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उत्तराखंड में तेजी से बढ़ रहे हैं कोरोना के मरीज, 132 पहुंचा राज्य में संक्रमितों का आंकड़ा

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coronavirus (covid-19) : उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण के मामले अब तेजी से बढ़ने लगे हैं। बुधवार को जहाँ 15 लोगों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई। वहीँ स्वास्थ्य विभाग द्वारा गुरुवार दोपहर जारी हेल्थ बुलेटिन में 10 लोग कोरोना पॉजिटिव बताये गए हैं। हालाँकि इनमे से 08 संक्रमितों की सैम्पल जांच रिपोर्ट कल रात ही मीडिया में आ चुकी थी। जबकि 2 कोरोना पॉजिटिव आज (गुरुवार) सामने आये हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा आज जारी सैंपल जाँच रिपोर्ट में टिहरी गढ़वाल में 5, देहरादून 04, नैनीताल जिले 01 कोरोना पॉजिटिव मरीज सामने आये। जिसके बाद अब राज्य में कुल कोरोना संक्रमितों की संख्या 132 हो गई है। वहीं इनमें से 54 मरीज ठीक हो चुके हैं। बीते 16 दिनों में प्रदेश में 70 से ज्यादा लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। बीते 5 मई को राज्य में कुल कोरोना संक्रमितों की संख्या 61 थी, वहीँ आज प्रदेश में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा बढ़कर 132 हो गया है। टिहरी जिले में कोरना के 6 मरीजों की पुष्टि होने से टिहरी जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है और सब के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई है।

 

lockdown 4.0 : नोएडा-ग्रेनो. में दो श्रेणी में बांटे गए 63 कंटेनमेंट जोन, जिला प्रशासन ने जारी की पूरी लिस्ट

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नोएडा : लॉकडाउन 4.0 शुरू होने के साथ ही गौतमबुद्ध नगर जिला प्रशासन नई गाइडलाइन्स जारी करते हुए जिले में कंटेनमेंट ज़ोन में फेरबदल किया है। जिला प्रशासन ने कोरोना के मरीजों को देखते हुए चिन्हित किये गए कंटेनमेंट जोन को दो श्रेणी में बांटकर इसकी सूची जारी कर दी है। गौतमबुद्ध नगर जिले में कुल 63 कंटेनमेंट जोन चिन्हित किये गए हैं। जिनमे से श्रेणी 1 में 37 और श्रेणी 2 में 26 जोन शामिल किये गए हैं। पहले जहां एक मरीज मिलने पर 400 मीटर का दायरा सील किया जाता था, वहीं अब एक मरीज मिलने पर 250 मीटर तथा एक से अधिक मरीज मिलने पर 500 मीटर का दायरा कंटेनमेंट जोन में शामिल होगा। साथ ही 250 मीटर का बफर जोन होगा। यहाँ देखें कुल 63 कंटेनमेंट ज़ोन की लिस्ट।

CBSE बोर्ड की 10वीं और 12वीं की बची हुई परीक्षाएं छात्रों के स्कूलों में ही होंगी

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CBSE board 10th and 12th examinations to be held in July

नई दिल्ली : कोरोना महामारी के चलते देशभर में किये गए लॉकडाउन की वजह से CBSE बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षायें बीच में ही रोक देनी पड़ी थी। इस बची हुई परीक्षाओं को छात्र-छात्राएं अपने ही स्कूल में दे सकेंगे। परीक्षा के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन छात्रों को स्वयं करना होगा। उन्हें अपने साथ सैनिटाइजर ले जाना होगा और अपना चेहरा मास्क से कवर करना होगा। परीक्षाओं के आयोजन को लेकर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि “सीबीएसई बोर्ड की 10वीं और 12वीं की बची हुई परीक्षाएं छात्रों के स्कूलों में आयोजित की जाएंगी, न कि बाहरी केंद्रों पर। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं का रिजल्ट जुलाई के अंत में घोषित किया जा सकता है।” 10वीं और 12वीं बोर्ड की बची हुई परीक्षाएं 1 जुलाई से 15 जुलाई के बीच आयोजित की जाएँगी। 12वीं कक्षा के बचे हुए पेपरों के लिए परीक्षा पूरे देश में आयोजित होगी जबकि 10वीं कक्षा की शेष परीक्षा केवल उत्तर पूर्व दिल्ली के लिए आयोजित की जाएंगी। उत्तर पूर्व दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के चलते उस समय परीक्षायें स्थगित करनी पड़ी थी।

