदि ग्राम सभाओं के अदरक उत्पादकों के साथ मैने स्वंम वैठक की जिसमें हरियाली ग्रामीण कृषक श्रमिक सहकारी समिति के अध्यक्ष हरीश चंद्र रमोला, ग्रामीण श्रमिक कृषक कल्याण सहकारी समिति आगराखाल के अध्यक्ष कुंवर सिंह रावत व अन्य कृषकों ने भाग लिया स्थानीय रूप से उत्पादित अदरक बीज की मागं काफी रहती है। ग्रामीण कृषक सहकारी समिति आगराखाल के अध्यक्ष व पूर्व क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष वीरेंद्र कंडारी का कहना है कि उद्यान विभाग द्वारा आपूर्ति अदरक बीज समय पर नहीं मिलता, साथ ही उसमें कई तरह की व्याधियां व कीट लगे होते हैं. कन्डारी ने उद्यान विभाग को स्थानीय अदरक बीज उत्पादन को बढ़ावा देने व योजनाओं में स्थानीय अदरक बीज किसानों को वितरित करने की सलाह दी है। अन्य अदरक उत्पादित क्षेत्रों रुद्रप्रयाग जनपद में बनगढ (पोखरी), देहरादून के चकरौता विकास नगर आदि क्षेत्रों में भी कुछ प्रगतिशील कृषक अदरक का बीज स्वयंम उत्पादित करते हैं।

कैसे करें बीज हेतु अदरक का भंडारण :

  • बीज हेतु अदरक को 3-4 माह से अधिक समय तक भंडारित करना होता है, इसलिए आवश्यक है भंडारण सही विधि से करें जिससे अदरक सड़ने न पाए।
  • अच्छे सुडौल प्रकंदों का चयन करके उन्हें अलग से रखें तथा अच्छी तरह से छाया में सुखा लें।
  • जिस खेत में अदरक की फसल पर बीमारियों लगी हों उस खेत के अदरक को बीज के लिए भंडारण न करें। स्वस्थ और रोग रहित कन्दों का ही बीज हेतु चयन करें।
  • प्रकन्दों का भंडारण सूखे, ऊंचे एवं छाया दार स्थान पर एक उचित वायु संचार युक्त गड्ढों में करना चाहिए। भंडारण से पहले गड्ढे को भलीभांति सफाई कर लें तथा उसे एक सप्ताह तक धूप में खुला छोड़ दें जिससे गड्ढे में नमी न रहे। भंडारण करने से पूर्व, गड्ढे के अन्दर घास फूस जलाकर भी गड्ढे को उपचारित किया जा सकता है।
  • भंडारण करने से पूर्व प्रकन्दों को कार्बेन्डाजिम ( 100 ग्राम) + मैन्कोजैव (250 ग्राम) को 100 लीटर पानी में घोल तैयार कर लें इस घोल में 70-80 किलोग्राम अदरक को एक घंटे तक उपचारित करें।
  • यदि रासायनिक दवायें उपलब्ध नहीं हो पा रही है तो, ट्राइकोडर्मा कल्चर से अदरक को छाया में उपचारित करें तेज धूप में ट्राइकोडर्मा जीवाणु मर सकते हैं।
  • अदरक पर हल्का सा पानी छिड़क कर, दस ग्राम ट्राइकोडर्मा प्रति किलो अदरक बीज की दर से (याने एक कुन्तल बीज हेतु एक किलोग्राम ट्राइकोडर्मा) उपचारित करें, जिससे ट्राइकोड्रमा की पर्त अदरक कन्दो पर बन जाय। बीजा मृत से भी बीज उपचारित कर सकते हैं।
  • उपचारित अदरक को छाया में भली भांति सुखायें। बीज भंडारण से पूर्व गड्ढे में सबसे नीचे एक परत रेत या बुरादा या धान की पुलाव बिछा दें फिर उपचारित बीज को भरें। हवा के संचार के लिये छिद्र युक्त प्लास्टिक के पाईप को गड्ढे के बीच में डालें। गड्ढे में प्रकन्दों को पूरी तरह से न भरें 1/4 भाग खाली रखें। ऊपर के खाली भाग में सूखी घास रखें तथा गड्ढे को ऊपर से लकड़ी के तख्ते से ढक दें। तख्तों किनारों को मिट्टी से पोत दें।
  • हवा के आवा गमन हेतु यदि छिद्र युक्त पौलीथीन पाइप की व्यवस्था नहीं हो पा रही है तो ऊपर से बिछे तखत्तो के बीच में हवा के आव गमन हेतु जगह छोड़ दें।
  • सही भंडारण के लिए खत्तियों को अच्छी तरह ढकना जरूरी है इसके लिए पत्तियों व घास का रिंगांल/बांस के साथ कच्चा ढांचा बनाया जा सकता है जिससे बर्षा का पानी खत्तियों में जाने से रोका जा सके।
  • टेहरी जनपद के आगरा खाल में अदरक उत्पादक खत्तियो में बीज हेतु अदरक भरने के बाद ऊपर से मालू के पत्तों से बने बिशेष आवरण जिसे स्थानीय भाषा में पितलोट कहते हैं , से ढक देते हैं जिससे बर्षा का पानी अन्दर नहीं जा पाता साथ ही हवा का आवा गमन भी बना रहता है जिससे अदरक बीज सुरक्षित रहता है।