पहाड़ के प्रवासियों की सशक्त आवाज़ बने मोहन काला, खेत-खलिहानों तक लौटाया लॉकडाउन में फंसे हजारों पहाड़ वासियों को

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उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के थैलीसैंण तहसील के कपरोली गांव के रहने वाले 20 वर्षीय आनंद सिंह राणा के चेहर पर आज रौनक है। कोविड-19 के चलते लॉकडान के संघर्षों से गुजरते हुए आनंद सिंह एक ऐसी पीड़ा में फंसे की जीवन के संघर्ष सामने आकर खड़े हो गए। वह भी अपने खेत-खलिहान से कई हजार किलोमीटर दूर मुंबई जैसे शहर में,जहां जीवन के लिए खुशियां तलाशने के मायने भी संघर्ष होता है। इन संघर्षों के बीच आनंद सिंह को अचानक पैरालिसिस ने अपनी आगोश में ले लिया और फिर राणा ऐसे बिखरे की जीवन हारते हुए दिखने लगा।

इन संघर्षों के साथ पहाड़ खुद का जीवन हारने वाला ही था कि आनंद के साथ पहाड़ के संघर्षों के मायनों को करीब से देखने-समझने वाले तमाम सामाजिक संगठन और लोगों आकर खड़े हो गए। जिनमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई मोहन काला फाउंडेशन के अध्यक्ष और सामाज सेवी मोहन काला ने,जिन्होंने पहाड़ के इस युवा की ही नहीं बल्कि मुंबई से लेकर पहाड़ तक कोविड-19 के चलते लॉकडाउन में फंसे हजारों लोगों को अपने खेत-खलिहानों तक पहुंचाया। साथ ही इन लोगों की खाने-रहने की व्यवस्था की,और उनकी सेवा का यह कार्य आज भी निरंतर जारी है।

मोहन काला पहाड़ के जीवन परिवेश से जुड़ा वह नाम हैं। जिन्होंने पहाड के जीवन को कभी थकने नहीं दिया कभी हारने नहीं दिया। इसी का परिणाम हैं कि मोहन काला आज मुंबई से उत्तराखंड के दूरगामी क्षेत्रों में कोविड-19 संक्रमण के चलते लॉकडाउन में फंसे हजारों उत्तराखंडियों तक खाद्य सामग्री और मास्क पहुंचा चुके है।

मोहन काला के पहाड़ के प्रति अथा प्रेम और अपने लोगों के लिए किसी भी मुश्किल समय में उनके साथ खड़े रहने के जज्बे का ही परिणाम हैं कि थैलीसैण तहसील के कपरोली गांव का बीस वर्षीय आनंद राणा 2000 किमी दूर मुंबई से अपने गांव पुहंचा सका। यह निश्चित तौर पर उत्तराखंड के लोगों के लिए गर्व की बात हैं कि मोहन काला जैसे व्यक्तिव उनके साथ खड़ा है। जिन्होंने अपने पहाड़ के जीवन परिवेश को खुद में समेटते हुए। मुंबई से बीमार युवक को कुछ घंटों में एंबुलेंस की व्यवस्था कर तमाम अपने साथियों और संगठनों के सहयोग से अपने गांव तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी के साथ मोहन काला अपने अथक प्रयासों से मुंबई में रहने वाले हजारों प्रवासियों के बस की व्यवस्था कर उन्हें उनके खेत-खलिहानों तक पहुंचा चुके है।

मायानगरी मुंबई में इस संकट के समय में हजारों की संख्या में उत्तराखंडी प्रवासी लॉकडाउन के चलते फंसे है। जिनके पास अब न रोजगार हैं न खाने-पीने की कोई व्यवस्था। ऐसे समय में पहाड़ के जरूरतमंदों की शसक्त आवाज़ के नाम से जाने जाने वाले मोहन काला ने अपनी संस्था मोहन काला फाउंडेशन के माध्यम से इन प्रवासी उत्तराखंडियों तक न केवल खाद्य सामग्री पहुंचा रहे है, बल्कि इन्हें इनके खेत-खलिहानों तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है।

मोहन काला एवं तमाम सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहोयग से अपने गांव पहुंचे आनंद सिंह राणा नम् आँखों से बताते हैं कि आज मुझे जो जीवन मिला है। उसके लिए मैं उन सभी उत्तराखंडियों और आदरणीय मोहन काला जी का कोटि-कोटि आभार व्यक्त करता हूं। क्योंकि मैं आज अपनी माटी पर लौटा हूं तो इसका श्रेय इन लोगों को जाता है।

मोहन काला 23 मार्च से हुए लॉकडाउन के बाद से निरंतर मुंबई,दिल्ली और देश के तमाम दूरसे शहरों के साथ-साथ उत्तराखंड के उन दूरगामी क्षेत्रों में फंसे गरीब और असाहय लोगों तक खाद्य सामग्री और मास्क पहुंचा चुके है। जो लोगों इस संकट के समय में बहुंत जरूरतमंद है। मुंबई में फंस हजारों नौजवानों तक काला जी निरंतर मदद पहुंचा रहे है।

मोहन काला के अथक प्रयासों का ही नतीजा हैं कि आज मुंबई में फंसे हजारों प्रवासी उत्तराखंडी युवा अपने गांव को लौट चुके है। जो मोहन काला जी की प्रयासों की सराहना करते हुए बताते हैं कि इस संकट के समय में हमारे गांव लौटने में मोहन काला जी ने जो प्रयास किए। उसके लिए हम काला जी के सदैव आभारी रहेंगे।

इस बारे में जब हमने मोहन काला जी से बातचीत की तो उन्होंने बहुत ही भावुकता से बताया की मैं पहाड़ की माटी से जुड़ा हूं। पहाड़ मेरा जीवन हैं,और आज यह जीवन संकट में है। मेरे पहाड़ का युवा टूट रहा है,लेकिन मैं पहाड़ की जीवन को संकट में नहीं आने दूंगा,पहाड़ के युवाओं को टूटने नहीं दूंगा। मेरी कोशिश हैं कि मैं उन लोगों तक मदद पहुंचा सकूं,जो आज के समय में बहुत जरूरतमंद है। आज पहाड़ का युवा शहरों में बहुत अकेला हो गया है। मैंने उन्हें कहा हैं आप किसी भी तरह से फ्रिक न करें। हम आपके खाने,रहने और आपको पहाड़ तक लौटाने की व्यवस्था कर रहे है। बस इस सोच के साथ हम आगे बढ़ रहे है। इसी का परिणाम हैं कि आज बड़ी संख्या में पहाड़ का नौजवान अपने गांव अपने खेत-खलिहानों तक लौटा है। वह खुश हैं कि इस संकट के समय में वह सब अपनी मातृ भूमि पहुंचा है। श्री काला बताते हैं कि हमारी कोशिश हैं ज्यादा से ज्यादा लोगों तक मदद पहुंचा पाए। इस महत्वपूर्ण कार्य में हमारे साथ कई लोगों जुड़े है। मैं उन्हें कोटि-कोटि प्रणाम करता हूं। साथ ही आप सभी से निवेदन करता हूं कि आप सब इस संकट के समय में अपना ख्याल रखें। सरकार द्वारा बनाए गए दिशा-निर्देशों का पालन करें। हम सब मिलकर बहुत जल्द इस कोरोना महामारी को हरा कर एक नये भारत नये उत्तराखंड का निर्माण करेंगे।

कोरोना के साथ जीवन यापन ही फिलहाल एक विकल्प है

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वैश्विक महामारी कारोना आज हमारे जीवन का हिस्सा बन कर रह गई है, आज भारत मे लॉकडाउन का 57 वाँ दिन है। 54 दिन का लगातार तीसरा लौकडाउन रहा। जिसे 18 मई 2020 से 14 दिन के लिए 31 मई 2020 तक बढ़ा दिया है, जिसे चौथा लॉकडाउन कहा जाएगा, जो अब  कुल 68 दिन का हो गया है। संक्रामक रोग कोरोना (कोविद-19) पूरे विश्व में बढ़ते ही जा रहा है। अब तक दुनियाभर में कोरोना संक्रमितों की संख्या 50,82,660 और मृतकों कि संख्या 3,29,294 जबकि देश में यही संख्या एक लाख से ज्यादा और मरने वालों की संख्या तीन हजार से ज़्यादा हो गई है। देश में एक रोगी से 100 रोगी होने में 45 दिन लगे, 100 से 50 हजार होने में करीब 45 से 50 दिन लगे और 50 हजार से एक लाख होने में मात्र करीब 12 दिन लगे। इस रफ्तार को देख अजीब से भय की आशंका होती है और ये स्थिति बहुत भयानक है। अब जब इसी के साथ जीवन यापन करना है तो हमारा राष्ट्रीय दायित्व और देश प्रेम कहता है हम सरकारी निर्देशों का पालन करें तभी हम इस वैश्विक महामारी कारोना को हरा सकते हैं।