कृषि एवं बागवानी के विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र प्रसाद कुकसाल।

सतपुली : स्वयंसेवियों ने चलाया मिशन कोशिश के तहत जागरूकता अभियान

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awareness-campaign

सतपुली : विकासखंड पोखड़ा के अंतर्गत श्री हंस महाराज राजकीय इंटर कॉलेज के स्काउट गाइड एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवियों द्वारा मिशन कोशिश के तहत कोरोना महामारी से बचने हेतु जागरूकता अभियान चलाया।

राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम अधिकारी पूनम रावत व विकासखंड सचिव स्काउट गाइड मीनाक्षी ध्यानी के नेतृत्व में स्वयंसेवियों द्वारा विभिन्न गाँवो में जाकर ग्रामीणों को स्वयं बनाये कपडे के मास्क बांटे। साथ ही स्वयंसेवियों द्वारा कोविड-19 बीमारी से बचाव के लिए चार्ट बनाकर गांव के सार्वजानिक स्थानो पर लगाये गए और लोगो को बीमारी से बचने की जानकारी दी। कार्यक्रम में स्वयंसेवी आयुष, सिमरन, आंचल, दीपांजलि आदि मुख्य रूप से रहे।

मनीष खुगशाल

 

 

2 लाख के करीब पहुंचा देश में कोरोना के मरीजों का आंकड़ा, 24 घंटे में 8,171 नए केस और 204 की मौत

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state wise coronavirus cases in india

नई दिल्ली : देश में कोरोना वायरस के मरीजों का आंकड़ा तेजी से बढ़ता जा रहा है। भारत में कोरोना के मामले 2 लाख के करीब पहुँचने वाले हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटों में देश में कोरोना वायरस संक्रमण के 8,171 नए मामले सामने आए हैं। वहीँ 204 लोगों की मौत हुई है। जिसके बाद अब देश में कोरोना के मरीजों की कुल संख्या 1,98,706 हो गई है, इसमें से 95,526 लोग ठीक हो चुके हैं और 5,598 लोगों की इस बीमारी से जान जा चुकी हैं। सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में 70 हजार लोग इसकी चपेट आ चुके हैं.

देखें राज्यवार कोरोना मरीजों की लिस्ट।

S. No.  States  ConfirmedCuredDeath
20Maharashtra70013301082362
30Tamil Nadu2349513170184
9Delhi208348746523
11Gujarat17200107801063
28Rajasthan89806040198
19Madhya Pradesh82835003358
34Uttar Pradesh80754843217
35West Bengal57722306325
5Bihar3926190024
2Andhra Pradesh3783237864
16Karnataka3408132852
31Telengana2792149188
14J & K260194631
12Haryana2356105521
27Punjab2301200045
25Odisha210412457
4Assam13902774
17Kerala132660810
33Uttarakhand9582226
15Jharkhand6592965
7Chhattisgarh5471221
32Tripura4201730
13Himachal Pradesh3401225
6Chandigarh2941994
21Manipur83110
18Ladakh77430
26Puducherry74250
10Goa71420
24Nagaland4300
1Andaman33330
22Meghalaya27121
3Arunachal2210
8Dadar Nagar Haveli310
23Mizoram110
29Sikkim100
Cases being reassigned to6414
Total confirmed cases198706955275598

पौड़ी जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कोरोना संदिग्ध बुजुर्ग की मौत