एक कहावत है जान है तो जहान है”… बात सौ आने सही है। जीवन तो चलते रहने का नाम है हर परेशानी… दुःख… तकलीफ़ से लड़कर हमें आगे बढ़ते जाना है। अब जब सभी देश यहाँ तक की डब्लू एच ओ भी कह रहा है की हमे कारोना के साथ जीवन यापन करना सीख लेना चाहिये …. ऐसे समय में हमे कमर कस लेनी चाहिये और मिलकर इस महामारी का सामना करना चाहिये… डर को भगा हिम्मत से काम लेंगे तो  इस कारोना को भी जीतने में सफल हो जाएँगे….   कोरोना एक वायरस है,ऐसे वायरस पहले भी आ चुके हैं  जैसे टीबी, चिकनपॉक्स, मलेरिया, डेंगू, वायरल बुखार के बीच जिस तरह हम जीवन जी रहे हैं, ठीक वैसे ही हमें अब कोरोना को भी अपने जीवन का हिस्सा मानकर आगे बढ़ना है।शायद यही  एक व्यावहारिक उपाय है। हम सभी को सतर्कता, जागरूकता की आवश्यकता के साथ साथ अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाने की आवश्यकता है…  सिर्फ एक वायरस है, जिसका हम सब को मुकाबला करना है।

अपने दैनिक जीवन मे थोड़े बदलाव कर हम आसानी से इस कारोना के भय को मिटा अपना जीवन शान्ति से जी सकते हैं जैसे एक निश्चित शरारिक दूरी का ध्यान रख और सारे सरकारी निर्देशों का पालन कर…एक दूसरे का मनोबल बड़ा हम ना सिर्फ़ सुरक्षित रहेंगे बल्कि अपने दैनिक कार्य करते हुए अपनी आजीविका के लिये भी जा सकेंगे। ध्यान सिर्फ़ इतना रखना है की शरारिक दूरी का ध्यान रखना है सामाजिक दूरी का नहीं। जो बीमारी का शिकार हो गये हैं या ठीक होकर वापस आ गये हैं उनका हौसला बढ़ाना है , उनसे सामाजिक दूरी बना उन्हें अपराध बोध या ग्लानि का एहसास नहीं कराना।

थोड़ी सावधानी और थोड़ी सी सतर्कता साथ सेहत के प्रति जागरूकता, भय मुक्त निर्भय हो रह, एक दूसरे की मदद कर, एक दूसरे का सहयोग कर, अपने सामाजिक दायित्व निभा साथ ही राष्ट्र के प्रति एक जागरुक नागरिक बन अपने कर्तव्यों का निर्वाह कर इन छोटी छोटी बातों का ध्यान रख हम इस बीमारी कारोना के साथ रहते हुए भी खुशहाल जीवन जी सकते हैं फिर गाना भी है…

जीवन चलने का नाम
चलते रहो सुबह-ओ-शाम
के रस्ता कट जाएगा मितरा
के बादल छट जाएगा मितरा
के दुःख से झुकना ना मितरा
के एक पल रुकना ना मितरा
जीवन चलने का नाम…

चलते रहें ख़ुश रहें सब दिन नहीं होत न एक समान… ये वक्त भी कट जाएगा… नई रोशनी का सूरज जगमगाएगा बस जरुरत है अपने हौसले बुलंद रखें और हिम्मत से काम लें, अपना कर्म करते रहें यही इस कठिन समय ने भी हमे सिखाया है की तेज दौड़ कभी कभी थका देती है इसलिये दौड़ो जरूर पर जरुरत और क्षमता अनुसार… समय को पकड़ो उसके पीछे मत भागो … हर वक्त कुछ सिखा कर जाता हाई और आज जब इस महामारी के दौर में बिखरे परिवार एक हुए हैं ये भी तो एक उपलब्धि है… भागते भागते परिवार छूट गये थे अब जब बड़ी मुश्किल से एकत्रित हुए हैं तब दोबारा उन्हें बिखरने से बचाना है साथ ही कारोना को हरा उसी के साथ जीवन यापन करना भी सीखना है।

विजय लक्ष्मी भट्ट शर्मा
दिल्ली

उत्तराखंड: बुधवार को रिकॉर्ड 15 लोगों में कोरोना की पुष्टि, देर रात आये 4 नए मामले, 126 पहुंचा संक्रमितों का आंकड़ा