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पौड़ी गढ़वाल : पौड़ी जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती एक 80 वर्षीय कोरोना संदिग्ध बुजुर्ग की मौत हो गई है। स्वास्थ्य विभाग ने एहतियातन मृतक व्यक्ति का कोरोना सैंपल ले लिया है। थलीसैंण ब्लॉक के सिरतोली गांव का एक कोरोना संदिग्ध बुजुर्ग बीते 27 मई से पौड़ी जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती थे। जानकारी के मुताबिक सिरतोली निवासी बुजुर्ग सोबत सिंह अपनी बेटी से मिलने दिल्ली गए थे, और बीते 18 मई को गांव वापस लौटे थे। गांव वापस आने पर उन्हें संस्थागत क्वारंटाइन किया गया था। क्वारंटाइन अवधि के दौरान ही बीते 27 मई को उनकी तबियत ख़राब हो गई, उन्हें पेशाब व शौच क्रिया करने में दिक्कत हो गई थी। जिस पर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। सीएमएस डॉ. आरएस राणा ने बताया कि सोबत सिंह को कोरोना संदिग्ध होने के चलते आइसोलेट किया गया था। उपचार के दौरान सोमवार देर शाम सोबत सिंह की मौत हो गई। एतिहात के तौर पर मृतक का कोरोना सैंपल जांच के लिए भेज दिया गया है।

देश के 15 लाख बिजली कर्मचारियों ने  इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 के विरोध में काली पट्टी बाँध कर किया विरोध

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1.5 million electricity employees of the country opposed the Electricity (Amendment) Bill 2020

नेशनल कोआर्डिनेशन कमीटी ऑफ  इलेक्ट्रिसिटी इम्पलॉईस एन्ड इंजीनियर्स (NCCOEE) के बैनर तले आज देश के 15 लाख बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 के विरोध में काली पट्टी बाँध कर विरोध दर्ज किया और केंद्र सरकार से  बिल वापस लेने की मांग की|

बिजली कर्मचारियों ने  इस बात पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है कि कोविड -19 की महामारी के बीच जब सारा देश एकजुट होकर संक्रमण से संघर्ष कर रहा है तब केंद्र सरकार  इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 जारी कर  निजीकरण करने में लगी है जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा है| एनसीसीओईई ने बिल के उपभोक्ता और किसान विरोधी प्राविधानों से सभी प्रांतो के मुख्यमंत्रियों और संसद सदस्यों को पत्र भेजकर अवगत कराया है और उनसे मांग की है  कि वे इस बिल का प्रबल विरोध करे और इसे वापस कराने हेतु केंद्र सरकार पर दबाव डालें|

केंद्र सरकार द्वारा निजीकरण के बाद उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली देने के वायदे को खारिज करते हुए ऑल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने कहा है कि वस्तुतः  निजीकरण  किसानों और आम घरेलू उपभोक्ताओं के साथ धोखा है और निजीकरण के बाद बिजली की दरों में बेतहाशा वृद्धि होगी| कोविड-19 संक्रमण के दौरान लाकडाउन का फायदा उठाते हुए  निजीकरण करने की निंदा करते हुए फेडरेशन ने इसे देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया है|

ऑल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 में कहा गया है कि नई टैरिफ नीति में सब्सिडी और क्रास सब्सिडी समाप्त कर दी जाएगी और किसी को भी ला गत से कम मूल्य पर बिजली नहीं दी जाएगी| उन्होंने बताया कि अभी किसानों, गरीबी रेखा के नीचे और 500 यूनिट प्रति माह बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को सब्सिडी मिलती है जिसके चलते इन उपभोक्ताओं को लागत से कम मूल्य पर बिजली मिल रही है| अब नई नीति और निजीकरण के बाद सब्सिडी समाप्त होने से स्वाभाविक तौर पर  इन उपभोक्ताओं के लिए बिजली महंगी होगी|

आँकड़े देते हुए उन्होंने बताया कि बिजली की लागत का राष्ट्रीय औसत रु 06.78   प्रति यूनिट है और निजी कंपनी द्वारा  एक्ट के अनुसार  कम से कम 16% मुनाफा लेने के बाद रु 08  प्रति यूनिट से कम दर पर बिजली किसी को नहीं मिलेगी| इस प्रकार एक किसान को लगभग 6000 रु प्रति माह और घरेलू उपभोक्ताओं को 6000 से 8000 रु प्रति माह तक बिजली बिल देना होगा| उन्होंने कहा कि निजी वितरण कंपनियों को कोई घाटा न हो इसीलिये सब्सिडी समाप्त कर प्रीपेड मीटर लगाए जाने की योजना लाई जा रही है| अभी सरकारी कंपनी घाटा उठाकर किसानों और उपभोक्ताओं को बिजली देती है| उन्होंने कहा कि सब्सिडी  समाप्त होने से किसानों और आम लोगों को भारी नुक्सान होगा जबकि क्रास सब्सीडी समाप्त होने से केवल उद्योगों और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लाभ होगा|

ऑल इण्डिया पावर इन्जीनियर्स फेडरेशन ने देश के सभी प्रांतों व् केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य मन्त्रियों को पत्र भेजकर अपील की  है कि वे कोविड-19 महामारी के बीच निजीकरण हेतु लाये गए  इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 का विरोध करें| फेडरेशन ने मुख्यमंत्रियों को प्रेषित पत्र में मुख्य रूप से यह सवाल उठाया है कि  इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 पारित हो गया तो बिजली के मामले में राज्यों के अधिकार का हनन होगा और टैरिफ तय करने से लेकर बिजली की शिड्यूलिंग तक में केंद्र का दखल होगा|

ऑल इण्डिया पावर इन्जीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि बिजली संविधान की समवर्ती सूची में है जिसका अर्थ यह होता है कि बिजली के मामले में राज्यों को केंद्र के समान बराबर का अधिकार है किन्तु   इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 के जरिये बिजली के मामले में केंद्र एकाधिकार ज़माना चाहता है| उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून के अनुसार राज्य सरकार के कहने पर राज्य का विद्युत् नियामक आयोग किसानों, गरीबों और कम बिजली उपभोग करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सब्सिडी को सम्मिलित करते हुए बिजली की तर्कसंगत दरें तय करता है|   नए बिल में यह प्राविधान किया गया है कि नियामक आयोग बिजली की दरें तय करने में सब्सिडी को सम्मिलित नहीं कर सकता और सभी उपभोक्ताओं को बिजली की पूरी लागत देनी होगी| इस प्रकार बिजली की दरें तय करने में गरीब उपभोक्ताओं को सब्सिडी देने के राज्य के अधिकार को छीना जा रहा है|

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार नए बिल के अनुसाए इलेक्ट्रिसिटी कॉन्ट्रैक्ट एनफोर्समेन्ट अथॉरिटी का गठन कर रही है| यह  अथॉरिटी बिजली वितरण कंपनियों और निजी क्षेत्र के बिजली उत्पादन घरों के बीच बिजली खरीद के करार के अनुसार भुगतान को सुनिश्चित करने का कार्य करेगी और इस  अथॉरिटी के पास यह अधिकार होगा कि यदि निजी उत्पादन कंपनी का भुगतान सुनिश्चित नहीं किया गया है तो राज्य को केंद्रीय क्षेत्र और पावर एक्सचेंज से एक यूनिट बिजली भी न मिल सके| करार का पालन कराने के अधिकार आज भी राज्य के नियामक आयोग के पास हैं किन्तु इस नई अथॉरिटी के बनने के बाद राज्य में बिजली  देने (शिड्यूलिंग) का अधिकार अब केंद्र सरकार के पास चला  जाएगा|

इसके अतिरिक्त नए बिल में यह प्राविधान किया जा रहा है कि राज्य विद्युत् नियामक आयोग के चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति का अधिकार अब केंद्र सरकार के पास चला जायेगा और राज्य के पास नहीं रहेगा| इनके चयन हेतु अब केंद्र सरकार की चयन समिति होगी जिसमे राज्य का कोई प्रतिनिधि भी नहीं होगा|

उन्होंने बताया कि नए बिल में एक निश्चित प्रतिशत तक सोलर पावर  खरीदना राज्य के लिए बाध्यकारी होगा और ऐसा न करने पर राज्य को भारी पेनाल्टी देनी होगी| ध्यान रहे कि बिजली की जरूरत न होने पर भी यह बिजली खरीदनी पड़ेगी जिसके लिए राज्य को अपनी बिजली उत्पादन इकाइयों को बंद करना पडेगा जिससे सबसे सस्ती बिजली मिलती है| इस प्रकार इस बिल से केंद्र के अधिकार बढ़ेंगे और राज्य के अधिकारों का हनन होगा|