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coronavirus (covid-19) : उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण के मामलों ने रफ़्तार पकड़ ली है। यहाँ 2 दिनों में 29 लोगों में कोरोना वायरस की पुष्टि हो चुकी है। मंगलवार को जहाँ 14 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे, वहीँ आज बुधवार को अब तक के सबसे ज्यादा 15 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए। देर रात आई सैंपल रिपोर्ट में 4 नए लोगों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है। आज टिहरी गढ़वाल में 5, उधमसिंह नगर में 4, नैनीताल तथा उत्तरकाशी में 2-2 तथा हरिद्वार व अल्मोड़ा जिले में एक-एक कोरोना पॉजिटिव मरीज सामने आये। जिसके बाद अब राज्य में कुल कोरोना संक्रमितों की संख्या 126 हो गई है। वहीं इनमें से 53 मरीज ठीक हो चुके हैं। पिछले 11 दिन में प्रदेश में कोरोना के 65 मामले सामने आ चुके हैं। टिहरी जिले में पहली बार संक्रमण के मामले सामने आए हैं।

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उत्तराखंड : वाहनों के संचालन की ऑड-ईवन व्यवस्था पर सरकार का U-टर्न, वापस लिया फैसला

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देहरादून : मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के निर्देश पर प्रदेश में वाहनों के लिए लागू की गई ऑड-ईवन व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। ऑड-ईवन व्यवस्था से लोगों को हो रही व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।  इस संबंध मे अधिकारियों को निर्देश दिये गये हैं।

बतादें कि लॉकडाउन 4.0 को लेकर केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन्स पर राज्य सरकार ने प्रदेश के आठ निगमों देहरादून, ऋषिकेश, रुद्रपुर, काशीपुर, हरिद्वार, कोटद्वार, रुड़की और हल्द्वानी में निजी चौपहिया वाहनों की आवाजाही ऑड-ईवन नंबर प्लेट के आधार पर करने का निर्णय लिया था। उत्तराखंड सरकार ने आज अपने पिछले फैसले पर U टर्न लेते हुए प्रदेश के इन 8 शहरों में निजी चौपहिया वाहनों के संचालन के लिए बनाई ऑड-ईवन (सम-विषम) की व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। अब पहले की तरह सुबह सात बजे से शाम चार बजे तक वाहनों का रोज संचालन हो सकेगा।

श्रीनगर गढ़वाल : कोरोना संकट के बीच युवाओं ने किया स्वैच्छिक रक्तदान

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Youth donated voluntary blood amid Corona crisis

श्रीनगर गढ़वाल : कोरोना महामारी से व्याप्त वैश्विक संकट के दौरान समाज में सामुदायिक सहभागिता से सहायतार्थ सहयोग हेतु एक कदम स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आज बुधवार को अदिति बेडिंग पॉइंट श्रीनगर गढ़वाल में आयोजित किया गया। इस आयोजन की एक विशेषता यह रही कि आज शिक्षामंत्री उत्तराखंड सरकार का जन्म दिवस भी था। इस अवसर पर आयोजक संयोजक डॉ. सुधीर जोशी पूर्व प्रदेश मंत्री अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् उत्तराखंड ने कहा कि ये महत्वपूर्ण और नेक कार्य में सहयोग देने वाले सभी लोग साधुवाद के पात्र हैं। जिन्होंने अपनी जान की परवाह किये बिना घर से बाहर निकलकर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाई।

इस अवसर पर राज्य मंत्री अतर सिंह असवाल, श्रीनगर मंडल अध्यक्ष भाजपा गिरिश पैन्यूली उर्फ बन्नु भाई, शिक्षक कर्मचारी नेता महेश गिरि, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संगठन टिहरी के महासचिव किशोर सजवाण, भाजपा नेता शंकर मिश्रा, सभासद विनित पोस्ती, प्रमिला भण्डारी, सूरज हिमालायज आदि उपस्थित रहे। रक्तदान करने वालो में महत्वपूर्ण सुधीर जोशी, अभिनव भण्डारी, प्रदीप अंथवाल, विनीत पोस्ती, कमलकांत उनियाल, विश्वा घिल्डियाल, रविन्द्र खरोला, प्रमोद बलोनी, अतुल उनियाल, भाजपा नेता शंकर मणी मिश्रा पहली बार, रक्तदान करने वाले युवा अंकित गिरि और विक्रम सजवाण रहे। इस रक्तदान में 26 लोगों द्वारा रक्तदान किया गया। कुछ बालिकाओं एवं युवाओं का ह्यूमोगोलोबिन कम पाये जाने के कारण उन्हें रोका गया। अंत में डाक्टर सतीश और उनकी टीम को सम्मानित किया गया।

उत्तराखंड में इस साल नहीं होंगे कर्मचारियों के तबादले

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देहरादून : उत्तराखंड में इस साल अधिकारियों/कर्मचारियों के तबादले नहीं किए जाएंगे। प्रदेश सरकार ने कोरोना महामारी के मद्देनजर इस बार तबादला सत्र को शून्य घोषित कर दिया है। इसके साथ ही सरकार ने यह भी व्यवस्था की है कि तबादला नियम के अंतर्गत आने वाले किसी भी कर्मचारी या विभाग को किसी प्रकार की परेशानी होती है, तो फिर वह कार्मिक विभाग के माध्यम से प्रस्ताव विचार-विमर्श के लिए तबादला समिति के सामने रख सकता है। अपर मुख्य सचिव कार्मिक राधा रतूड़ी ने बुधवार को इस बाबत शासनादेश जारी कर दिया है। अपर मुख्य सचिव की ओर से जारी शासनादेश में कहा गया है कि लॉकडाउन के कारण प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों पर प्रभाव पड़ा है। कोरोना महामारी घोषित होने के कारण कर्मचारियों व अधिकारियों के एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है इसलिए 2020-21 के सत्र में किसी भी विभाग में तबादले नहीं होंगे। हालांकि हालांकि, तबादला कानून की धारा 27 के तहत सरकार को कोविड-19 के प्रभावी नियंत्रण के लिए सरकार के पास तबादलों का अधिकार रहेगा और कोरोना महामारी पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर तैनाती के लिए कर्मचारियों के तबादले किए जा सकेंगे।

उत्तराखंड : मुंबई से लौटे 2 और युवक निकले कोरोना पॉजिटिव, आज अब तक मिले हैं 11 संक्रमित, 122 पहुँचा कोरोना मरीजों का आंकड़ा

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Coronavirus (covid-19) : मंलवार की तरह आज बुधवार को भी उत्तराखंड में कोरोना के मरीजों का आंकड़ा दहाई के अंक तक पहुँच चुका है। मंगलवार को जहाँ राज्य में रिकॉर्ड 14 लोगों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई थी, वहीँ आज बुधवार को अब तक 11 लोगों में कोरोना की पुष्टि हो चुकी है। बुधवार को स्वास्थ्य विभाग द्वारा दोपहर 2 बजे जारी बुलेटिन के अनुसार राज्य के कुल 9 नए कोरोना पॉजिटिव लोग मिले थे। जिनमे अल्मोड़ा, उत्तरकाशी और हरिद्वार जिले से एक-एक, नैनीताल से दो तथा ऊधमसिंह नगर जनपद से 4 कोरोना संक्रमित मामले सामने आए थे। वहीँ स्वास्थ्य विभाग द्वारा रात 8 बजे जारी बुलेटिन के अनुसार उत्तराखंड में 2 अन्य लोगों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है। अभी अभी प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार उत्तरकाशी जिले का एक 29 वर्षीय युवक कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। जबकि दूसरा कोरोना संक्रमित 25 वर्षीय युवक टिहरी गढ़वाल का रहने वाला है। दोनों ही युवक मुम्बई (महाराष्ट्र) से यहाँ लौटे थे। जिसके बाद अब प्रदेश में कुल संक्रमितों का आंकड़ा 122 पहुंच गया है। वहीं, इनमें से अब तक 53 मरीज ठीक हो चुके हैं।

बाहरी राज्यों से लगातार प्रवासियों के पहाड़ पहुँचने के बाद अब राज्य के 7 पहाड़ी जिलों अल्मोड़ा, बागेश्वर, नैनीताल, पौड़ी-गढ़वाल, चमोली, टिहरी औऱ उत्तरकाशी में भी कोरोना के मामले आने लगे हैं। पिछले 12 दिन में यहां पर कोरोना के 59 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 57 मरीज ऐसे हैं जो कि दूसरे राज्यों/शहरों से वापस लौटे हुए हैं। कोरोना संक्रमण के लिहाज से राज्य में आने वाले दिनों में स्थिति और भी विकराल हो सकती है।

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