उन्होंने बताया कि  इलेक्ट्रीसिटी (अमेण्डमेंट) बिल 2020 में बिजली वितरण का निजीकरण करने हेतु डिस्ट्रीब्यूशन सब लाइसेंसी और फ्रेन्चाइजी के जरिये निजी क्षेत्र को विद्युत् वितरण सौंपने की बात है जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा है| फ्रेन्चाइजी का प्रयोग पूरे देश में विफल हो चुका है और वांछित परिणाम न दे पाने के कारण लगभग सभी फ्रेंचाइजी करार रद्द कर दिए गए हैं | उत्तर प्रदेश में भी आगरा में टोरेंट पावर कंपनी की लूट चल रही है और कंपनी करार की कई शर्तों का उल्लंघन कर रही है| सीएजी ने भी टोरेंट कंपनी पर घपले के आरोप लगाए हैं| इसके अतिरिक्त इलेक्ट्रीसिटी (अमेण्डमेंट) बिल 2020 में सब्सीडी और क्रास सब्सीडी समाप्त करने की बात लिखी है जिससे आम उपभोक्ता का टैरिफ बढ़ेगा| यह बिल किसी भी प्रकार जनहित में नहीं है अतः इसे तत्काल वापस लिया जाए|

उत्तराखंड के ऊर्जा भवन देहरादून में विधुत विभाग के सभी कर्मचारी व अभियन्ता संगठनों ने सोशियल डिसटेन्सिंग के दायरे में रहकर विरोध दर्ज किया व प्रबंध निदेशक उपाकालि के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार को ज्ञापन भेजा गया। आज के विरोध कार्यक्रम में मोर्चा के संयोजक इंशारूल हक, अभियन्ता संघ के वाईएस तोमर, कार्तिकेय दूबे, मुकेश कुमार, अनिल मिश्रा, उपनल संगठन के विनोद कवि, लेखा संघ के डी०सी० ध्यानी सहित सैकडों कार्मिक उपस्थित रहे।

उत्तराखंड में आज फिर मिले 52 नए कोरोना पॉजिटिव, 958 पहुंचा कुल मरीजों का आंकड़ा

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corona positives found in Uttarakhand

Coronavirus Update uttarakhand :  उत्तराखंड में कोरोना वायरस की रफ़्तार रुकने का नाम नहीं ले रही है. सोमवार को प्रदेश में कोरोना वायरस के कुल 52 मामले सामने आये. स्वास्थ्य विभाग द्वारा दोपहर 02 बजे जारी हेल्थ बुलेटिन में 23 लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई. जिनमे से 15 लोग चम्पावत जिले से तथा 08 लोग हरिद्वार जिले के रहने वाले थे. ये सभी 23 लोग मुंबई से यहाँ लौटे थे. इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभी रात 08 बजे जारी हेल्थ बुलेटिन में भी 29 लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई. जिनमे 06 लोग फिर से चम्पावत जिले से, 06 लोग पिथोरागढ़ से, 05 लोग बागेश्वर से, 03 लोग नैनीताल जिले से तथा 09 लोग देहरादून जिले के रहने वाले हैं. रात 8 बजे की रिपोर्ट में पॉजिटिव आये लोग भी बाहरी राज्यों से यहाँ पहुंचे हैं. जिसके बाद अब प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों को आंकड़ा बढ़कर 958 पहुँच गया है. इसके अलावा 222 लोग ठीक होकर घर भी लौटे हैं. जबकि 05 लोगों की मौत हो चुकी है.

उत्तराखंड में अब तक कोरोना covid-19 के जिलेवार मामले

जनपद कोरोना के मरीज
नैनीताल263
देहरादून242
टिहरी77
उधमसिंह नगर82
हरिद्वार76
पौड़ी34
अल्मोड़ा63
पिथौरागढ़27
चमोली13
उत्तरकाशी21
बागेश्वर21
चंपावत33
रुद्रप्रयाग6
कुल958

 

डॉ. धन सिंह रावत ने सोशल मीडिया में उन्हें उत्तराखंड का कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनाये जाने की खबरों का किया खंडन

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देहरादून : सोशल मीडिया में प्रदेश के उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत को उत्तराखंड का कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्‍त करने की अफवाहों का स्वयं उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने खंडन किया है। उन्होंने फेसबुक पोस्‍ट के माध्यम से इसे असामाजिक तत्वों द्वारा सोशल मीडिया पर की गई बेहद निंदनीय हरकत बताया है।

बता दें कि बीते शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में शामिल पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीन मंत्री मदन कौशिक, हरक सिंह रावत व सुबोध उनियाल ने अपने आप को एतिहातन सेल्फ क्वारंटाइन कर लिया है। इसबीच किसी असामाजिक तत्व ने सोशल मीडिया में उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत को उत्तराखंड का कार्यवाहक मुख्यमंत्री नियुक्‍त करने के लेकर पोस्ट डाल दी जिसके बाद सोशल मीडिया में इसको लेकर चर्चाओं का बाजार गरम हो गया।

जिसके बाद डॉ. धन सिंह रावत को इस खबर का खंडन करने के लिए स्वयं सोशल मीडिया में कूदना पड़ा। उन्होंने इसका खंडन करते हुए अपने फेसबुक पेज पर लिखा कि मुझे यह सूचना प्राप्त हुई है कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा सोशल मीडिया पर मुझे कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में दर्शाया जा रहा है जोकि बिल्कुल ही गलत है और बेहद ही निंदनीय है। मैं ऐसे लोगों की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं और ऐसे लोगों के खिलाफ मेरे द्वारा पुलिस प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। आप सभी लोगों को मैं कहना चाहता हूं कि भले ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी सेल्फ क्वॉरेंटाइन है लेकिन वैश्विक महामारी कोरोना के इस कठिन दौर में निरंतर  मुख्यमंत्री जी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तथा फोन के माध्यम से सभी त्रीगणों, विधायकगणों और उच्चाधिकारियों से संपर्क कर आवश्यक दिशानिर्देश दे रहे हैं ताकि हमारा प्रदेश इस वैश्विक महामारी से जल्द से जल्द ठीक हो सके। मैं सभी सोशल मीडिया के मित्रों से अनुरोध करना चाहूंगा कि कृपया इस गलत खबर को सत्य ना माने।

गायत्री जयंती व गंगा दशहरा : आज ही के दिन गंगा का स्वर्ग से धरती पर हुआ था अवतरण

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Ganga Dussehra

श्रीनगर गढ़वाल : गंगा दशहरा का पर्व जेष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी के दिन मनाया जाता है इस दिन गंगा का स्वर्ग से धरती पर अवतरण हुआ था. गंगा दशहरा के दिन ही गायत्री जयंती मनाई जाती है, समस्त वेदों की उत्पत्ति मां गायत्री से हुई इसलिए मां गायत्री को वेदों की जननी अर्थात वेद माता कहा जाता है. त्रिदेव अर्थात ब्रह्मा, विष्णु और महेश इनकी आराध्या को गायत्री कहा जाता है. इसलिए गायत्री का एक नाम देवमाता भी है. मां गायत्री का आंचल पकड़ने वाला कभी निराश नहीं होता, गायत्री मंत्र को महामंत्र कहा जाता है. गायत्री महामंत्र को मंत्र शिरोमणि कहा जाता है. मां गायत्री की साधना बेहद सरल और कभी भी कहीं भी की जा सकती है. प्रातकाल मां गायत्री की साधना पूर्व दिशा की ओर मुंह करके तथा सायंकाल पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके करना उत्तम माना जाता है. मां गायत्री को पृथ्वी लोक की कामधेनु कहा जाता है. क्योंकि यह समस्त प्रकार के रोग शोक विकार और बाधाओं को दूर कर व्यक्ति को आरोग्य सौभाग्य ज्ञान विवेक प्रदान करती है. मां गायत्री को कल्पवृक्ष भी कहा जाता है. क्योंकि मां गायत्री की उपासना करने वाले को वह सब कुछ प्राप्त हो जाता है. जो उसके कल्याण के लिए जरूरी होता है. जिस प्रकार से पुष्प में शहद, दूध में घी, चंद्रमा में आह्लाद, सूर्य में तपन, अग्नि में तेज, जल में शीतलता का सार होता है उसी प्रकार समस्त देव शक्तियों का सार मां गायत्री है. गायत्री महामंत्र के 24 अक्षर परम शक्तिशाली तथा परम सौभाग्य को प्रदान करने वाले होते हैं. गायत्री जयंती के दिन स्नान आदि करके कम से कम तीन माला जाप किया जाए तो व्यक्ति को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. इसमें किसी भी प्रकार का संशय नहीं होता. आज 01 जून को गंगा दशहरा और गायत्री जयंती का पावन पर्व है. इस पावन पुनीत पर्व के दिन हम सभी लोग कोरोना महामारी के शीघ्र समाप्त होने की कामना करें, और गायत्री महामंत्र का नियमित जाप करें

ऊं भूर्भुव स्वाहा तत्सवितुर्वरेंयं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न प्रचोदयात्

ज्योतिषाचार्य अखिलेश चंद्र चमोला